29.8.11

अण्णा आंदोलन : सफलता के साथ आशंकाएं


          देश के राजतंत्र में विकराल रुप से बढ चुके भ्रष्टाचार से प्रत्यक्ष जुडी मंहगाई की मार से त्रस्त आम जनता की जो ऐतिहासिक शक्ति अण्णा के आंदोलन को समर्थन देने देश भर में जुटी उससे खौफ खाकर सभी राजनैतिक दलों ने अत्यन्त मजबूरी की स्थिति में अण्णा की मांगों को संसद में ध्वनिमत से पारित तो कर दिया क्योंकि यदि इतने लम्बे अनशन और इतने प्रबल जनसमर्थन के दौरान अण्णा के जीवन के साथ कुछ भी अप्रिय हो जाता तो सत्तापक्ष ही नहीं वरन सभी राजनैतिक दलों के इन प्रतिनिधियों को अगले आमचुनाव में अपने अस्तित्व  के बचाव का खतरा स्पष्ट दिखने लगा था इसलिये अनशन तुडवाने के लिये अण्णा की ये मांगें स्टेंडिंग कमेटी में विचार हेतु भेज दिये जाने की स्थिति स्वीकार कर लेने के बाद एक बार तो ये सभी राजनैतिक दल इस समय तो देश व दुनिया के सामने अपना दामन बचा ले गये किन्तु स्टेंडिंग कमेटी में मसला भेज दिये जाने के बाद गेंद फिर इन्हीं के पाले में पहुंच जानी है और उस कमेटी में भी  इन्हीं धुरंधर राजनीतिज्ञों को इस कानून को लागू करने का फैसला करना है जिन्होंने इतनी विपरित परिस्थितियों में भी इस आंदोलन की खिलाफत करने के प्रयासों में संसद में भी अपनी तरफ से पुरजोर विरोध करने के प्रयासों में कोई कमी नहीं रहने दी ।

          अब जब अण्णा का अनशन समाप्त हो चुका है और धीरे-धीरे इस जनतंत्र का दबाव भी कम से कमतर ही होते चला जाना है, तो येन-केन प्रकारेण अपनी लेटलतीफ शैली में इन मुद्दों को लटकाते चले जाने के बाद कैसे इन्हें अपने निजी स्वार्थों के खिलाफ सख्त कानून बनने से रोका जा सके इस प्रकार के सियासी दांव-पेंच इनकी कार्यप्रणाली में फिर से चालू होते दिख सकते हैं और कानून बनने का मसला जब नियमों और बहुमत की आड में सप्ताहों और महिनों की हदें पार करवाते हुए वर्षों के दायरे तक लम्बित कर देने में यदि ये सफल हो जावेंगे तो इतने बडे व उग्र विरोध को भी आसानी से दबा लेने के प्रयासों में ये विशेषज्ञ अपनी ओर से कोई भी कसर कैसे बाकि रहने देंगे ?
 
          दूसरी ओर अण्णा यह भी स्पष्ट कर ही चुके हैं कि आमजन के अधिकारों की सुरक्षा व सुधार हेतु उनके अगले अभियान क्या-क्या होंगे । कहने की आवश्यकता नहीं है कि उनके द्वारा चलाये जाने वाले सभी अभियान इनके उन्मुक्त अधिकारों के दायरों को सीमित करने के एक के बाद एक प्रयास रुप में ही होंगे और उनके प्रत्येक अभियान की सफलता इनके  निजी स्वार्थपूर्ण मंसूबों को आघात पहुँचाने वाली ही होगी, ऐसी स्थिति में महात्मा गांधी के आधुनिक प्रतीक बन चुके अण्णा की आवाज व प्रयास भी किसी आकस्मिक पल में फिर किसी गोडसे के द्वारा बन्द कर दिये जाने की आशंका के प्रति भी आने वाले किसी भी कल में क्या देशवासियों को बेपरवाह रहना चाहिये ? 

