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8.6.11

क्या व्यर्थ है टिप्पणियों की मशक्कत....!


        हमारे रोजमर्रा के भोजन में दाल के महत्व से हम सभी बखूबी परिचित हैं । किसी को ये दाल तडके के बगैर अधूरी लगती है तो किसी को कोथमीर के बगैर । लेकिन महत्व तो दाल का ही होता है । मैंने एक परिचित महिला को कभी यह कहते सुना था कि कोथमीर के बगैर दाल ऐसी लगती है जैसे विधवा की मांग । ठीक यही स्थिति हमारे हिन्दी ब्लाग जगत में किसी भी पोस्ट के सन्दर्भ में टिप्पणियों के बाबद इस रुप में देखने में आती है कि यदि किसी पोस्ट के नीचे टिप्पणियां नहीं दिख रही है तो न लेखक को मजा आता है और न ही पाठक को । दोनों को ही एक प्रकार के अधूरेपन का एहसास होता है । पाठक तो फिर भी पढकर निकल जाते हैं किन्तु लेखक को लगता है जैसे मेरी तो सारी मेहनत ही व्यर्थ हो गई, मैंने इतने जतन से लिखा और किसी भी पाठक की ओर से कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिली ।

            मैं अंग्रेजी ब्लाग्स के अधिक सम्पर्क में नहीं आया हूँ इसलिये कह नहीं सकता कि वहाँ इन टिप्पणियों का क्या और कितना महत्व है किन्तु हिन्दी ब्लाग जगत में तो करीब-करीब हम सभी ब्लागर साथियों की अधिकांश उर्जा अपने ब्लाग व पोस्ट पर टिप्पणियों की मात्रा बढवाने में ही अक्सर उपयोग में आते देखी जाती है । क्या वाकई ये टिप्पणियां हमारी इस ब्लाग-यात्रा को गतिमान बनाये रखने के लिये इतनी ही आवश्यक है जितनी प्रायः हम ब्लागर समुदाय के मध्य देखी, सुनी व पढी जाती है । शायद नहीं...  ये कुछ उदाहरण इस बात को समझ पाने में शायद माध्यम बन सकें ।

            1. परिकल्पना ब्लाग में श्री रविन्द्र प्रतापजी की किसी पोस्ट में कुछ समय पूर्व किसी ब्लाग के सन्दर्भ में यह पढा था कि उन ब्लागर ने अपने ब्लाग पर टिप्पणियों का विकल्प ही बन्द किया हुआ है फिर भी उनका ब्लाग सफलतापूर्वक चल रहा है । ये पोस्ट तारीख के हिसाब से मेरे ध्यान में नहीं आ पाने के कारण मैं उस पोस्ट की लिंक यहाँ नहीं दे पा रहा हूँ । अतः क्षमा...

            2. किसी भी ब्लाग में लोकप्रिय पोस्ट का निर्धारण हम नहीं करते बल्कि हम तो लोकप्रिय पोस्ट का गूगल का बना-बनाया विजेड अपने ब्लाग पर लगा देते हैं फिर पाठक संख्या के आधार पर लोकप्रिय पोस्ट का निर्धारण वह विजेड स्वयं ही करता रहता है । इस मापदण्ड पर मेरे ब्लाग स्वास्थ्य-सुख में सर्वाधिक पढी जा रही टाप 7 पोस्ट में तीसरे क्रम पर मौजूद पोस्ट "सुखी जीवन के सरल सूत्र" को देखकर भी लगाया जा सकता है जिसमें उसके प्रकाशन दि. 16 नवम्बर 2010 से लगाकर आज तक एक भी टिप्पणी नहीं आई है किन्तु वह पोस्ट लोकप्रियता की दौड में निरन्तर उपर की यात्रा तय करते हुए उस ब्लाग पर तीसरे क्रम पर शोभायमान हो रही है ।

            3. हिन्दी ब्लाग-जगत के अधिकांश ब्लागर साथियों के निर्विवाद रुप से सर्वाधिक लोकप्रिय मित्र ब्लागर भाई श्री सतीश सक्सेना जिनकी किसी भी पोस्ट पर औसतन 70 से लगाकर 85-90 व कभी-कभी इससे भी ज्यादा तक की मात्रा में टिप्पणियां अब तक देखी जाती रही हैं उनके ब्लाग मेरे गीत की पिछली दो पोस्ट मैं इस अनुरोध के साथ देख चुका हूँ कि -
अनुरोध  : आपके आने का आभार ...आगे सेमेरे गीत पर कमेन्ट न करने का अनुरोध है , आशा है मान रखेंगे  !  तो क्या हमें यह मान लेना चाहिये कि उनके ब्लाग से पाठक कम हो गये होंगे ?

