1.7.16

आरक्षण का दंश...

           
            एक सज्जन से एक सवाल पूछा गया कि भारत में जनरल कैटेगरी वाला होने पर आपका क्या अनुभव है तो उन्होंने जो जबाब दिया, उसे पढ़िए........(हिंदी में अनुवाद)

           प्रवेश परीक्षा:
         मेरा स्कोर :192, उसका स्कोर :92, जी हाँ हम एक ही कॉलेज में पढ़े.....

           College Fees,
         मेरी हर सेमिस्टर की फी 30200, (मेरे परिवार की आय 5 lacs से कम है..) उसकी हर सेमिस्टर की फी 6600. (उसके माता और पिता दोनों अच्छा कमा रहे हैं......) जी हाँ हम दोनों एक ही होस्टल में रहते थे...

          Mess Fees,
         मैं 15000/- हर सेमिस्टर के देता था.... वो भी 15000 हर सेमिस्टर के देता था, लेकिन सेमिस्टर के अंत में वो उसे रिफंड होते थे..... जी हाँ हम एक ही मेस में खाते थे....

          Pocket Money,
         मेरा खर्चा 5000 था जो कि मैं ट्यूशन और थोड़ा बहुत अपने पिता से लेता था... वो 10000 खर्चा करता था जो कि उसे स्कॉलरशिप के मिलते थे... जी हाँ हम एक साथ पार्टी करते थे....

          CAT 2015,
        मेरा स्कोर : 99 percentile. (किसी IIM से एक मिसकॉल का इंतज़ार रहा.) उसका स्कोर : 63 percentile. ( IIM Ahemedabad के लिए सलेक्ट हुआ) जी हाँ ऐप्टीट्यूड और रीजनिंग उसे मैंने पढ़ाया था....

          OIL Campus recruitement,
          मैं : Rejected. (My OGPA 8.1) वो : selected. (His OGPA 6.9) जी हाँ हमने एक ही कोर्स पढ़ा था...

          GATE Score,
       मेरा स्कोर : 39.66 (डिसक्वालीफाईड सो INR 1,68,000 की स्कॉलरशिप भी हाथ से गई) उसका स्कोर : 26 (क्वालीफाईड और INR 1,68,000 के साथ-साथ अतिरिक्त स्कॉलरशिप भी) जी हाँ हमने एक जैसे नोट्स शेयर किये थे..

            कौन हूँ मैं ? मैं भारत में एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ...

            दिमाग में बस कुछ सवाल हैं.....

            क्या उसके पास चलने के लिए दो पैर नहीं हैं ? क्या उसके पास लिखने या काम करने के लिए दो हाथ नहीं हैं ? क्या उसके पास बोलने के लिए मुंह नहीं है ? क्या उसके पास सोचने के लिए दिमाग नहीं है ? अगर हैं तो फिर हम दोनों को एक जैसा ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता ? 

          ये बात राजनितिक पार्टीयो के बजाय देश के सम्माननीय न्यायालय के सभी महानुभावों तक पहुंचे तब तक forward करे ताकि देश आरक्षण की दीमक से बरबाद होने से बच जाये ।

सोर्स - WhatsApp.
 

3 टिप्पणियाँ:

Ravishankar Shrivastava ने कहा…

मप्र में तो जातिवादी वोटों के चक्कर में नौकरी में प्रमोशन में भी आरक्षण लागू है जिसे न्यायालय ने खारिज किया हुआ है, मगर मप्र के नेता 'कोई माई का लाल' इसे हटा नहीं सकता कह कर वोट कबाड़ रहे हैं.
वैसे, बताता चलूं कि मैंने तो खैर सरकारी नौकरी छोड़ दी है, मगर मेरे साथ के कर्मी एक वर्ग के अभी भी कार्यपालन अभियंता हैं (मात्र 1 प्रमोशन) जबकि दूसरे वर्ग के कर्मी मुख्य अभियंता हैं (3 प्रमोशन!)
हद है!
यहाँ तो वर्ग संघर्ष उभर रहा है, जो आने वाले दिनों में और उग्र होने की संभावना है.
क्षुद्र मानसिकता के नेताओं को जरा गंभीरता से भारत के बारे में सोचना होगा, मगर वे अपने वोट कबाड़ने और भ्रष्टाचार करने से इतर सोच ही नहीं पाते!!

Asha Joglekar ने कहा…

इस तरह के आरक्षण से तो बैरभाव उपजेगा और जैसा कि आप कह रहे हैं जातिवाद उग्र होगा। आरक्षण देते हुए सांपत्तिक स्थिति देखना आवश्यक हो।

Kavita Rawat ने कहा…

अारक्षण का अाधार अार्थिक अाधार होना चाहिए। इस तरह से कभी भी भयंकर जातिगत हिंसा फैल सकती है।

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