15.8.11

हार्दिक शुभकामनाएँ...



15 अगस्त 2011

देश के 65 वें 

स्वाधीनता दिवस

के

शुभ अवसर पर

नजरिया

ब्लाग के 

सभी पाठकों,

समर्थकों व 

टिप्पणीकर्ता शुभचिन्तक साथियों सहित

समस्त देशवासियों को 

हार्दिक बधाईयां एवं शुभकामनाएँ...

31.7.11

वास्तुशास्त्र के सर्वत्र उपयोगी प्रचलित नियम.

         जीवन में तनाव, बीमारियों का नियमित क्रम, लगातार प्रयत्न करते रहने पर भी सफलता से दूरी व इस जैसी अनेक समस्याओं के कारण के रुप में वास्तुशास्त्र के जानकार दिशाज्ञान के मुताबिक रहने, खाने-पीने, सोने व काम न कर पाने को एक प्रमुख कारण मानते हैं और वास्तुशास्त्र दिशाओं के मुताबिक ही अपनी नित्य क्रियाओं का संचालन हमें सिखाता है । माना जाता है कि जानते हुए या संयोगवश जिनके जीवन में रहना, काम करना वास्तु (दिशा) नियमों के अनुकूल होता है वे लोग अपने जीवन में दूसरों की तुलना में अधिक सुखी, स्वस्थ व काम धंधे में अधिक सफल पाए जाते हैं ।

प्रयास : स्वस्थ बने रहने का...
              
          दिशाओं की जानकारी से सम्बन्धित इन नियमों को जानने के बाद आप चाहे किसी छोटे से कमरे में रहते हों या फिर अनेकों कमरों वाले किसी बडे मकान/महल में । आपका व्यापार किसी आफिस या दुकान के रुप में चलता हो अथवा कारखाने या फेक्ट्री के रुप में । अपनी व्यवस्थाएँ आप वास्तु शास्त्र के इन नियमों के मुताबिक संशोधित कर इस विधा से लाभान्वित हो सकते हैं-


         

          1. किसी भी मकान में जहाँ आपका परिवार निवास करता हो उसमें उत्तर-पूर्व वाला कोण ईशान कोण होता है । अतः अपने निवास के इस क्षेत्र में आपके आराध्य देव हेतु (चाहे एक छोटी सी तस्वीर रखकर ही) एक छोटा सा देव स्थान बनावें जिसमें तस्वीर या मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर हो । यहाँ यथासम्भव आप पूर्व की ओर मुख करके सम्भव हो तो कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर धूप-दीप अगरबत्ती द्वारा चन्द मिनीट नियमित देव आराधना करें । जल भंडारण हेतु कुआँ, टेंक, या पानी की टंकी जैसे इन्तजाम भी देव-स्थान से हटकर लेकिन इसी क्षेत्र में रखें ।

          यह देखलें कि इस कोण के दायरे में कोई भी बाथरुम या शौचालय आपके निवास स्थान में न आता हो, यदि हो तो अविलम्ब उसे वहाँ से हटवा दें ।
            
            2. दक्षिण-पूर्व का कोण आग्नेय कोण होता है । परिवार हेतु किचन इसी क्षेत्र में रखने के साथ ही गेस चूल्हा इसी कोण में लगवाएँ जिसमें भोजन बनाते समय गृहिणी का मुँह पूर्व दिशा में रहे । घर व व्यापार संस्थान में बिजली का मेनस्वीच भी इसी कोण में लगवाने का प्रयास करें । किन्तु यदि यह सम्भव न हो सके तो इस कोण पर (अग्नि प्रतीक) बिजली का एक लाल बल्ब अधिक से अधिक समय तक जलते रहने की व्यवस्था करलें ।