           शायद ब्लाग्स का प्रोफार्म बनाते समय इसके निर्माताओं ने यह सोचकर टिप्पणी के इस माध्यम के लिये स्थान आरक्षित किया होगा कि यदि किसी पाठक के मन में सम्बन्धित ब्लाग-पोस्ट को पढकर उसके विषय में कोई प्रतिक्रिया यदि उपजे तो वो इस टिप्पणी बाक्स के माध्यम से उसे आसानी से अभिव्यक्त कर उसके लेखक तक अपनी बात पहुँचा सके । जबकि हम इस टिप्पणी बाक्स का उपयोग अक्सर यह दिखाने के लिये करते हैं कि मैंने आपकी पोस्ट पढ ली है अतः आप भी कृपया मेरी पोस्ट पढकर अपनी उपस्थिति का प्रमाण इस टिप्पणी बाक्स के माध्यम से मेरे ब्लाग पर भी दर्ज करें, अथवा मैं किसी की पोस्ट पढूं या न पढूं किन्तु शुरु व आखिर के पैरेग्राफ पर नजर डालकर जैसे भी बने अपनी टिप्पणी अधिक से अधिक ब्लाग्स पर छोड आऊँ जिससे कि मेरे ब्लाग पर भी अधिक से अधिक पाठकों की टिप्पणियां दिखती रह सकें, अथवा अपने ब्लाग पर प्रकाशित पोस्ट की लिंक इस टिप्पणी बाक्स के माध्यम से दूसरे ब्लाग पर छोड आऊँ जिससे कि अधिकतम पाठक उस लिंक के द्वारा मेरे ब्लाग पर आते रह सकें, अथवा ये तेरी मेरी यारी की प्रथा को जीवित रखने के लिये टिप्पणियों की आवक-जावक के क्रम को मैनेज रखने के माध्यम के रुप में इसे पल्लवित-पोषित करता चलूँ ।

           हम किसी भी रुप में टिप्पणियों के इस क्रम को जीवित रखें इसमें कहीं कोई विरोधाभास नहीं है किन्तु यदि दो बातों का इस सन्दर्भ में हम ध्यान रखकर चल सकें तो हमारी बहुत सी उर्जा व तनाव बचाया जा सकता है पहली यह कि सिर्फ टिप्पणी करने के लिये टिप्पणी न करें बल्कि वास्तव में टिप्पणी के माध्यम से उस पोस्ट के सन्दर्भ में लेखक तक कोई बात यदि पहुँचाना हो तो टिप्पणी अवश्य करें और दूसरी यह कि मैंने तो फलां ब्लाग पर टिप्पणी की किन्तु सामने वाले ने मेरे ब्लाग पर टिप्पणी नहीं की इस भावना से किसी भी ब्लाग पर टिप्पणी न करें ।

           वैसे भी टिप्पणी प्रायः पोस्ट प्रकाशित होने के पहले व दूसरे दिन ही अधिकतर चलती है जबकि वह पोस्ट सदा-सर्वदा तब तक जीवित रहती है जब तक कि हम स्वयं उसे हटा न दें जो कि बिना किसी विशेष कारण के कोई भी ब्लागर कभी भी नहीं हटाता, और जैसे हम किसी दुकान पर कुछ खरीदने जाते हैं और वहाँ कुछ और सामग्री भी अपने उपयोग की देखकर खरीदकर ले आते हैं उसी प्रकार किसी भी एग्रीगेटर अथवा सर्च इंजिन के माध्यम से आने वाले पाठक यदि रुचिकर या उपयोगी समझते हैं तो आपके ब्लाग की अन्य पोस्ट भी अवश्य पढते हैं और सर्च इंजिन के माध्यम से आते रहने वाले पाठक तो कभी टिप्पणी लिखने के झमेले में पडते दिखते ही नहीं हैं जबकि जितने ज्यादा पाठक हमारे ब्लाग पर आकर हमारी पोस्ट पढते हैं लोकप्रियता के मापदंड पर हमारा ब्लाग उतना ही आगे आते दिखता चलता है । अतः हम टिप्पणियां अवश्य करें किन्तु उन टिप्पणियों को ही सबकुछ समझकर अपनी तमाम उर्जा उधर ही न लगाते हुए अपनी पोस्ट की सामग्री को अधिक से अधिक रुचिकर व जनोपयोगी बनाये रखने के प्रयास में अपनी उसी उर्जा का उपयोग यदि करते रहें तो भी हमारे ब्लाग की लोकप्रियता को अपना बहुत सा समय व टिप्पणी नहीं मिली के अनावश्यक तनाव से बचाकर भी न सिर्फ लम्बे समय तक जीवन्त बनाये रख सकते हैं बल्कि इस लोकप्रियता को ब्लाग पर आने वाले पाठकों के आंकडों के माध्यम से निरन्तर जांचते हुए भी अपनी इस ब्लाग-यात्रा की निरन्तरता को तुलनात्मक रुप से कम समय में भी सफलतापूर्वक बनाये रख सकते हैं ।

4.6.11

उपलब्धियां : एक अनाडी ब्लागर की....


