12.5.13

मात्र दिवस विशेष - माँ तुझे सलाम...!


उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरुरत क्या होगी ? 
ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी ?



माँ ही मन्दिर, माँ ही मूरत, माँ पूजा की थाली, 
बिन माँ के जीवन ऐसा, जैसे बगिया बिन माली ।


माँ ने कभी हमें खुली छत के नीचे नहीं सुलाया 
और कुछ नहीं मिला तो छाँह के लिये अपनी ममता का आँचल ही 

हम पर ओढा दिया ।
 

माँ ब्रह्मा है, माँ विष्णु है और महादेव भी माँ ही है । 
ब्रह्मा जन्म देते हैं, विष्णु पालन करते हैं और महादेव उद्धार करते हैं । 
जो तीनों देवों का कार्य अकेली पूरा करती है, 
धरती पर वही माँ कहलाती है 

 





दुनिया में माँ की कीमत क्या होती है 
ये उससे बेहतर कौन बता सकता है 
जिसकी माँ दुनिया में नहीं रही ।


  

माँ जब हमारे पास रहती है 
तो अपने प्रेम का खजाना हम पर लुटाती है 
और जब दूर होती है 
तो अपनी दुआओं की दौलत से हमें धन्य करती है






कबूतरों को दाना डालना, वृद्धाश्रम में दान देना 

और देवी के मंदिर में चुनरी चढाना अच्छी बात है 

पर जन्म देने वाली माँ को भोजन, वस्त्र और हाथखर्ची देने से 

मुँह मोड लेना दया-दान-पूजा का अपमान है ।





 पत्नी हमारी पसंद है और माँ हमारा पुण्य, 

हम ऐसा कोई कार्य न करें जिससे पसन्द के आगे 

पुण्य का दम घुटने लगे ।




  

है कौनसी वो चीज जो यहाँ नहीं मिलती, 

सबकुछ मिल जाता है लेकिन हां माँ नहीं मिलती ।




 
माँ-पिता की सेवा का मतलब सिर्फ उनके हाथ-पांव दबाना नहीं 

बल्कि उनकी बतों का पालन करना और 
उनकी उम्मीदों पर खरे उतरना ही उनकी सच्ची सेवा है ।
 

मात्र-दिवस के शुभदिन 
आप सभीको  हर्दिक शुभकामनाएँ...


चित्र सौजन्य - फेसबुक  एवम्
टाईप कोटेशन मुनि श्री चंद्रप्रभश्री जी के सौजन्य से.

अधिक उपयोगी व रोचक जानकारी के लिये इस लिंक को भी अवश्य देखें-


13 टिप्पणियाँ:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (12-05-2013) के चर्चा मंच 1242 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

मन की हर बात जान जाती हैं माँ- बिना कहे ही !

Vaanbhatt ने कहा…

इस संकलन के लिए तहे दिल से धन्यवाद...मातृ-दिवस की शुभकामनाएं...

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

ma ki shakti aparmpaar hai ....

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन के माँ दिवस विशेषांक माँ संवेदना है - वन्दे-मातरम् - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत लाजवाब ... माँ के अनेक रूप हैं ... वो प्रेम भी है शक्ति भी है करुना भी है तो अग्नी भी है ...
नमन है माँ को ...

संध्या शर्मा ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति..मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

शारदा अरोरा ने कहा…

sundar ...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सकल विश्व जननी तू माँ है।

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर सामयिक प्रस्तुति ...
आपको भी मातृ दिवस की शुभकामनायें ..

आशा जोगळेकर ने कहा…

माँ तुझे सलाम ।

Ambrish Mishra ने कहा…

thanks a lot for this....

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