7.6.16

रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के...


           एक उद्योगपति किसी अर्जेंट मिटिगं में भाग लेने जा रहे थे । राह में भयंकर तूफ़ान आया, ड्राइवर ने उनसे पूछा - अब हम क्या करें ?
            उद्योगपति ने  जवाब दिया - गाडी चलाते रहो ।

            तूफ़ान में गाडी चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था व  तूफ़ान और भी भयंकर होता जा रहा था अतः ड्राइवर ने फिर पूछा- अब मैं क्या करू ? 

            गाडी चलाते रहो - उद्योगपति ने पुनः कहा ।

            थोड़ा आगे जाने पर ड्राइवर ने देखा की राह में कई वाहन तूफ़ान की वजह से रुके हुए थे... उसने फिर उद्योगपति से कहा - मुझे गाडी रोक देनी चाहिए...  मैं मुश्किल से देख पा रहा हूं । यह भयंकर स्थिति है, और प्रत्येक चालक ने अपना वाहन रोक दिया है...

            इस बार उद्योगपति ने फिर निर्देशित किया - लेकिन तुम गाडी रोकना नहीं । धीरे चले तो धीरे ही सही, किंतु चलाते रहो....

            तूफ़ान ने बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लिया था, किन्तु ड्राइवर ने निर्देसानुसार गाडी चलाना नहीं छोड़ा, और अचानक ही उसने देखा कि कुछ-कुछ साफ़ दिखने लगा है...! चंद किलोमीटर आगे जाने के पश्चात ड्राइवर ने देखा कि तूफ़ान थम गया है और सूरज दिख रहा है ।

            तब उद्योगपति ने कहा - अब तुम गाडी रोककर बाहर आ सकते हो...!  चालक ने आश्चर्य से पूछा - पर अब क्यों ?

            उद्योगपति ने कहा - जब तुम बाहर आओगे तो देखोगे कि जो राह में रुक गए थे, वे अभी भी तूफ़ान में ही फंसे हुए हैं । किंतु तुमने गाडी  चलाने का प्रयत्न नहीं छोड़ा, तो तुम अब तूफ़ान के बाहर हो ।

            यह किस्सा उन लोगों के लिए एक प्रमाण भी है जो कठिन समय से गुजर रहे हैं । मजबूत से मजबूत इंसान भी प्रयास छोड़ देते हैं, जबकि प्रयास कभी छोड़ना नहीं चाहिए ।

            निश्चित ही जिन्दगी के कठिन समय गुजर जायेंगे और सुबह के सूरज की भांति चमक आपके जीवन में पुनः आयेगी !  ऐसा नहीं है की जिंदगी बहुत छोटी है, दरअसल हम जीना ही देर से शुरू करते हैं !

            कोहरे व तूफान से हमेशा एक अच्छी बात सीखने को मिलती है कि जीवन में जब भी रास्ता न दिख रहा हो तो बहुत दूर तक देखने की कोशिश व्यर्थ है, एक एक कदम चलते चलो, रास्ता खुलता जाएगा...!

            हौसला कायम रखना... अगर नाकामियां चरम पे हैं,  तो कामयाबी बेहद करीब होती है..!

            प्रायः कठिन समय में स्वयं को दिलासा दिलाने के हमारे आसान बहाने ये हो जाते हैं-

             1.  मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला.     जबकि...
                उचित शिक्षा का  अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।

            2.  मै इतनी बार हार चूका, अब हिम्मत नही.   
जबकि... 
               अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने ।

            3.  मै अत्यंत गरीब घर से हूँ.    
जबकि...
              पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे ।

            4.  बचपन से ही अस्वस्थ था.    
जबकि...
               ऑस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।

            5.   मैने साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है.    
जबकि...
                निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी ।

           6.   एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी...
जबकि...
               प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।

            7.  मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है.      जबकि...
               थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था ।

           
8.   बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था.     जबकि...
              प्रख्यात संगीतकार ए.आर.रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था ।

           
9.  मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी.     जबकि...
               लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।

           
10. मेरी लंबाई बहुत कम है.     जबकि...
                 सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।

           
11.  मै एक छोटी सी नौकरी करता हूँ, इससे क्या होगा.    जबकि...
                 धीरुभाई अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे ।


            12. मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है, अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा.     जबकि...
             दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है ।

          
13.  मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है, अब क्या कर पाउँगा.     जबकि...
                डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था ।

           
14.  मेरी उम्र बहुत ज्यादा है.      जबकि...
                विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था ।

           
15.  मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है.      जबकि...
             जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है ।

           
16.   मेरे पास धन नही.      जबकि...
                  इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे ।

          
17.   मुझे ढेरो बीमारियां है.     जबकि...
                वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो मे थे । राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे ।

            तात्पर्य यह कि -
आज आप जहाँ भी है, या कल जहाँ भी होगे, इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नही ठहरा सकते ।


            इसलिए
चुनाव आज ही कीजिये- 
                           सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने...


भाग्य को या किसी और को दोष क्यों देना ?
यदि सपने हमारे हैं तो,
प्रयास भी हमारे ही होने चाहिये ।

2 टिप्पणियाँ:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 9-6-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2368 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Asha Joglekar ने कहा…

वाह बहुत ही प्रेरक लेख, इसे पढ कर कौन न होगा प्रयत्नशील।

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आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

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