          इसी ब्लाग पर दि. 4 अप्रेल 2011 को भारत के क्रिकेट वर्ल्डकप में विश्र्वविजेता बनने वाली बधाईयों वाली पोस्ट में "अपना ब्लाग" एग्रीगेटर के श्री योगेन्द्रजी पाल सा. ने मुझे टिप्पणी के मार्फत सूचित किया कि- "आपके लेख चुराए जा रहे हैं, मुझे लगा कि शायद आपको पता ना हो इसलिए जानकारी देने आ गया |" आगे आपने मेरे लिये वो लिंक भी प्रस्तुत की जिस पर इन्होंने मेरी ब्लागपोस्ट को देखा था http://maiaurmerisoch.blogspot.com/2011/04/blog-post_04.html मैंने श्री योगेन्द्रजी को धन्यवाद देते हुए इस लिंक पर जाकर देखा तो पाया कि श्री शशांक मेहताजी ने अपने ब्लाग 'मैं और मेरी सोच' पर मेरे 'नजरिया' ब्लाग पर दि. 3-2-2011 को प्रकाशित मेरी पोस्ट "कच्ची उम्र के ये शरीर सम्बन्ध"  हुबहू चित्र व शीर्षक से साथ शब्दषः प्रकाशित कर रखी थी । मैंने इनके टिप्पणी बाक्स में मेरा विरोध व नाराजी दर्ज की और आकर श्री योगेन्द्रजी को धन्यवाद देकर व अपने ब्लाग से कापी-पेस्ट की सुविधा बाधित कर चुपचाप अपने अगले काम में लग गया । दूसरे दिन मेरे इसी ब्लाग पोस्ट पर श्री शशांक मेहताजी की ये टिप्पणी दर्ज हुई "सुशीलजी सबसे पहले तो मैं अपनी भूल के लिये क्षमा चाहता हूँ. मैं ब्लाग जगत के नियमों से अनजान था इसलिये मुझसे भूल हो गई................"  इसके साथ ही श्री शशांक मेहताजी ने मेरी उस पोस्ट को अपने ब्लाग से डिलीट भी कर दिया था ।

          अब मैं सोचता हूँ कि कितना नासमझ था मैं जो मुश्किल से उपलब्ध ऐसे दुर्लभ अवसर को कुल्लड में गुड फोडने जैसे इस गुपचुप तरीके से उस परिस्थिति में अपने स्तर पर ही इतने सस्ते में निपटा दिया । मैं भी उस समय यदि किसी रौब-दाब वाले स्वयं से वरिष्ठ ब्लागर साथी को अपना निःशुल्क वकील बना लेता तो बाकायदा इस ब्लाग जगत में अच्छा-खासा बवाल भी मचता और समस्त ब्लागर समुदाय पूरी उत्सुकता से देखता समझता कि आखिर माजरा क्या है और मुझे भी सबकी सहानुभूति से उपजे स्नेह सहित कुछ और अतिरिक्त पब्लिसिटी यहाँ मुफ्त में ही मिल जाती, किन्तु मैंने तो इसे यहाँ जाने-अन्जाने सब तरफ घट रही छोटी सी सामान्य घटना मानकर ससुरी पूरी समस्या को ही जंगल में मोर नाचा किसने देखा कि शैली में सारी बात वहीं समाप्त कर दी । यह जुदा बात हे कि वही शशांक मेहताजी अब मेरे तीन में से दो ब्लाग के फालोअर भी हैं ।

          इस ब्लाग जगत में आने के बाद स्वयं की रुचि के अनुकुल मेरी यहाँ कुछ ऐसी धुनी रम गई कि मेरे लिये घर, समाज, उद्यम व दुनिया की समस्त गतिविधियाँ करीब-करीब थम सी गई और कम से कम 5 महिने नियमित रुप से 12 से 15 घंटे रोजाना सिर्फ और सिर्फ इस ब्लागिंग अभियान को गति देने में ही निरन्तर गुजरे । पिछले मई माह में एक शारीरिक समस्या मेरे समक्ष यह आई कि मैं जब भी खडा होकर चलना शुरु करुँ मुझे चक्कर आना प्रारम्भ हो जाएँ, अपने स्तर पर सब प्रयास करके देख लिये लेकिन चक्कर आना बन्द नहीं हुए । फिर इतनी लम्बी अवधि से प्रतिदिन इतने घण्टे रोज इस ब्लागिंग अभियान में हथेली माऊस ही घुमाती रही, नतीजा दाँए हाथ की कलाई में असहजता महसूस होने लगी । दिमाग में ये विचार पुख्ता प्रमाण के रुप में सामने आने लगा कि लेपटाप की चुंधियाती रोशनी से अपनी आँखें बमुश्किल 15"-18" इंच की दूरी पर निरन्तर चल रही है उसके कारण चक्कर आने लगे हैं और सीधे हाथ की कलाई जो एक ऊँगली से 90% टंकण कार्य और यही हथेली जो लगातार माऊस का संचालन कर रही है उसके कारण दाँई हथेली की ये समस्या सामने आने लगी है । तब तक 30 माह सकुशल गुजार सकने वाली HCL Me के नये माडल के मेरे लेपटाप की बैटरी भी बमुश्किल 10 महिने भी गुजारे बगैर काल कवलित हो गई । इस दौरान जितना समय इस लेपटाप के समक्ष कम से कम गुजरा उससे बगैर किसी अतिरिक्त प्रयास के चक्कर आना भी बन्द हो गये और कलाई में भी स्वमेव ही राहतपूर्ण स्थिति स्वयं को महसूस होने लगी ।

