हमारे रोजमर्रा के भोजन में दाल के महत्व से हम सभी
बखूबी परिचित हैं । किसी को ये दाल तडके के बगैर अधूरी लगती है तो किसी को कोथमीर
के बगैर । लेकिन महत्व तो दाल का ही होता है । मैंने एक परिचित महिला को कभी यह
कहते सुना था कि कोथमीर के बगैर दाल ऐसी लगती है जैसे विधवा की मांग । ठीक यही
स्थिति हमारे हिन्दी ब्लाग जगत में किसी भी पोस्ट के सन्दर्भ में टिप्पणियों के
बाबद इस रुप में देखने में आती है कि यदि किसी पोस्ट के नीचे टिप्पणियां नहीं दिख
रही है तो न लेखक को मजा आता है और न ही पाठक को । दोनों को ही एक प्रकार के अधूरेपन
का एहसास होता है । पाठक तो फिर भी पढकर निकल जाते हैं किन्तु लेखक को लगता है
जैसे मेरी तो सारी मेहनत ही व्यर्थ हो गई, मैंने
इतने जतन से लिखा और किसी भी पाठक की ओर से कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिली ।
मैं अंग्रेजी ब्लाग्स के अधिक सम्पर्क में
नहीं आया हूँ इसलिये कह नहीं सकता कि वहाँ इन टिप्पणियों का क्या और कितना महत्व
है किन्तु हिन्दी ब्लाग जगत में तो करीब-करीब हम सभी ब्लागर साथियों की अधिकांश
उर्जा अपने ब्लाग व पोस्ट पर टिप्पणियों की मात्रा बढवाने में ही अक्सर उपयोग में
आते देखी जाती है । क्या वाकई ये टिप्पणियां हमारी इस ब्लाग-यात्रा को गतिमान
बनाये रखने के लिये इतनी ही आवश्यक है जितनी प्रायः हम ब्लागर समुदाय के मध्य देखी, सुनी व पढी जाती है । शायद नहीं... ये कुछ उदाहरण इस बात को समझ पाने में शायद माध्यम
बन सकें ।
1. परिकल्पना ब्लाग में श्री रविन्द्र प्रतापजी की किसी पोस्ट में कुछ समय पूर्व किसी ब्लाग के
सन्दर्भ में यह पढा था कि उन ब्लागर ने अपने ब्लाग पर टिप्पणियों का विकल्प ही
बन्द किया हुआ है फिर भी उनका ब्लाग सफलतापूर्वक चल रहा है । ये पोस्ट तारीख के
हिसाब से मेरे ध्यान में नहीं आ पाने के कारण मैं उस पोस्ट की लिंक यहाँ नहीं दे
पा रहा हूँ । अतः क्षमा...
2. किसी भी ब्लाग में लोकप्रिय पोस्ट का निर्धारण
हम नहीं करते बल्कि हम तो लोकप्रिय पोस्ट का गूगल का बना-बनाया विजेड अपने ब्लाग
पर लगा देते हैं फिर पाठक संख्या के आधार पर लोकप्रिय पोस्ट का निर्धारण वह विजेड
स्वयं ही करता रहता है । इस मापदण्ड पर मेरे ब्लाग स्वास्थ्य-सुख में सर्वाधिक पढी जा रही टाप 7 पोस्ट में तीसरे क्रम पर मौजूद पोस्ट "सुखी जीवन के सरल सूत्र" को देखकर भी लगाया जा सकता है जिसमें उसके प्रकाशन
दि. 16 नवम्बर 2010 से लगाकर आज तक एक भी टिप्पणी नहीं आई है किन्तु वह पोस्ट लोकप्रियता की
दौड में निरन्तर उपर की यात्रा तय करते हुए उस ब्लाग पर तीसरे क्रम पर शोभायमान हो
रही है ।
3. हिन्दी ब्लाग-जगत के अधिकांश ब्लागर साथियों
के निर्विवाद रुप से सर्वाधिक लोकप्रिय मित्र ब्लागर भाई श्री सतीश सक्सेना जिनकी किसी भी पोस्ट पर औसतन 70 से लगाकर 85-90 व कभी-कभी इससे भी ज्यादा तक की मात्रा में टिप्पणियां अब तक देखी जाती रही
हैं उनके ब्लाग मेरे गीत की पिछली दो पोस्ट मैं इस अनुरोध के साथ देख चुका
हूँ कि -
अनुरोध
: आपके आने का आभार ...आगे
से, मेरे गीत पर कमेन्ट न करने का अनुरोध है , आशा
है मान रखेंगे ! तो क्या हमें यह मान लेना चाहिये कि उनके ब्लाग से
पाठक कम हो गये होंगे ?
