16.5.11

हमारी शांतिप्रियता के साथ... इनकी ये लूट कब तक ?


        एक ने वोट मिलते ही  3/- रु. प्रति लीटर की बात करते हुए 5/- रु. प्रति लीटर की मूल्यवृद्धि कर आम नागरिक को वर्ष भर में अनेकों बार चोट पहुँचाई तो दूसरे ने पेट्रोल की आग में अपनी रोटी पकाई । क्या कांग्रेसी, क्या भाजपाई सभी ने पेट्रोल की आग में काडी दिखाई ।

        किसी भी राजनीतिक पार्टी को हक नहीं है देश की जनता के आंसू पोंछने के दिखावे में विरोध जताने का...  या मरहम लगाने का दिखावा करने का । केन्द्र ने यदि भाव बढाए तो राज्य ने कौनसे कर घटा दिये । जितने दाम कांग्रेस ने केन्द्र में बैठकर बढाये उसी अनुपात में भाजपा ने राज्य में टेक्स बढाया और दिखावे के लिये... सारे भाजपा नेता अपनी-अपनी लक्झरी गाडियों में बैठकर पार्टी मुख्यालय पर उपस्थित होकर, अपनी गाडियां वहीं खडी कर दो किलोमीटर की साईकिल रेली का दिखावा कर और वापस अपनी-अपनी लक्झरी कारों में बैठकर अपने ठिकानों पर रवाना हो लिये । क्या विरोध है...वाह !  आम आदमी से किसी को कोई लेना-देना नहीं है । मंहगाई की आग में झुलसते नागरिकों की चीखो-पुकार से भले ही चारों ओर कोहराम मच रहा हो लेकिन सरकार को तेल कंपनियों का सिर्फ वो घाटा नजर आ रहा है जिसकी जिम्मेदार खुद सरकार है ।

        आज भी खाडी देशों से भारत में पेट्रोल सिर्फ 16.50 रु. लीटर आ रहा है जिस पर 50/- रु. प्रति लीटर से भी अधिक का सरकारी टेक्स जुडकर यही पेट्रोल 69/- रु. प्र. ली. देश की जनता को इस एहसान के साथ बेचा जा रहा है कि हम घाटा उठा रही कम्पनियों को सबसिडी देकर आप तक इतना सस्ता पेट्रोल, डीजल, गैस व मिट्टी का तेल पहुँचा रहे हैं । इसमें तेल कंपनियों का 20/- रु. प्रति लीटर का मुनाफा भी शामिल चल रहा है किन्तु इनका व्यापार घाटा भी सुरसा के मुंह के समान बढता ही जा रहा है । देश को चलाने वाला हर शख्स चाहे अफसरशाह के रुप में हो या राजनीतिज्ञ के रुप में निरन्तर आम आदमी को लूटकर अपनी तिजोरी भरते चले जाने की जुगत में लगा हुआ है । नेता, अधिकारी और पूंजीपति आम जनता को लूटकर दोनों हाथों से धन उलीच रहे हैं । सरकार नित नये टेक्स लगाकर खजाना भर रही है और यही जुटाई हुई अतिरिक्त दौलत भ्रष्टाचार के जरिये इन नेताओं के खातों में विदेशी बैंकों में जमा होती जा रही है । 