          इसी अवधि में इस ब्लाग स्नेह से जुडी कुछ और उपलब्धियां और भी अलग किस्म की सामने आती रही - जैसे-जैसे मेरे नजरिया ब्लाग पर फालोअर्स की संख्या बढती गई वैसे-वैसे इस ब्लाग-जगत के मेरे कुछ शुभचिंतक मित्र मुझसे कन्नी काटते चले गये । शायद उनके दिमाग में एक ही भावना रही हो कि हम तो इतने वर्षों से यहाँ इतने उत्कृष्ट शैली के लेखन में लगे हैं हमारे ब्लाग पर अब तक जितने फालोअर्स नहीं हुए उससे ज्यादा इतना कामचलाऊ लिखने वाले इस बन्दे के ब्लाग पर फालोअर्स इतने कम महिनों में कैसे बढ गये, और ऐसे सभी साथियों के दिमाग में इसका उत्तर भी मौजूद की ब्लागर बनने से सम्बन्धित वो सभी छोटी-छोटी आवश्यकताएँ जिन्हें यहाँ आने वाला हर ब्लागर करीब-करीब जानता ही है को कुछ लच्छेदार शैली में प्रकाशित कर नये ब्लागर मित्रों को बरगलाकर व उन्हें बेवकूफ बनाकर ही मैं अपने ब्लाग पर ये फालोअर्स बढा रहा हूँ, और जबरन सबके सामने मूंछों पर ताव देता दिख रहा हूँ, फिर अब तो हद हो गई एलेक्सा रेंकिंग जैसे श्रेष्ठतम मापदंड पर दसवें क्रम पर इसका ये ब्लाग भी दिखने लगा, तो कहीं तो ये रोष मन में उमडते-घुमडते और कहीं खुलकर अभिव्यक्त होते मेरे सामने आता चल रहा है । कहते हुए सभी पाठक बन्धुओं से क्षमा चाहता हूँ लेकिन सीमित अनुपात में ही सही इस ब्लाग-जगत में अपने कुछ साथियों को मैंने पूर्वागृह के इस दायरे में ही निरन्तर महसूस किया है ।

          एक और समस्या अपने से अधिक बुजुर्ग और नये ब्लागर साथियों में स्वयं के प्रति ये महसूस की कि हम तो असहाय अवस्था में अपनी पोस्ट प्रकाशित कर रहे हैं और टिप्पणियां करना हमारे तो बस में नहीं है, किन्तु मैं उनके ब्लाग पर टिप्पणी क्यों नहीं कर रहा हूँ । जबकि 1500 टिप्पणियां इस नजरिया ब्लाग पर देने की संख्या तक के मेरे सैकडों ब्लागर्स साथियों के ब्लाग-लिंक को मैंने तीन हिस्सों में विभाजित कर अपने तीनों ब्लाग नजरिया, जिन्दगी के रंग और स्वास्थ्य-सुख पर 'मेरे ब्लाग लिंक' माध्यम से सेट करके एक भगीरथी अभियान इस रुप में भी पूर्ण किया है कि मेरे किसी भी टिप्पणीकार साथी की कोई भी पोस्ट प्रकाशित होते ही तत्काल से लगाकर मेरे न पढ पाने की अन्तिम सीमा तक मेरी जानकारी में रहे और मैं अपने ब्लाग पर टिप्पणी देने वाले किसी भी ब्लागर साथी की पोस्ट पर टिप्पणी देकर उनका उत्साहवर्द्धन करना भूल न सकूँ । 
  
          इस दरम्यान इस ब्लाग स्नेह के कारण आर्थिक मोर्चे पर होने वाले मेरे नुकसानों की चर्चा तो मैं न ही करुँ तो बेहतर है जबकि सामाजिक स्तर पर मेरे इस ब्लाग स्नेह का खामियाजा अपने अत्यन्त नजदीकी रिश्तों में आवश्यकता के समय अपनी मौजूदगी वहाँ दर्ज नहीं करवा पाने की नाराजगी के रुप में मुझे अलग से भुगतना पडा । इसके अतिरिक्त इसी ब्लाग-स्नेह के पूर्व मेरी प्रातःकालीन घूमने व योग वगैरह कर लेने की जो स्वास्थ्यप्रद गतिविधियां अनियमित क्रम में ही सही किन्तु चलती रहती थी उस पर भी पूरी तरह से विराम लग गया । 
  
          तो इस ब्लाग-स्नेह की ये कीमतें सामूहिक रुप से पिछले महीनों में लगातार मैंने  चुकाई हैं और बदले में अपने ब्लाग-जगत के मित्रों के पर्याप्त स्नेह के बावजूद भी कुछ प्रतिशत मित्रों से इस आधार पर बन रही इन अनजान दूरियों को भी मानसिक स्तर पर  निरन्तर भुगता है अतः मस्तिष्क इस दिशा में स्वयं को ये सोचकर अधिक सहज महसूस कर रहा है कि -
और नहीं बस और नहीं....