           3. दक्षिण-पश्चिम का कोण नेऋत्य कोण होता है । दुकान में स्टाक भार, फेक्ट्री में कच्चे माल का भंडारण व घर के किचन में अनाज के वार्षिक संग्रह की व्यवस्था इसी क्षेत्र में करें । यदि यह सम्भव न हो तो यहाँ हमेशा कोई भारी वजन अवश्य रखें । किसी भी प्रकार की पानी की भूमिगत टंकी या गड्ढा यहाँ न होने दें । यदि घर में ऐसी व्यवस्था हो तो उसे बन्द करदें ।
            
      घर में गृहस्वामी का कमरा इसी कोण में रखते हुए उनके शयन हेतु बिस्तर इसी दिशा में लगाकर यथासंभव उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में पैर करके सोने की व्यवस्था करें । दक्षिण दिशा की ओर पैर करके हर्गिज न सोवें । सोते समय शरीर के किसी भी भाग पर टांड, छज्जा, बीम न आ रहा हो इसका ध्यान रखें । यदि पति-पत्नी में आपसी प्रेम अथवा परस्पर वैचारिक तालमेल का अभाव रहता हो तो शयन कक्ष में सारस के जोडे का या राधा-श्याम का चित्र लगावें ।

          4. उत्तर पश्चिम का कोण वायव्य कोण होता है । घर या संस्थान में रुपये-पैसे रखने के लिये अपनी अलमारी या तिजोरी इसी कोण में रखकर उसका दरवाजा पूर्व दिशा की ओर खुलने दें । वास्तुशास्त्रीय मान्यता के अनुरुप इससे आपके घर की श्री सम्पदा में बरकत रहती है व धन में निरन्तर वृद्धि होती है ।

            5. घर, दुकान या संस्थान कहीं भी अपने स्वामित्व के पूरे क्षेत्रफल के बीचों बीच 2'x2' फुट का स्थान बिल्कुल खाली रखकर इसे स्वच्छ रखें और इस जगह कोई भारी वजन न रहने दें ।

            6. अपने निजी मकान में मुख्य प्रवेश द्वार पर शुभ चिन्हों युक्त टाईल्स लगावें । किराये के मकान में प्रवेश द्वार के दोनों ओर कुंकू से स्वास्तिक चिन्ह बनावें । यथासम्भव बुरी नजर से बचाव हेतु मकान के मेनगेट को लाल, काला व सफेद तीनों रंगों के मिश्रण में परिवर्तित करवा दें ।

            7. पेड-पौधे - घर में जगह कम होने पर भी कम से कम एक गमले में तुलसी का पौधा अवश्य लगावें । सम्भव हो तो अशोक व अनार के पेड लगावें । पपीता हमारे पेट व शरीर के लिये चाहे जितना उपयोगी हो किन्तु हमारे स्वामित्व क्षेत्र में इसका पेड अनिष्ट व अमंगलकरी माना जाता है । अतः यदि आपके यहाँ पपीते का पेड हो तो उसे जड सहित निकलवा दें । इसके अलावा ऐसे कोई भी पेड-पौधे जिनसे दूध निकलता हो को अपने स्वामित्व क्षेत्र के अन्दर न रहने दें । गुलाब के फूल को छोडकर कोई भी कांटेदार वृक्ष विशेष रुप से 'केक्टस' के पौधे को घर में न लगावें ।

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            इसके अतिरिक्त हिंसक पशु, युद्ध, आंसू, उदासी दिखाते, डूबते जहाज को दिखाते चित्रों को घर में न लगावें । टूटे शीशे (कांच), एक पाये का पटिया, टूटी मूठ के कपडे धोने की मोगरी, जैसे काम न आने वाले अनावश्यक उपकरण घर में न रखें । बन्द घडी व पेन या तो चालू करवाकर घर में रखें अथवा उन्हें भी हटादें । घर में सुख-शान्ति के स्थाई निवास हेतु सुख-शान्ति व सफलता के लिये 'वास्तु-दीप' पोस्ट भी यहीं क्लिक करके देखें ।

