16.4.11

भ्रष्टतंत्र में छवि राजावत व नीरा यादव में समानता


एक विकास की आधुनिक अवधारणाओं को जीवंत रुप देने में लगी यूथ आईकान.

और

दूसरी भ्रष्टाचार के दलदल में महाभ्रष्ट का तमगा पाने वाली. 

इनमें कैसी समानता ?


छवि राजावत  
       
          एम.बी.ए. शिक्षित, ग्राम पंचायत सोडा (राज.) की सरपंच बाई सा, आधुनिक पहनावा, आधुनिक सोच, ट्रेक्टर चालन, घुडसवारी, टेक्नोलाजी सेवी, पुरातन काल से लेकर आधुनिक परिस्थितियों पर देश-दुनिया को अपना दृष्टिकोण समझा सकने में सक्षम छवि राजावत जो अपनी विकासवादी सोच के साथ इस गांव के सरपंच का पद सम्हालते ही टीवी चेनल्स, मीडिया व इन्टरनेट पर यूथ आईकान के रुप में छा गई । 

          इनके ग्राम विकास की अवधारणा को तेजी से आगे बढाने के पुनीत उद्देश्य में अनेकों एनजीओ और कार्पोरेट भी साथ आ गये और गांव में 63 सालों से रुके पडे कार्यों को 3 साल में पूरा करवाने के महाअभियान में हर संभव मदद करने लगे । सिनेतारिका जैसी शख्सियत वाली छवि को वर्तमान में कोई अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाने का आग्रह करते दिख रहा है तो कोई उन पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाना चाह रहा है ।


नीरा यादव

          किसी जमाने में दबे और पिछडे वर्ग में विकास के विश्वास का उदाहरण बनी 1971 बैच की नीरा यादव आईएएस की परीक्षा पास कर देश की सबसे ऊंची सेवा में नौकरी करने आई थी तो दबे व पिछडे वर्ग के लोग उनका उदाहरण देते नहीं थकते थे । बुलंदशहर के वेरा फिरोजपुर गांव की रहने वाली नीरा यादव जब जौनपुर में पहली बार डी एम बनी तो जौनपुर में बाढ के इंतजाम देखने वे अपने छोटे बच्चे को पीठ पर बांधकर बचाव के इंतजाम देखने पानी में स्वयं जाती थी । 

           अब इन्हीं नीरा यादव को नोएडा विकास प्राधिकरण में 1994-95 में चेयरमेन पद पर रहते कैलाश अस्पताल और यू-फ्लेक्स ग्रुप को हजारों वर्गमीटर जमीन औने-पौने दाम में आवंटित किये जाने के साथ ही अलग-अलग सेक्टरों में प्लाट्स  और कमर्शियल भूखंडों के आवंटन में फर्जीवाडे के अपराध में महाभ्रष्ट के तमगे से विभूषित करते हुए इनके साथी अशोक चतुर्वेदी सहित 4-4 वर्ष की सजा सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई और इन्हें जिला कारावास भेज दिया गया ।

           इन पर मेरे इस लेखन का मकसद इनके भ्रष्टाचार के कारनामों को सामने लाना या महाभ्रष्टों की गिनती में शामिल होकर सजा पाना नहीं रहा है, क्योंकि ये तो कमोबेश सभी जानते हैं. बल्कि किसी समय पूरे नेक जज्बे से अपने सेवा काल का प्रारंभ करते हुए बुलंदियों की राह पर चलने वाली यही नीरा यादव देश के भ्रष्टतंत्र के साथ आटे में नमक के बराबर समझौते करते हुए कब नमक में आटे के अनुपात में आ गई शायद उन्हें खुद भी उस समय इसका आभास नहीं रहा होगा ।
  
          अब आज हमारे सामने छवि राजावत हैं इनके भी प्रारम्भिक दौर से क्षेत्र व देश की जनता को इनमें विकास को आगे बढाने की इनकी सोच व लगन शिद्दत से दिख रही है । किन्तु आज जो एनजीओ और कार्पोरेट्स इनके इस अभियान में मददगार बने दिख रहे हैं वे कब अपनी मदद के एवज में छोटे-छोटे लाभ उठाने से शुरुआत करते-कराते इन्हें भी भ्रष्टाचार के दलदल में खींच लेंगे, इनकी जागरुकता के अभाव में आगे चलकर ऐसा बिल्कुल हो सकता है ।