          किन्तु रुकिये, पूर्व इसके कि आप मेरी इस पोस्ट को इस हिन्दी ब्लाग जगत से मेरे  स्थायी सन्यास के घोषणा-पत्र के रुप में समझें मैं ये स्पष्ट कर दूँ कि अपने स्वान्त सुखाय के चलते जहाँ मैंने अपने हजारों घंटे लगातार गुजारे हों वहाँ स्थायी सन्यास भी ऐसी ही चाहत उपजने पर भले ही ले लूँ, फिलहाल तो ये सन्यास इतना ही रहेगा कि अब तक जहाँ ये ब्लागिंग मेरे लिये सबसे पहली पायदान पर और शेष दुनिया की समस्त आवश्यकताएँ बाद के क्रमों में चल रही थीं वहीं अब समस्त दुनियावी आवश्यकताओं को प्राथमिक क्रम पर रखने के बाद ही  बचा हुआ समय मैं इस ब्लाग स्नेह को देना चाहूँगा जिससे न सिर्फ उपरोक्त सभी समस्याओं का क्रमशः निदान होता चला जावेगा, बल्कि ऩए फालोअर्स के बढते रहने का क्रम थम जाने के साथ ही एलेक्सा रेंकिंग से भी मेरे उस समर्पण की कमी के कारण जिसके चलते मेरा ये ब्लाग वहाँ भी दिखने लगा है, वहाँ से भी स्वमेव ही ये खिसकते-खिसकते बाहर हो जाएगा । इस प्रकार अपने ऐसे साथियों के मन में मेरे प्रति उपजते इस अबोलेपन की महसूसियत से भी मुझे मुक्ति मिलती चली जावेगी । यद्यपि तब भी मुझे अप्रत्यक्ष रुप से यह तो सुनना ही है कि देखा- जोड-तोड करके ऊपर पहुँच जाना अलग बात थी और बगैर किसी योग्यता के वहाँ लगातार टिके रहना बिल्कुल अलग । किन्तु ऐसे आरोप का भी मैं सामना कर लूंगा ।
  
          चलते-चलते अपनी आदत के मुताबिक एक निवेदनात्मक सुझाव और भी-    
          वे सभी ब्लागर साथी जो ये मानते हों कि इस ब्लाग-जगत में ऐसी उपलब्धियों पर पहला हक हमारा बनता है, मेरा छोटा सा सुझाव मात्र यही है कि वे भी अपने इस ब्लाग-स्नेह अभियान में पूरी तरह डूबकरसमस्त दीन-दुनिया को भुलाकर उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते अपने ब्लाग की नई पोस्ट के लिये निरन्तर जनरुचि के मुताबिक विषय तलाशते हुए, उन्हें रुचिकर शैली में सहजगम्य रुप से प्रकाशित करने रहने के साथ ही, टिप्पणियों के रुप में स्वयं को अधिक से अधिक ब्लागर साथियों से रुबरु करवाते हुए, हर सम्भव तरीके से अपने ब्लाग पर ट्रेफिक बढवाते रहने का ईमानदार प्रयास यदि कर पाएँ तो मेरा विश्वास है कि वे भी अपने ब्लाग पर फालोअर्स की बडी संख्या के साथ ही किसी भी रेंकिंग मापदण्डों पर  अपने ब्लाग सहित शायद मुझसे भी कम समय में ऐसे दुरुह दिख सकने वाले लक्ष्यों को सहज ही प्राप्त कर लेंगे । अतः ऐसे सभी इच्छुक साथी हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम की शैली में इस अनवरत अभियान में तत्काल जुट जावें । निश्चित रुप से हिम्मते मर्दा मददे खुदा के ब्रह्म सूत्र पर वे भी शीघ्रातिशीघ्र लक्ष्यविजेता के रुप में स्वयं को सहज ही देख सकेंगे । 

          शेष मेरे सभी पाठकों के मेरे प्रति अब तक के स्नेहिल व्यवहार के लिये अनेकों धन्यवाद सहित... 

21.2.11

मैं तो नीं बोली.