           वैसे तो इस वृहद शास्त्र में हमारे स्वामित्व क्षेत्र के चप्पे-चप्पे का, भूखण्ड, मिट्टी, खिडकी-दरवाजे, उनकी लम्बाई-चौडाई का विस्तृत  उल्लेख मिलता है जिनकी चर्चा इस एक पोस्ट में कर पाना न तो सम्भव लगता है और न ही आवश्यक, किन्तु प्राथमिक जानकारी से जुडे उपरोक्त तथ्यों को भी समझकर यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में अपनाने का प्रयास कर सके तो सम्भव है भविष्य में उन्हें अपने जीवन में कुछ अधिक सफलता और घर में कुछ अधिक सुखानुभूति मिलती रह सके ।
             

29.6.11

एक थे शंभू महादेव राव


          वर्षों पूर्व एक फिल्म आई थी नाम था आंसू बन गये फूल. फिल्म के कलाकारों में हीरो देव मुखर्जी थे जिनका रोल एक उद्दंड कालेज छात्र का था, हीरोईन संभवतः तनूजा थी और उसी कालेज के आदर्शवादी प्रिंसीपल की भूमिका निभा रहे थे दादामुनि अशोक कुमार । इसी फिल्म का एक विशेष किरदार अत्यंत खूंखार गुंडे की भूमिका में शंभू महादेवराव नामक पात्र का था जिसके लिये फिल्म के निर्माता निर्देशक ने हिंदी फिल्मों के मशहूर खलनायक प्राण का चुनाव किया था । पूरी फिल्म किसी सफल बंगाली फिल्म का रीमेक ही थी, हिन्दी संस्करण के लिये भी पूरी टीम करीब-करीब बंगाल से जुडे कलाकारों की ही थी जिसमें प्राण जैसे इक्के-दुक्के कलाकार ही ऐसे रहे होंगे जिनका शायद बंगाली पृष्ठभूमि से कोई जुडाव नहीं रहा हो ।

          पूर्व की सफल बंगाली फिल्म जिसके रीमेक में यह फिल्म हिन्दी में बन रही थी इसके बंगाली संस्करण में शंभू महादेवराव का किरदार जिस बंगाली अभिनेता ने निभाया था उसका अभिनय ही उस फिल्म का सबसे सशक्त पक्ष रहा था अतः निर्माता-निर्देशक चाह रहे थे कि प्राण कम से कम एक बार उस बंगाली फिल्म में उस कलाकार को शंभू महादेवराव के रोल में अभिनय करते देख लें जिससे कि हिन्दी संस्करण में इस पात्र की भूमिका के साथ अभिनेता प्राण पूरा न्याय कर सकें । उनके सामूहिक आग्रह पर प्राण ने बहुत ध्यान से सोचने के बाद भी विन्रमतापूर्वक हिन्दी फिल्म के बनने से पहले उस बंगाली संस्करण की फिल्म देखने का उनका अनुरोध यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि जब आपने मुझे यह रोल दिया है तो मुझे मेरे तरीके से ही इसे करने दीजिये । निर्माता-निर्देशक ने अभिनेता प्राण के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया । हिन्दी फिल्म आंसू बन गये फूल बनी और उस फिल्म का जो सबसे सशक्त पक्ष सामने आया वह प्राण का यही शंभू महादेवराव वाला किरदार ही रहा जिसके लिये इस फिल्म की समूची टीम ने एकमत से यह स्वीकार किया कि प्राण ने जो भूमिका इस पात्र के रुप में इस फिल्म में अभिनीत की उसके समक्ष बंगाली फिल्म के उस कलाकार का अभिनय जो इसी किरदार का उस बंगाली कलाकार ने निभाया था वह प्राण के अभिनय की उत्कृष्टता से बहुत पीछे छूट गया था ।
 