     देश में व्यवस्थाएँ बदहाल हैं, देशवासी कंगाल हैं, अधिकारी निहाल हैं और नेता मालामाल हैं. चारों ओर लूट मची है, हर अमीर को अपने स्तर पर लूट करने की पूरी छूट मिली हुई है । अंबानी का पेट खरबों से भी नहीं भर रहा है इसलिये वो भी स्पेक्ट्रम घोटालों में हाथ आजमा रहा है । टाटा हो या बिडला कोई भी बाजी लगाने में पीछे नहीं दिखना चाह रहा है । अत्यधिक आमदनी के लिये जिस देश में तेल, अनाज, सीमेन्ट व सभी जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुओं का उपरी  स्तर पर सट्टा करवाया जा रहा है, जहाँ खिलाडियों को नीलाम किया जा रहा है, हर बडा और बडा बनने के चक्कर में अपने घर में अधिक उजाला करने के कोशिश करते हुए आम जनता के आशीयां जलाए चले जा रहा हो और आम जनता के रुप में हम निरन्तर जलते हुए भी उनके लिये मोहरा बने जा रहे हैं । हम एक चिंगारी भी नहीं बन पा रहे हैं इसलिये निरन्तर सिकुडते-सिमटते जा रहे हैं । हमें बचाने न तो कभी कोई दल आएगा और न ही इस दलदल से हमें निकाल पाएगा । आम जनता ही एकजुट होकर टेक्स न देने की क्रांतिकारी राह पर चल सके तब तो फिर भी कुछ परिवर्तन सम्भव हो । वर्ना तो बोलो ही राम...  बोलो ही राम...! चल ही रहा है ।

भारत सहित पडोसी देशों में बिक रहे पेट्रोल के सामान्य भावों का अन्तर...
          क्यूबा 29/- रु.,  बर्मा 30/- रु.,  नेपाल 34/- रु.,  पाकिस्तान 35/- रु.,  अफगानिस्तान 36/- रु.,  बांगला देश 50/- रु. और (हमारा प्यारा हिन्दुस्तान) भारत 70/- रु. प्र. ली. । उस पर भी पेट्रोलियम कंपनियाँ घाटे में । आखिर ये छोटे-छोटे पडौसी देश अपने नागरिकों को इतने सस्ते भावों पर यही पेट्रोल कैसे उपलब्ध करवा पा रहे हैं ?

सभी तथ्य दैनिक अग्निबाण के सौजन्य से.

33 टिप्पणियाँ:

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन पोस्ट बधाई काश सरकार की आँखें खुल जाती |

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

टैक्स न देने का सुझाव बहुत अच्छा है लेकिन क्या हम मध्यमवर्गीय और उसमें भी नौकरीपेशा और स्फ़ेदपोश यह अफ़ोर्ड कर सकते हैं?

मनोज कुमार ने कहा…

आपके इस आलेख में हमारा आक्रोश भी व्यक्त हुआ है। आपने तो आस-पास के अन्य देशों में इसके मूल्य को देकर सरकारी दावों की पोल खोल दी है और उनका इरादा उजागर कर दिया है।

विजय रंजन ने कहा…

Sarkar ki aankhein kholiye,
aap sab yun hi kuch to boliye...
jab bhi vote dene aa jaayen kabhi,
har party ke kam ko sach me toliye.

Bahut acchi bat likhi hai aapne...sarkar ki aankhein kholne mein kuch shayad madad mile.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

जनाब सुशील बाकलीवाल जी ! आप पेट्रोल के दाम बढ़ने के संदर्भ में पूछ रहे हैं कि
हमारी शांतिप्रियता के साथ यह लूट कब तक ?

नेताओं का मूक जवाब है कि जब तक तुम और लोकतंत्र में से कोई एक भी ज़िंदा है तब तक।

बात दरअसल यह है कि जनता को लोकतंत्र चाहिए और लोकतंत्र को जनता के चुने हुए प्रतिनिधि चाहिएं। चुनाव के लिए धन चाहिए और धन पाने के लिए पूंजीपति चाहिएं। पूंजीपति को ‘मनी बैक गारंटी‘ चाहिए, जो कि चुनाव में खड़े होने वाले सभी उम्मीदवारों को देनी ही पड़ती है।
देश-विदेश सब जगह यही हाल है। जब अंतर्राष्ट्रीय कारणों से महंगाई बढ़ती है तो उसकी आड़ में एक की जगह पांच रूपये महंगाई बढ़ा दी जाती है और अगर जनता कुछ बोलती है तो कुछ कमी कर दी जाती है और यूं जनता लोकतंत्र की क़ीमत चुकाती है और चुकाती रहेगी।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी की क़ीमत अगर महज़ 5 रूपये मात्र अदा करनी पड़ रही है तो इसमें क्या बुरा है ?
और जो लोग इससे सहमत नहीं हैं , वे इसका विकल्प सुझाएँ. ऐसा विकल्प जो कि व्यवहारिक हो. नेताओं को दोष देने से पहले जनता खुद भी अपने आपे को देख ले निम्न लिंक पर जाकर :

