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11.1.20

तैयारी सुखमय वृद्धावस्था के लिए...

       अपनी 40 वर्ष की उम्र तक आगामी जीवन के लिये सभी व्यक्ति इस सन्देश के मुताबिक तैयारी करें, क्योंकि यह उनके आने वाले जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।

        1.  जहाँ तक संभव हो अपने स्वयं के स्थायी निवास में ही रहें जिससे कि स्वतंत्र जीवन जीने का आनंद बगैर किसी बाधा के ले सकें ।  (एक कहावत है - अपना घर हँग-हँग भर, दूसरे का घर थूकने का डर...)

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          2.  अपना बैंक बेलेंस और भौतिक संपत्ति अपने पास रखें । परिजनों के अति प्रेम में पड़कर किसी के नाम करने की ना सोचें ।

          3.  अपने बच्चों के इस वादे पर निर्भर ना रहें कि वो वृद्धावस्था में आपकी सेवा करेंगे, क्योंकि समय बदलने के साथ उनकी प्राथमिकताएँ भी बदल जाती हैँं और कई बार चाहते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाते ।

          4.  उन लोगों को अपने मित्र समूह में शामिल रखें जो आपके जीवन को प्रसन्न देखना चाहते हैं, यानी सच्चे हितैषी हों । 

          5.  किसी के साथ अपनी तुलना ना करें और ना ही किसी से कोई उम्मीद रखें ।

         6.  अपनी संतानों के जीवन में दखल ना दें,  उन्हें अपने तरीके से उनका जीवन जीने दें और आप अपने तरीके से अपना जीवन जिएँ ।

          7.  अपनी वृद्धावस्था को आधार बनाकर किसी से सेवा करवाने, सम्मान पाने का प्रयास  ना करें ।

           8.  लोगों की बातें सुनें लेकिन अपने स्वतंत्र विचारों के आधार पर निर्णय लें ।

           9.  प्रार्थना करें लेकिन भीख ना मांगे, यहाँ तक कि भगवान से भी नहीं । अगर भगवान से कुछ मांगे तो सिर्फ माफ़ी और हिम्मत ।

          10.  अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें, चिकित्सीय परीक्षण के अलावा अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार अच्छा पौष्टिक भोजन खाएं और यथा सम्भव अपना काम अपने हाथों से करें । छोटे कष्टों पर ध्यान ना दें, उम्र के साथ छोटी मोटी शारीरिक परेशानीयां चलती रहती हैं ।

          11.  अपने जीवन को उल्लास से जीने का प्रयत्न करें खुद प्रसन्न रहने की चेष्टा करें और दूसरों को प्रसन्न रखें ।

          12.  प्रति वर्ष  अपने जीवन  साथी केे साथ भ्रमण/ छोटी यात्रा पर एक या अधिक बार अवश्य जाएं,  इससे आपका जीने का नजरिया बदलेगा ।

          14.   जीवन में स्थायी कुछ भी नहीं है चिंताएं भी नहीं इस बात का विश्वास करें ।

        15.  अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को रिटायरमेंट तक  पूरा कर लें, याद रखें जब तक आप अपने लिए जीना शुरू नहीं करते हैं तब तक आप जीवित नहीं हैं ।

 आपके खुशनुमा जीवन की शुभकामनाओं के साथ...

26.1.17

सबक और आशा...


            एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया । खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया ।  रेस्टॉरेंट में बैठे दुसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को तिरस्कारपूर्ण नजरों से देख रहे थे, लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था ।

             खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया,  उसके कपड़े साफ़ किये, चेहरा साफ़ किया, बालों में कंघी की, और चश्मा पहनाकर बाहर लाया । सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे । बेटे ने बिल का पेमेन्ट किया और अपने परिवार सहित बाहर जाने लगा । तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा- "क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?"

            बेटे ने जवाब दिया- "नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर नहीं जा रहा ।"

            वृद्ध ने कहा "बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो, प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद (आशा)...

            दोस्तों आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसंद नही करते और कहते हैं क्या करोगे आप से चला तो जाता नही, ठीक से खाया भी नही जाता । आप घर पर ही रहो वही अच्छा होगा ।

            किंतु आप यह क्यों भूल जाते हैं कि जब आप छोटे थे और आप के माता पिता आप को अपनी गोद मे उठा कर ले जाया करते थे । आप जब ठीक से खा नही पाते थे तो माँ आपको अपने हाथ से खाना खिलाती थी और खाना गिर जाने पर डाँट नही प्यार जताती थी । फिर वही माँ बाप उनके बुढापे मे भार स्वरुप क्यो लगने लगते है ?

          इस पृथ्वी पर तो माँ-बाप की तुलना भगवान से ही की गई है इसलिये उनकी सेवा कीजिये और उन्हे प्यार दीजिये, क्योकि एक दिन आप भी बूढे होंगे फिर अपने बच्चो से सेवा की उम्मीद कैसे करेंगे ? किंतु यदि इसे पढने के बाद अगर 10% लोगों में भी बदलाव आ गया तब तो यह पोस्ट अपने उद्देश्य में सार्थक है ही ।

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