          यहाँ इस घटना का उल्लेख क्यूँ ? दरअसल हम जीवन में जिस भी क्षेत्र में जाते हैं वहाँ उस क्षेत्र के कुछ सुस्थापित सफल नाम ऐसे भी हमारे सामने आते हैं जो हमारे लिये किसी न किसी रुप में प्रेरणास्तोत्र  बन जाते हैं । वहाँ कभी ऐसा भी लगता है कि यदि हम इनकी कार्यशैली का अनुसरण करें तो हमें अधिक तेजी से सफलता मिल सकती है जबकि उनका अनुसरण कर लेने के प्रयास में हम उन जैसे तो बन नहीं पाते बल्कि अपनी स्वयं की मौलिकता और गंवा बैठते हैं । अतः जिन्दगी में हमारा कार्यक्षेत्र चाहे जो रहे हम अपने उन प्रेरणास्तोत्रों से प्रेरणा भले ही लें किन्तु स्वयं की समझ-बूझ के साथ यदि अपनी मौलिक शैली को ही कायम रखते हुए अपनी ओर से श्रेष्ठतम परिणाम देने के प्रयास के साथ ही यदि हम अपना कार्य करते रहें तो निश्चय ही किसी की नकल के बगैर भी उस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान अधिक आसानी से बनाई जा सकती है ।

          वास्तविक जीवन में कई बार ऐसे अनुभव स्वयं भी देखने में आते हैं और इस फिल्म की भूमिका के माध्यम से अभिनेता प्राण का ये उदाहरण भी इसी तरीके को अधिक अहमियत देता दिखता  है ।

20.6.11

कितनी सिक्योर्ड सिक्युरिटी ?

           तीन दिन पूर्व बेटी की ननंद की शादी जो इन्दौर में ही एक गार्डन में आयोजित थी उसमें मौजूदगी के दौरान पेश आया वाकया । विवाह पक्ष के लोगों ने सुरक्षा के नजरिये से गार्डन में प्रोफेशनल  सिक्युरिटी के द्वारा लगभग चार सुरक्षा गार्ड विभिन्न स्थानों पर तैनात करवा रखे थे और उसके बावजूद भी दूसरी मंजिल के जिस कमरे में दुल्हन व उसके परिवार की अन्य जोखम रखी थी वहाँ ताला लगाकर अपने घरेलू नौकर जो 13-14 वर्ष का लडका ही था उसे उस ताला लगे हुए कमरे के बाहर ताले की सुरक्षा के लिहाज से तैनात किया हुआ था । रिसेप्शन चल रहा था जिसमें सामान्य तौर पर मेचिंग वेशभूषा पहने रहने के कारण महिलाएँ स्वर्णाभूषणों की बनिस्बत आर्टिफिशल गहने पहनना अधिक पसन्द करती हैं और अधिकांश घरेलू मेहमानों के आभूषण प्रायः उनके लगेज मे ही रखे होते हैं, परिवार का प्रत्येक सदस्य पूरी तरह से व्यस्त होता है तब वहीं मौजूद उन चारों सुरक्षागार्ड का इन्चार्ज दूसरी मंजिल पर घूम-घूमकर हर बन्द दरवाजे को खटखटाकर पूछता घूम रहा था कमरे में कोई है क्या ? घूमते-घूमते वही गार्ड दुल्हन व उसके परिजन के ताला लगे कमरे के बाहर आकर उस घरेलू नौकर से बोला - इस कमरे का ताला खोलो, लडके ने जब कारण पूछा तो वह गार्ड बोला मुझे इसे चेक करना है । चाबी तो उस लडके के पास थी नहीं लिहाजा वह नीचे जाकर अपने मालिक से चाबी ले आया और कमरा खोल दिया ।

नीचे लिंक पर क्लिक कर ये उपयोगी जानकारी भी देखें... धन्यवाद.