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/exploitation.html

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सब पहले से तय था।

Kajal Kumar ने कहा…

हमारी सरकार भारत को प्रदूषण मुक्त कर देगी ज़ल्द

Vaanbhatt ने कहा…

बहुत ही विचारणीय मुद्दा उठाया है आपने...लग्ज़री कारों में बैठ कर आये...सायकिल चलाई और फिर उन्ही कारों में बैठ कर चल दिए...ये सच्चाई है...समस्या तो सिर्फ जनता के लिए है...जिसे नैनो का सपना दिया जा रहा है...पर नैनो भी हवा से तो चलने से रही...

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

bahut hi sahi mudde aap ne uthaye hai. bahut gadbadjhala hai......

-सर्जना शर्मा- ने कहा…

बाकली वाल जी नमस्कार मैं फिर से लौट आयी हूं रसबतिया पर आज फिर आएं और अपनी सार्थक प्रतिक्रिया दें

राज भाटिय़ा ने कहा…

हमारे महान भारत मे हर तरफ़ घाटा ही हे, कारण यह निक्क्मे नेता जो हमे दिन रात नोंचेने से वाज नही आते,ओर देश को भी नोंच रहे हे..

आशीष श्रीवास्तव ने कहा…

आपके आंकड़े सही नही है : पाकिस्तान मे पेट्रोल 88.41 रूपये($1.04) (http://www.reuters.com/article/2011/05/01/pakistan-petrol-idUSL3E7G102820110501)
नेपाल 85 rupees (1.14 dollars)
http://english.peopledaily.com.cn/90001/90778/90858/90863/7054700.html
क्युबा $1.19 (डिजेल)http://www.havanatimes.org/?p=30045

मेरा उद्देश्य पेट्रोल की किमतो मे बढोत्तरी का समर्थन नही है लेकिन केरोसीन और एल पी जी मे जो सबसीडी है उसका नतिजा पेट्रोल की कीमंतो पर पढेगा ही।

पिछली बार पेट्रोल की किमते जब बढी थी तब क्रुड की किमत ६८ डालर थी, अब १०० डालर के आसपास है!

जब तक पेट्रोल का आयात होगा हालात नही सुधरने वाले, एक ही उपाय है, पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और अन्य इंधन श्रोतो की ओर ध्यान देना। ब्राजील कुल उपभोग मे ४०% से ज्यादा एथेनाल का प्रयोग करता है।

Udan Tashtari ने कहा…

क्या कहा जाये...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अभी तो आगे आगे देखिये , होता है क्या ।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

दुरुस्त फ़रमाया आपने.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

हर तरह से जनता को ही भुगतना पड़ता है....

वन्दना ने कहा…

जनता तो सिर्फ़ भुगतने के लिये होती है।

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

राहुल, वरुण, नीतीश, मोदी, सोनिया के देश में
ये भी गनीमत है हवा तो मुफ़्त में ही मिल रही

१०० रुपये लीटर हो जाए तो ताज्जुब नहीं.............

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

पति द्वारा क्रूरता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझावअपने अनुभवों से तैयार पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता के विषय में दंड संबंधी भा.दं.संहिता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव विधि आयोग में भेज रहा हूँ.जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के दुरुपयोग और उसे रोके जाने और प्रभावी बनाए जाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं. अगर आपने भी अपने आस-पास देखा हो या आप या आपने अपने किसी रिश्तेदार को महिलाओं के हितों में बनाये कानूनों के दुरूपयोग पर परेशान देखकर कोई मन में इन कानून लेकर बदलाव हेतु कोई सुझाव आया हो तब आप भी बताये.