          अतः ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति से बचे रहने के लिये अपने  दादा व परिवार की फौजी विरासत को कायम रखते हुए छवि को प्रत्येक कदम पर दृढ संकल्पित रहते हुए  और अपने आसपास के सहयोगियों के पाक व नापाक इरादों पर गिद्ध दृष्टि रखते हुए ही अपने मकसद के साथ आगे बढते रहना आवश्यक होगा । अन्यथा तो-



बुलन्दी देर तक किस शख्स की किस्मत में होती है

अधिक ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है ।


19 टिप्पणियाँ:

Vaanbhatt ने कहा…

har aadmi agar apane charon ore 10 feet bhi saaf rakhe to pura desh swachchh ho jaye...aise hi har koi agar bhrashtachariyon ka saath na dene ka nischay kar le to bhrashtachaar khatm ho jaye...per afsos hum bhrashtachariyon se ladate nahin unka saath dete hain...kya hum khud laabh uthane ke lobh se bach paate hain...jis desh mein nindak ko niptana aasaan ho vahan to bhrashtachaar phalega bhi aur phulega bhi...ye ladai khud se shuru hogi...aur apanon se ladi jayegi...agar vakai hum bhrashtachaar mukt BHARAT chahte hain.

राज भाटिय़ा ने कहा…

काश हमारे देश के नेता ओर अन्य आधिकारी इन से ही कुछ सीख ले ले, बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने,धन्यवाद

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश सर्वोपरि है, व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

तंत्र अच्छे इंसानों को भी खराब कर देता है ... छवि इन सबसे बची रहें ...सार्थक लेख

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

आपकी आशंकाएं बिलकुल जायज है ये एनजीओ और कोर्पोरेट बिना किसी लालच के कुछ नहीं करते | छवि को इनसे सतर्क रहना चाहिए |

Udan Tashtari ने कहा…

छवि के बारे में अभी एक दिन पद्म सिंह जी सुना था, अच्छा लगा.

: केवल राम : ने कहा…

ऐसे लोगों की समाज को नितांत आवश्यकता है ..लेकिन इस तंत्र में उन्हें अपना व्यक्तित्व संभाल कर रखना टेढ़ी खीर के समान है .....आपका आभार

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बच्चा जन्म के समय पूर्णतया निर्मल मन होता है । फिर धेरे धीरे उस पर ज़माने के रंग चढ़ने लगते हैं ।
आपने सही कहा कि छवि को भी संभल कर चलना होगा । वर्ना यह व्यवस्था उन्हें भी मजबूर कर देगी ।

Patali-The-Village ने कहा…

आपने सही कहा कि छवि को भी संभल कर चलना होगा|धन्यवाद|

mahendra verma ने कहा…

प्रेरक और मननीय आलेख।
छवि को उज्ज्वल छवि के लिए शुभकामनाएं।

सारा सच ने कहा…

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

हरीश सिंह ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (18-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सार्थक जानकारी ...

खुशदीप सहगल ने कहा…

गुरुदेव समीर जी,
छवि राजावत के बारे में आपके इस शिष्य ने भी लिखा था...
आधी दुनिया...देश एक, चेहरे दो

जय हिंद...

Anita ने कहा…

सार्थक पोस्ट !

संध्या शर्मा ने कहा…

सार्थक जानकारी ...आपका आभार..

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपकी बात और लेख से सहमत हूँ .. पर ये बुलंदी नही कुछ भ्रष्ट तंत्र भी ज़िम्मेवार है .. वर्तमान समाज ... वहाँ रहने वाले अंग .... सभी कुछ किसी भी अच्छे इंसान को बुराई की तरफ धकेलने में कसर नही छोड़ते ... पर फिर भी बुरा करने वाला ही अंततः बुरा होता है ...

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