11.1.20

ऐसे भी सुधारें हम पर्यावरण...


            सेवा के इस अनूठे आयोजन से खुद को जोडें । वर्तमान के मोसमी फल जैसे आम, जामुन, चिकू इत्यादी जिनका हममे से कोई भी उपयोग करने के बाद कृपया इनके बीज फेंके नही, बल्कि इन्हें पानी से धोकर एक प्लास्टीक की थैली में रखते चलें और जब भी आप शहर से बाहर जावें- तब जहां भी सूखी बंजर भूमि दिखे वहीं पर इन बीजों को फेंकें, अथवा सडक के ऐसे ही किसी किनारे पर फेंकें । यदि हमारे इस सुकृत्य से एक बीज भी पनप कर पेड बन जाता है तो समझें हमारा उद्देश्य सफल हो गया । यह किसी अकेले व्यक्ति का विचार नही हे बल्कि महाराष्ट्र और कर्नाटक मे बहुत से लोग इस अद्भुत मिशन से जुडे हैं । आज सुबह ही एक लेख पढने के पश्चात ऐसा लगा कि क्यों    हम सभी साथी इस मिशन से जुडें एवम् इसे अपनी एक आदत बनालें । इसके अलावा...

 जिस दिन भी हम मरेंगे...अपने साथ एक पेड़ भी लेकर जलेंगे
 इसलिये प्रकृति का जो कर्ज रहेगा हम पर  वो तो चुका दो यारों...
जीते जी दो पेड़ तो लगा दो यारों...!

            आप सबसे निवेदन है, यह मैसेज सिर्फ तीन से पांच लोगों तक जरूर भेजें... और उन लोगों से भी कहें कि यह मैसेज आगे तीन से पांच लोगों को भेजें, हम सब बलिदान ना सही पर देश के लिए इतना छोटा सा काम तो कर ही सकते है,,,

1.
कचरा सड़क पर ना फेंकें ।
2.
सड़कों, दीवारों पे ना थूकें ।
3.
नोटों, दीवारों पर ना लिखें ।
4.
गाली देना छोड़ दें ।
5.
पानी एवम् लाइट बचाएँ ।
6.
एक पौधा लगाएँ ।
7.
ट्रेफिक रूल्स ना तोडें ।
8.
रोज़ माता पिता का आशीर्वाद लें ।
9.
लड़कियों की इज्जत करें ।
10.
एम्बुलेंस को रास्ता दें ।

देश को नहीं, पहले खुद को बदलें । 
            यदि हम चाहते हैं कि हमारी संतानों को आने वाले समय में रहने को साफ व सुरक्षित माहौल मिले तो हमें इन छोटे-छोटे नियमों को अनिवार्य रुप से अपनी आदत बना लेना चाहिये वर्ना कोई भी मोदी, गांधी अथवा केजरीवाल जैसे नेता भी अकेले कुछ सुधार नहीं कर पाएंगे जब तक कि इन छोट-छोटे सामान्य नियमों को हम सभी अपनी जीवनचर्या का आवश्यक अंग ना बना लें । धन्यवाद...

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-07-2016) को "ईद अकेले मना लो अभी दुनिया रो रही है" (चर्चा अंक-2397) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

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