मदन शर्मा ने कहा…

जब तक हम तेल का कोई विकल्प नहीं खोजेंगे तब तक यही हाल रहेगा.
ऐसी बात नहीं है की तेल का कोई विकल्प नहीं है. आज गोबर गैस, सौर ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा आदि का प्रयोग कर के हम काफी हद तक इस कमी को दूर कर सकते है.
इसके लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाना होगा.
आज वह जितना पैसा सब्सिडी में खर्च करती है यदि यही पैसा इन विकल्पों के विकास में खर्च करे तो ये समस्या भी दूर की जा सकती है.

bhuvnesh sharma ने कहा…

हम तो बैटरी वाली गाड़ी लेने की सोच रहे हैं...पर हमारे यहां बिजली भी चंद घंटे ही आती है और उसकी भी कीमतें बढ़ने वाली हैं
जनता द्वारा टैक्‍स ना देने का सुझाव अव्‍यवहारिक है क्‍योंकि उस जनता में से पहले से ही बहुत से टैक्‍स चोर हैं...और जो चोरी नहीं कर रहे वे भुगत रहे हैं
सट्टा बाजार भी महंगाई बढ़ाने में लगा है...पर लुटेरी सरकार से कतई उम्‍मीद नहीं

Rajeev Panchhi ने कहा…

Well ..you're right. I agree with you. Congrats on writing such a meaningful post. Wish you all the best.

G.N.SHAW ने कहा…

बहुत ही सुन्दर नजरिया ! आप मेरे बालाजी ब्लॉग पर पहली बार आये है , बहुत - बहुत धन्यबाद !

Patali-The-Village ने कहा…

जनता तो सिर्फ़ भुगतने के लिये होती है|धन्यबाद|

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

सामयिक और एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय.....

आभार.....

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

चर्चा -मंच पर आपका स्वागत है --आपके बारे मै मेरी क्या भावनाए है --आज ही आकर मुझे आवगत कराए -धन्यवाद !
http://charchamanch.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

राज नेता मस्त और जनता त्रस्त ... जानकारी देता अच्छा लेख

prerna argal ने कहा…

bahut hi achchi jaankaari deta hua lekh.hamari sarkaar ki pole kholati hui.yea bilkul sach kaha aapne ki padoshi desh main petrol ke rate itane saste hain to hamaare desh main rate itane kyon badhte jaa rahe hain.aapne apne lekh main jo hamare desh ke netaaon.afsaron per jo aakrosh byakt kiyaa hai wo aek tarah se jantaa ki hi awaaj hai.badhaai aapko.


please visit my blog and leave the comments also.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

हम बड़ी शांतिप्रियता के साथ लुट रहे हैं और इन्हें तो हमें लूटना है ही ...

भारत की जनता हर क्षेत्र में लुट रही है ....सरकार ,माफिया , पूँजी पति , पुलिस सब के सब तो इसी अभियान में लगे हैं|

काश , सरकारें आम जनता के दुःख दर्द को भी समझने और दूर करने का प्रयास करतीं !

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सभी राजनेता एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं ... दरअसल राजनीति में केवल और केवल चोर उचक्के ही जाते हैं ...

M VERMA ने कहा…

पड़ोसी देशों से हमारे यहाँ पेट्रोल मँहगा क्यूँ है .. विचारणीय मुद्दा

Vivek Jain ने कहा…

बहुत सार्थक!
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

आदरणीय सुशील बाकलीवाल जी सुन्दर सार्थक लेख आप का नमस्कार
-जो आंकड़े आप ने दिए पड़ोस में पेट्रोल सस्ता लगता है बाहर के दान से हमारे दान से वे अपनी जनता को सस्ता उपलब्ध करा रहे हमारी सरकार को तो बस अपनी जेब भरने से मतलब है -
शुक्ल भ्रमर ५

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