       
           अभी दो दिन पहले आदरणीय ताऊ ने  ब्लागरत्व, जलागरत्व और ताऊत्व गुण प्रधान समीक्षक की तीन श्रेणियां हिन्दी ब्लाग जगत के पाठकों को समझाई उसे पढकर मेरी इस चिन्तनशाला में भी एक ऐसी कहानी सामने आई जिसमें ताऊ की बताई तीनों ही श्रेणियों के पात्र मौजूद दिख रहे थे तो ये सोचकर कि मौका भी है और दस्तूर भी. मैं ताऊ से परमिशन लिये बगैर ही ये गाथा आपके सामने प्रस्तूत कर रहा हूँ । आप भी इसका रसास्वादन करें-

          किस्सा कुछ यूं था कि एक तोतली महिला की तीन पुत्रियां थी और वंशगुणों के प्रभाव से तीनों ही तोतली भी थीं । अब परिवार में चार तोतलों के कारण शादी-ब्याह में समस्या आना भी स्वाभाविक था । जैसे-तैसे नाई जो उस समय रिश्तों के वाहक भी होते थे कि मान-मनौव्वल से एक दिन लडके वालों का उनके घर लडकी देखने आना तय हुआ और उनके आने के पहले ही माँ ने तीनों लडकियों को चेतावनी भी दे दी कि उन लडके वालों के सामने तुममें से कोई भी अपना मुंह नहीं खोले । लडकियों ने भी मां की सीख समझ ली ।

          समय पर लडके वाले घर आए और देखने व मिलने का क्रम चालू होते ही चौके में बिल्ली को दूध की तपेली में मुंह मारते देख ब्लागरत्व गुणों वाली सबसे छोटी लडकी के मुंह से निकल गया-  देथो-देथो बिल्ली दूद पी लई है ।

           तो जलागरत्व गुण वाली दूसरी लडकी थोडी तेज आवाज में बोली-    तेले थे तूप लेते नईं बनता, बूल दई मां ने त्या बोला था ?

           सब खेल बिगडता देखकर मां ने इशारे से चौके में लडकियों को बुलाकर कुछ गुस्से मे फुसफुसाते लहजे में डांटते हुए समझाया- तुप लेओ लांदों, त्यों थब दुल दोबल कलने पल तुली हो ?

         यह सुनते ही ताऊत्व गुण वाली तीसरी लडकी जिसके रिश्ते के लिये खास लडके वाले वहाँ आए थे उसे बडा गुस्सा आया और वो माँ से थोडा जोर से बोली- ओ माँ, तुम मेले ते तुथ मत बोलो, देथ लो ये दोनों बोली मैं तो तुछ नईं बोली ।
    
         कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि लडके वाले वहाँ से सरपट ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग ।
           
    और एक गाथा बतौर श्री के. डी. सहगल साहब-

           दो मास्टर जो स्कूल से छूट्टी के वक्त बिडलाजी की फेक्ट्री पार करते हुए रोज घर की ओर अपनी सायकल पर साथ-साथ जाया करते थे उनमें एक मास्टर उस फैक्ट्री को देख-देखकर अक्सर बातचीत बन्द कर चुप्पी साध लेता था । एक दिन जब उसी स्थिति में उसके दूसरे साथी मास्टर ने उससे वहाँ पहुँचने पर रोज चुप हो जाने का कारण पूछा तो पहले वाले मास्टर ने ठंडी सांस भरते हुए कहा- यार मने जो या बिडलाजी की सगली फैक्ट्रियां मिल जावे, ई सारा दफ्तर और कोठियां मिल जावे तो मैं बिडलाजी से ज्यादा कमाके दिखा सकूं । दूसरो मास्टर बोल्यो- तो भी जो या बिडलाजी कमावे वो तू कमा लेगो, पण तू बिडलाजी से ज्यादा कंईया कमा पावेगो ? तो पेलो मास्टर बोल्यो- क्यों मैं दो ट्यूशन भी तो करुंगो ।

         

18.2.11

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.




           एक अनुमान के मुताबिक इस समय औसतन 20 के लगभग नये ब्लाग्स प्रतिदिन हिन्दी ब्लाग जगत में नियमित रुप से शामिल हो रहे हैं । इनमें कई ब्लाग-लेखक बेहतरीन शैली में अपनी सोच को अपने लेखन के द्वारा अभिव्यक्त करने में पूर्ण सक्षम भी दिखते हैं लेकिन अधिकांशतः इन नये ब्लाग्स की जानकारियां आगे नहीं आ पाने के कारण दो-चार पोस्ट के बाद ये ब्लाग संभवतः गुमनामी के अंधकार में खो भी जाते हैं । ऐसा शायद इसलिये होता हो कि या तो ये ब्लागर्स ब्लाग बनाने और पोस्ट लिख लेने के बाद यह सोचकर बैठ जाते हैं कि पाठक स्वमेव आते रहेंगे और हमारे लिखे को पढकर सराहना करते रहेंगे या फिर वे समझ ही नहीं पाते हैं कि इसके आगे क्या कैसे किया जाना चाहिये ? यदि आप भी इस ब्लाग-जगत में नये हैं तो अपनी असमंजस की इस स्थिति को इस आलेख अब इसके बाद क्या ? ...और कैसे ? पर क्लिक करके समझने का प्रयास कर सकते हैं । मेरी समझ में नये की परिभाषा में वे ब्लाग्स तो आते ही हैं जो अभी महिने, बीस दिन या दो-चार दिन पहले ही बने हैं किन्तु वे ब्लाग्स भी आते हैं जो भले ही वर्ष भर से चल रहे हों किन्तु अभी तक उन पर पाठक हिट्स संख्या 1,000 तक या उनके फालोअर्स की संख्या 12-15 तक भी नहीं पहुंच सकी हो । यदि आप अपने ब्लाग के साथ इन दोनों में से किसी भी स्थिति में यहाँ हैं तो आगे की यात्रा को सहजतापूर्वक जारी रखने के लिये इन सुझावों पर अमल करके देखिये-