शायद ब्लाग्स का प्रोफार्म बनाते समय इसके
निर्माताओं ने यह सोचकर टिप्पणी के इस माध्यम के लिये स्थान आरक्षित किया होगा कि
यदि किसी पाठक के मन में सम्बन्धित ब्लाग-पोस्ट को पढकर उसके विषय में कोई
प्रतिक्रिया यदि उपजे तो वो इस टिप्पणी बाक्स के माध्यम से उसे आसानी से अभिव्यक्त
कर उसके लेखक तक अपनी बात पहुँचा सके । जबकि हम इस टिप्पणी बाक्स का उपयोग अक्सर
यह दिखाने के लिये करते हैं कि मैंने आपकी पोस्ट पढ ली है अतः आप भी कृपया मेरी
पोस्ट पढकर अपनी उपस्थिति का प्रमाण इस टिप्पणी बाक्स के माध्यम से मेरे ब्लाग पर
भी दर्ज करें,
अथवा मैं किसी की पोस्ट पढूं या न पढूं किन्तु
शुरु व आखिर के पैरेग्राफ पर नजर डालकर जैसे भी बने अपनी टिप्पणी अधिक से अधिक
ब्लाग्स पर छोड आऊँ जिससे कि मेरे ब्लाग पर भी अधिक से अधिक पाठकों की टिप्पणियां
दिखती रह सकें,
अथवा अपने ब्लाग पर प्रकाशित पोस्ट की लिंक इस
टिप्पणी बाक्स के माध्यम से दूसरे ब्लाग पर छोड आऊँ जिससे कि अधिकतम पाठक उस लिंक
के द्वारा मेरे ब्लाग पर आते रह सकें, अथवा
ये तेरी मेरी यारी की प्रथा को जीवित रखने के लिये टिप्पणियों की आवक-जावक के क्रम
को मैनेज रखने के माध्यम के रुप में इसे पल्लवित-पोषित करता चलूँ ।
हम किसी भी रुप में टिप्पणियों के इस क्रम को जीवित रखें इसमें कहीं कोई
विरोधाभास नहीं है किन्तु यदि दो बातों का इस सन्दर्भ में हम ध्यान रखकर चल सकें
तो हमारी बहुत सी उर्जा व तनाव बचाया जा सकता है पहली यह कि सिर्फ टिप्पणी करने के
लिये टिप्पणी न करें बल्कि वास्तव में टिप्पणी के माध्यम से उस पोस्ट के सन्दर्भ
में लेखक तक कोई बात यदि पहुँचाना हो तो टिप्पणी अवश्य करें और दूसरी यह कि मैंने
तो फलां ब्लाग पर टिप्पणी की किन्तु सामने वाले ने मेरे ब्लाग पर टिप्पणी नहीं की
इस भावना से किसी भी ब्लाग पर टिप्पणी न करें ।
वैसे भी टिप्पणी प्रायः पोस्ट प्रकाशित होने
के पहले व दूसरे दिन ही अधिकतर चलती है जबकि वह पोस्ट सदा-सर्वदा तब तक जीवित रहती
है जब तक कि हम स्वयं उसे हटा न दें जो कि बिना किसी विशेष कारण के कोई भी ब्लागर कभी भी नहीं हटाता, और जैसे हम किसी दुकान पर कुछ खरीदने जाते हैं और
वहाँ कुछ और सामग्री भी अपने उपयोग की देखकर खरीदकर ले आते हैं उसी प्रकार किसी भी
एग्रीगेटर अथवा सर्च इंजिन के माध्यम से आने वाले पाठक यदि रुचिकर या उपयोगी समझते
हैं तो आपके ब्लाग की अन्य पोस्ट भी अवश्य पढते हैं और सर्च इंजिन के माध्यम से
आते रहने वाले पाठक तो कभी टिप्पणी लिखने के झमेले में पडते दिखते ही नहीं हैं
जबकि जितने ज्यादा पाठक हमारे ब्लाग पर आकर हमारी पोस्ट पढते हैं लोकप्रियता के
मापदंड पर हमारा ब्लाग उतना ही आगे आते दिखता चलता है । अतः हम टिप्पणियां अवश्य
करें किन्तु उन टिप्पणियों को ही सबकुछ समझकर अपनी तमाम उर्जा उधर ही न लगाते हुए
अपनी पोस्ट की सामग्री को अधिक से अधिक रुचिकर व जनोपयोगी बनाये रखने के प्रयास
में अपनी उसी उर्जा का उपयोग यदि करते रहें तो भी हमारे ब्लाग की लोकप्रियता को
अपना बहुत सा समय व टिप्पणी नहीं मिली के अनावश्यक तनाव से बचाकर भी न सिर्फ लम्बे
समय तक जीवन्त बनाये रख सकते हैं बल्कि इस लोकप्रियता को ब्लाग पर आने वाले पाठकों
के आंकडों के माध्यम से निरन्तर जांचते हुए भी अपनी इस ब्लाग-यात्रा की निरन्तरता
को तुलनात्मक रुप से कम समय में भी सफलतापूर्वक बनाये रख सकते हैं ।


