10.1.17

40 पार के बाद सुखमय वृद्धावस्था के लिए यह भी याद रखें...


        40 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी व्यक्ति इस सन्देश को विशेष ध्यान से पढ़ें, क्योंकि यह उनके आने वाले जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।

        1.  जहाँ तक संभव हो अपने स्वयं के स्थायी निवास में ही रहें जिससे कि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद बगैर किसी बाधा के ले सकें ।  (एक कहावत है - अपना घर हंग-हंग भर, दूसरे का घर थूकने का डर)

          2.  अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें । परिजनों के अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें ।

          3.  अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकताएँ भी बदल जाती हैँं और कई बार चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते ।

          4.  उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं, यानी सच्चे हितैषी हों । 

          5.  किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें ।

         6.  अपनी संतानों के जीवन में दखल अन्दाजी ना करें, उन्हें अपने तरीके से अपना जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जिएँ ।

          7.  अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास  ना करें ।

           8.  लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें ।

           9.  प्रार्थना करें लेकिन भीख ना मांगे, यहाँ तक कि भगवान से भी नहीं । अगर भगवान से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत ।

          10.  अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें । छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं ।

          11.  अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें ।

          12.  प्रति वर्ष  अपने जीवन  साथी केे साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं,  इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा ।

          13.   किसी भी टकराव को टालें एवं तनाव रहित जीवन जिऐं ।

          14.   जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें ।

        15.  अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक  पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं ।

 खुशनुमा जीवन की शुभकामनाओं के साथ...


2 टिप्पणियाँ:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप को विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं |

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "१० जनवरी - विश्व हिन्दी दिवस - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Kavita Rawat ने कहा…

सही बात है

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