Read Also…

1. अपने ब्लाग को विभिन्न एग्रीगेटर्स में शामिल करवाएं-

         एग्रीगेटर ही वो माध्यम हैं जहाँ हर ब्लाग लेखक अपनी ब्लाग-पोस्ट की प्रोग्रेस देखते रहने के साथ ही दूसरों के ब्लाग्स में इस समय नया क्या पढने के लिये उपलब्ध है ये जानने के लिये प्रायः बार-बार आते रहते हैं । यदि वहाँ आपका ब्लाग भी दर्ज रहेगा तो न सिर्फ वो स्वमेव ही अन्य पाठकों की जानकारी में आता रहेगा बल्कि वहाँ आपको भी विभिन्न विषयों (यथा- राजनीतिक, सामाजिक, भौगोलिक, विज्ञान, स्वास्थ्य, हास्य-व्यंग और अन्य अनेकानेक विधाओं पर उपलब्ध आलेख, कविताएं, कहानियां) ऐसे सभी तरह के ब्लागपोस्टों के बारे में ताजातरीन जानकारियां मिलती रहेंगी व लोकप्रिय ब्लाग्स लोकप्रिय क्यों हैं इन कारणों को भी आप वहाँ नोट करते हुए व उनका अनुसरण करते हुए अपने ब्लाग को भी लोकप्रियता की दौड में आगे बनाये रखने का प्रयास आसानी से कर सकेंगे । 

      ब्लागलेखन की इस दुनिया में हजारों हजार लोग अपने इस जुडाव के साथ क्या-क्या लाभ देखते हैं इसका रोचक वर्णन आप इस पूर्व पोस्ट ब्लागिंग तेरे लाभ अनेक...!  को माउस क्लिक करके पढकर समझ सकते हैं । मैं यहाँ कुछ लोकप्रिय हिन्दी ब्लाग एग्रीगेटर्स की लिंक प्रस्तुत कर रहा हूँ है आप सिर्फ माउस क्लिकिंग के द्वारा यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हैं और अपने ब्लाग को यहाँ पंजीकृत (रजिस्टर्ड) करवा सकते हैं । इनमें प्रमुख हैं-  हमारीवाणी,  अपना ब्लाग,  ब्लागप्रहरी,  ब्लाग परिवार,  ब्लागकूट,  हिंदी इंडली इत्यादि ।  इसके अलावा यदि आपके लिये संभव हो सके तो अपने ब्लाग को गूगल व इस जैसे सर्च इंजन में भी अवश्य दर्ज करवाएँ । 


2. अपनी रुचि के ब्लाग्स को फालो अवश्य करें-
         जब आप किसी ब्लाग को फालो करते हैं तो आपको उससे दो तात्कालिक लाभ मिलते हैं. 1. जिस ब्लाग को आपने फालो किया है संभवतः वह ब्लागलेखक भी सौजन्यता व शिष्टाचार के नाते आपके ब्लाग को फालो कर लें (यद्यपि ऐसा हमेशा नहीं होता)   और   2. जिस भी ब्लाग को आपने फालो किया है उस पर कोई भी नई पोस्ट प्रसारित होते ही आपको अपने डेशबोर्ड पर तत्काल उसकी जानकारी मिल जाती है कि मेरे पसंदीदा ब्लाग में इस समय नया क्या छपा है यह याद रखें कि इस क्षेत्र में आगे आने के लिये आप अपनी पसन्द के ब्लाग्स को फालो करने में पीछे न रहें क्योंकि न सिर्फ इसमें आपका कोई खर्चा नहीं होता बल्कि आपका फोटो निरन्तर उस लोकप्रिय ब्लाग पर दिखते रहने के कारण अन्य अनेक हिन्दीभाषी ब्लाग लेखक व पाठक आपको भी आसानी से पहचानने लगते हैं, जिसका लाभ आपको आगे तक मिलता रहता है । 

      एक और महत्वपूर्ण बात- जब भी आप किसी ब्लाग को फालो करें तो सिर्फ फालो करके ही न आ जावें बल्कि अनिवार्य रुप से एक टिप्पणी (चाहे वह 'राम-राम' ही क्यों न हो) अवश्य लिखकर आवें क्योंकि सिर्फ फालोअर्स लिस्ट के फोटो से वह ब्लागलेखक यदि चाहें तो भी आपके ब्लाग तक नहीं पहुँच पावेंगे लेकिन फालोअर्स लिस्ट के साथ ही आपकी टिप्पणी के आधार पर वो तत्काल आपके ब्लाग पर पहुँच जावेंगे और यदि वे चाहेंगे तो आपके  ब्लाग को आसानी से फालो भी कर लेंगे ।