           इधर गृहस्वामी ने यह सोचते कि नौकर उस कमरे की चाबी क्यों लेकर गया ? उन्होंने अपने एक साथी के साथ उपर जाकर देखा तो वही सिक्यूरिटी गार्ड उस कमरे में मौजूद प्रत्येक अटैची के ताले तौल रहा था । जब उन्होंने उससे वहाँ की मौजूदगी का कारण पूछा तो वह बगले झांकने लगा । घर के लोगों ने उनकी एजेन्सी को खबर देकर वहाँ से किसी की आने तक उस गार्ड की जितनी भी पिटाई-पूजा की वह मार भी बगेर प्रतिरोध के ही उसने खाई । उस माहौल में वहाँ मौजूद हर सदस्य बखूबी यह समझ रहा था कि उस समय यदि घर के सदस्य चौकन्ने न होते तो उस सुरक्षागार्ड की ही कारगुजारी से उस विवाह में ऐसी चोरी तो तय हो ही गई थी जिसमें दुल्हन के पास मौजूद दोनों पक्षों के आभूषणों के साथ ही वधू पक्ष के वैवाहिक परिवार की अधिकांश तैयारियों पर भी ये सुरक्षागार्ड ही पानी फेर जाते ।

       उस समय तो ये घटना एक सामान्य घटना के रुप में सामने से गुजर गई किन्तु आज टी- वी. पर एक विज्ञापन देखकर जिसमें बैंक में झोला लेकर आया एक नकाबपोश लूटेरा रिवाल्वर दिखाकर केशियर के पास मौजूद सारा केश झोले में भरवाकर रिवाल्वर दिखाते हुए भाग जाता है, उसके जाने के बाद जब अन्दर से बैंककर्मी सिक्यूरिटी के नाम से आवाज लगाते हैं तो उसी हुलिये में कंधे पर टंगे उसी झोले के साथ यस सर के रुप में सेल्यूट मारते हुए वहीं का सिक्यूरिटी गार्ड सामने आ खडा होता है । इस विज्ञापन के सामने आने पर न सिर्फ इस शादी की ये घटना फिर से जेहन में आ गई बल्कि इसके साथ ही कुछ समय पूर्व तक शहर की घनी आबादी से खासी दूर ए. बी. रोड पर मौजूद  ICICI बैंक की मुख्य शाखा से बडी रकम निकालकर अपने घर या दुकान-दफ्तर जाने वाले अधिकांश नागरिकों को रास्ते में लूट का शिकार होना पडा था जिसमें बडे नियोजित तरीके से सिर्फ उस व्यक्ति के पास मौजूद केश रकम पर धावा बोला जा रहा था ।
      
         बार-बार एक ही तरीके से बैंक से रकम लेकर निकलते ग्राहकों की रास्ते में रकम लूट लेने के मामले जो अब बहुत समय से बन्द हो गये हैं उनमें भी तब अन्तिम निष्कर्ष यही सामने आया था कि वहाँ मौजूद कोई सिक्यूरिटी गार्ड इस तरह बडी रकम लेकर निकलने वाले ग्राहकों के बारे में जानकारी मोबाईल के माध्यम से बाहर भेज रहा था और लोग योजनाबद्ध तरीके से इनके इस षडयंत्र का शिकार होकर अपनी मोटी रकम से हाथ धो रहे थे वह खबरें भी  क्रमानुसार दिमागी चलचित्र में बारी-बारी सामने आने लगी ।
  
          ऐसे में यह चिंतन तो बनता ही है कि शादी-विवाह व जीवन के अन्य अनेकों उल्लेखित अवसरों पर हममें से लगभग प्रत्येक व्यक्ति व परिवार इन्हीं एजेन्सियों से बुलवाये गये सुरक्षा गार्ड्स को अपनी सम्पत्ति की सुरक्षा में लगाकर स्वयं को निश्चिंत महसूस कर लेते हैं क्या इनकी सुरक्षा में लोगों की सम्पत्ति वास्तव में सुरक्षित मानना चाहिये

 
          
जबकि सोच का यही सिलसिला यदि और भी पीछे जावे तो भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की वो हत्या भी सामने आ जाती है जो उनके उस सुरक्षाकर्मी ने ही की थी जिसके उपर उनके जीवन को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रखने की सबसे अधिक जिम्मेदारी रही थी...!
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