कमियां लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कमियां लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

11.1.20

आरक्षण का दंश...

        एक सज्जन से एक सवाल पूछा गया कि भारत में जनरल कैटेगरी वाला होने पर आपका क्या अनुभव है तो उन्होंने जो जबाब दियाउसे पढ़िए........(हिंदी में अनुवाद)

           प्रवेश परीक्षा:
        
मेरा स्कोर :192, उसका स्कोर :92, जी हाँ हम एक ही कॉलेज में पढ़े.....

           College Fees,
        
मेरी हर सेमिस्टर की फी 30200, (मेरे परिवार की आय 5 lacs से कम है..) उसकी हर सेमिस्टर की फी 6600. (उसके माता और पिता दोनों अच्छा कमा रहे हैं......) जी हाँ हम दोनों एक ही होस्टल में रहते थे...

          Mess Fees,
        
मैं 15000/- हर सेमिस्टर के देता था.... वो भी 15000 हर सेमिस्टर के देता था, लेकिन सेमिस्टर के अंत में वो उसे रिफंड होते थे..... जी हाँ हम एक ही मेस में खाते थे....

          Pocket Money,
        
मेरा खर्चा 5000 था जो कि मैं ट्यूशन और थोड़ा बहुत अपने पिता से लेता था... वो 10000 खर्चा करता था जो कि उसे स्कॉलरशिप के मिलते थे... जी हाँ हम एक साथ पार्टी करते थे....

          CAT 2015,
       
मेरा स्कोर : 99 percentile. (किसी IIM से एक मिसकॉल का इंतज़ार रहा.) उसका स्कोर : 63 percentile. ( IIM Ahemedabad के लिए सलेक्ट हुआ) जी हाँ ऐप्टीट्यूड और रीजनिंग उसे मैंने पढ़ाया था....

          OIL Campus recruitement,
         
मैं : Rejected. (My OGPA 8.1) वो : selected. (His OGPA 6.9) जी हाँ हमने एक ही कोर्स पढ़ा था...

          GATE Score,
      
मेरा स्कोर : 39.66 (डिसक्वालीफाईड सो INR 1,68,000 की स्कॉलरशिप भी हाथ से गई) उसका स्कोर : 26 (क्वालीफाईड और INR 1,68,000 के साथ-साथ अतिरिक्त स्कॉलरशिप भी) जी हाँ हमने एक जैसे नोट्स शेयर किये थे..

           
कौन हूँ मैं ?  मैं भारत में एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ...

           
दिमाग में बस कुछ सवाल हैं.....
            क्या उसके पास चलने के लिए दो पैर नहीं हैं ? क्या उसके पास लिखने या काम करने के लिए दो हाथ नहीं हैं ? क्या उसके पास बोलने के लिए मुंह नहीं है ? क्या उसके पास सोचने के लिए दिमाग नहीं है ? अगर हैं तो फिर हम दोनों को एक जैसा ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता

         
ये बात राजनितिक पार्टीयो के बजाय देश के सम्माननीय न्यायालय के सभी महानुभावों तक पहुंचे तब तक forward करे ताकि देश आरक्षण की दीमक से बरबाद होने से बच जाये ।
 सोर्स - WhatsApp.

29.9.19

फूटा घडे की उपयोगिता...

            
            एक किसान के पास दो घडे थे जिसमें पानी की समस्या के कारण उसे दूर से पानी लाना पडता था । उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था जबकि दूसरा बिल्कुल सही था, इस वजह से रोज़ घर पहुँचते-पहुँचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था । ऐसा दो सालों से चल रहा था ।

            सही घड़े को इस बात का गुरूर था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है । फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा, “ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”

            "क्यों ?"   किसान ने पूछा - तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”

           “शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था  उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ, मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है और इस वजह से आपकी मेहनत बर्वाद होती रही है ।”  फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा ।

            किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला, कोई बात नहीं, मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो ।

            घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया, ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचतेपहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो फिर मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा ।

            किसान बोला,” शायद तुमने ध्यान नहीं दिया कि पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था । ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था, और मैंने उसका लाभ उठाया । मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे, तुम रोज़ थोडा-थोडा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया । आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ । तुम्हीं सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता ?”

            दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं । उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को जो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिये और जब हम ऐसा करेंगे तब फूटा घड़ाभी मूल्यवान हो जायेगा ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...