3.  अधिक से अधिक ब्लाग लेखों पर अपनी टिप्पणियां दें-
          ब्लाग-जगत में सफलता का बहुत-बडा मापदंड ये देखने में आता है कि आपके ब्लाग पोस्ट पर कितनी टिप्पणियां आ रही हैं और यही कारण है कि अक्सर लोग अपने ब्लाग पर टिप्पणी देने वाले ब्लागलेखक को उसके ब्लाग पर भी टिप्पणी देते रहने की आवश्यक औपचारिकता की पूर्ति करते दिखाई देते हैं । लोकप्रियता की इस दौड में टिप्पणियों के महत्व को समझने के लिये आप  टिप्पणियों की अनिवार्यता और माडरेशन का नकाब ? लेख पर माउस क्लिक करके एक नजर अवश्य डालें । अब यदि आप अधिक से अधिक ब्लाग-पोस्ट पर टिप्पणी देने जाते हैं तो स्वाभाविक रुप से आपके ब्लाग पर भी टिप्पणियों का क्रम धीरे-धीरे बढना चालू हो जाता है और आप व आपका ब्लाग इस माध्यम से ब्लागजगत में परिचित होते हुए अपना स्थान सुरक्षित रखने में कामयाब होते चले जाते हैं । इसलिये अधिक से अधिक ब्लाग्स पर आप न सिर्फ अपनी टिप्पणी दें बल्कि प्रारम्भ में उस टिप्पणी के साथ अपने ब्लाग की URL Link देते हुए सम्बन्धित ब्लागर्स को अपने ब्लाग पर टिप्पणी देने के लिये आमंत्रित भी करते रहैं ।

4.  रोचक व पठनीय शैली में अपनी पोस्ट प्रकाशित करें-
           अपने मनपसन्द विषय पर मौलिक शैली में एक नियमित अंतराल पर अपने ब्लाग पर पोस्ट के प्रकाशन का सिलसिला बनाये रखें । जितनी सुनियोजित आपके ब्लाग पर पोस्ट की निरन्तरता बनी रहेगीउतना ही व्यवस्थित तरीके से आपके पाठकों का आपके ब्लाग से जुडाव  बना रह सकेगा । अपनी ब्लाग पोस्ट लिखने के लिये उपयोगी सुझाव समझने हेतु तरीका - ब्लाग लिखने का. नामक इस पोस्ट को भी एक बार अवश्य पढें । निश्चय ही इसमें प्रस्तुत सुझाव आपका पर्याप्त मार्गदर्शन कर सकेंगे ।

5. जागरुकता बनाये रखने के लिये अपने ब्लाग पर काउन्टर मीटर लगावें-
           अपने ब्लाग पर पाठकों की आवाजाही पर नजर रखने के लिये काउन्टर मीटर अवश्य लगावें और हर अगले महिने में पिछले महिने से अधिक पाठक आपके ब्लाग पर आ सकें ऐसा अपना लक्ष्य अपनी नियमित सक्रियता के द्वारा बनाये रखने का प्रयास करें । काउन्टर मीटर की गैर मौजूदगी में अपने डेशबोर्ड पर 'आंकडे' कालम पर नियमित अंतराल पर नजर रखते रहें ।
   
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     यदि आप उपरोक्त तरीकों को अमल में लाते रहेंगे तो निश्चय ही आप अपने ब्लाग को लोकप्रियता की दौड में न सिर्फ आगे बनाये रख सकने में सफल हो सकेंगे बल्कि इससे उपजी संतुष्टि जो आप महसूस करेंगे उसका पूर्व अवलोकन करने हेतु आप इस लिंक को क्लिक करके ब्लाग-जगत की ये विकास-यात्रा... लेख भी अवश्य पढें ।

         जैसे व्यापार जगत में अपना माल बेचते रहने के लिये पुराने लोगों का एक मुहावरा सुनने में आता रहता है कि "दिखेगा तो बिकेगा"बडी-बडी कम्पनियां भी इसी सिद्धान्त के तहत लाखों करोडों रुपये विज्ञापन में लगाकर टी.वी., रेडियो, समाचार-पत्र आदि माध्यमों में स्वयं के उत्पादों को दिखाती रहती हैं और सफलता के पथ पर आगे की ओर बढते रहती हैं वैसे ही आप भी इस ब्लाग-जगत में  विभिन्न एग्रीगेटर्स में, सर्च इंजिन में, समर्थक (फालोअर्स) सूचि मेंटिप्पणी बाक्स में और नियमित अंतराल में अपने ब्लाग्स पर नये-नये लेखों के द्वारा दिखते रहने के क्रम में बने रहकर 'शून्य से शिखर तक की' अपनी इस ब्लाग-यात्रा में सफलता की ओर निरन्तर आगे बढते रह सकते हैं । 
            
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