9.4.11

कामा है, पूर्णविराम नहीं ।



          श्री अण्णा हजारे और उनके सक्रिय सहयोगियों की निरन्तर बढती जा रही एकजुटता आखिर रंग लाई । कपिल सिब्बल के नेतृत्व में सरकार ने प्रबुद्ध विधिविदों के जनता से विचार विमर्श के बाद बनाये जन लोकपाल बिल के सभी प्रावधानों को स्वीकार कर लेने की मांग सैद्धान्तिक रुप से मान ली है । वर्तमान सहमति के आधार पर जन लोकपाल बिल के इस क्रियान्वय में आधे सदस्य सरकार की ओर के और आधे सदस्य जनता की ओर के मिलकर काम करेंगे । इस कमेटी में दो अध्यक्ष रहेंगे जिनमें एक जनता का प्रतिनिधि होगा ।
 
          श्री अण्णा ने जनता की ओर से श्री शांतिभूषण के नाम को अध्यक्ष पद हेतु सहमति प्रदान कर दी है जबकि सरकार की ओर से श्री प्रणब मुखर्जी इसके अध्यक्ष बनाये जा सकते हैं ।  इस आंदोलन की अभी तक की जीत का सेहरा देशवासियों की एकजुटता को समर्पित करते हुए व सभी देशवासियों को बधाई देते हुए श्री अण्णा ने 9 अप्रेल 2011 को प्रातः 10:30 तक विधिवत आदेश प्रसारित होने के बाद अनशन समाप्ति की घोषणा कर दी है । 

 
           निश्चय ही श्री अण्णा हजारे के नेतृत्व में प्रारम्भ और महज 4 दिनों में देश ही नहीं दुनिया भर की जनता से मिले अपार जनसमर्थन से उत्पन्न अब तक की इस उपलब्धि को देश से भ्रष्टाचार की भयावहता पर अंकुश लगा सकने के सामूहिक प्रयास के इन परिणामों को अभी पूर्णविराम तो नहीं किन्तु कामा सृदश उपलब्धिपूर्ण अवश्य ही माना जा सकता है ।

       दुनिया में महाभ्रष्ट देशों की सूचि में निरन्तर शिखर की ओर अग्रसर हमारे देश में इस महाआन्दोलन के परिणामस्वरुप शिखर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के उन्मूलन की दिशा में अब तक की यह उपलब्धि भी मील का पत्थर साबित हो सकेगी । ऐसा विश्वास फिलहाल तो सभी देशवासियों को करना चाहिये । 


23 टिप्पणियाँ:

खुशदीप सहगल ने कहा…

क्या सरकार की मंशा वाकई साफ़ है...क्या वो सभी भ्रष्ट मंत्रियों, नेताओं, अफसरों को सही में सज़ा दिलाना चाहती है...या फिर उसने अभी जंतर-मंतर के ज़रिए देश भर की जनता में आ रहे उबाल को डिफ्यूज़ करने के लिए कोई चाल चली है...

अन्ना जी आपको हर कदम पर चौकस रहना होगा...आपके साथ देश की जनता है, इसलिए कहीं दबने की ज़रूरत नहीं...

जय हिंद...

आकाश सिंह ने कहा…

असली जीत तो अभी बाकि है |
जबतक सारे भ्रस्ट लोग हवालात में न चले जाएँ तबतक ये मुहीम जारी रहनी चाहिए |
आगे आगे देखिये होता है क्या ?

यहाँ भी आयें|
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Udan Tashtari ने कहा…

अभी सिर्फ शंखनाद हुआ है, जंग तो अब शुरु होनी है.

Rahul Singh ने कहा…

स्‍वागतेय ताजी वैचारिक बयार. (आंधी, तूफान, सुनामी क्‍यों नहीं कहा, ऐतराज न हो.)

Vaanbhatt ने कहा…

yatha raja tatha praja ya iska ulta bhi...kya ye vahi janta hai jo khud cooking gas se kar nahin chalati...ya apane bachchon ke liye sifarishi patra nahin likhati...ya bina tikat safar karne ka moh nahin chhod pati...is janta main bhrasht bhi hain jo khud ko imandaar sabit karne ke liye anna ke saath khade dikh rahe hain...imaandari ek jivan shaili hai...jise hindustaan main individuals ne bacha rakha hai...aur tathakathit developed deshon mein kaanoon ne...bina saja ke pravdhaan ke sab baatein bemaani hain...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

विश्वपटल पर देश का मान बढ़ेगा।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

पहला ही कदम जब सही पडे तो आगे की दौड के लिये उत्साह बढता है । अण्णा जी की सफलाता के लिये हम प्रार्थना रत हैं ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

खुशी है कि अन्ना हजारे का आन्दोलन रंग लाया!

Patali-The-Village ने कहा…

भ्रष्टाचार के बिरुद्ध अन्ना हजारे जी का पहला कदम सफल रहा उसके लिए सभी को हार्दिक बधाई|

Swarajya karun ने कहा…

संक्षिप्त और सारगर्भित आलेख. आभार . अन्ना हजारे जी का गांधीवादी सत्याग्रह और जन आंदोलन प्रथम चरण में सफल रहा . उन्हें बहुत-बहुत बधाई . लेकिन क्या अन्ना साहब के प्रस्तावित जन-लोकपाल विधेयक के प्रारूप में देश की सबसे ऊंची कुर्सियों के खिलाफ भी शिकायत सुनने और सजा देने का अधिकार लोकपाल को मिलेगा ? क्या लोकतंत्र के सभी चार स्तम्भ - विधायिका ,न्यायपालिका ,कार्यपालिका और मीडिया सामान रूप से इस क़ानून के दायरे में आएँगे ? क्या स्वयम जन-लोकपाल भी इसकी परिधि में आएगा ? क्या अन्ना साहब इन सवालों का कोई समाधानकारक जवाब देश की जनता को देंगे ?
कृपया देखें -क्या खाने-दिखाने के दांत अलग-अलग होंगे ?
swaraj-karun.blogspot.com

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

पहला कदम उठा लिया गया है। थैंक्यू अन्ना !!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बिलकुल सही कहा जी।

---------
प्रेम रस की तलाश में...।
….कौन ज्‍यादा खतरनाक है ?

आशुतोष ने कहा…

Maen bhi gaya tha..
kya pavitr aur deshbhakti ka mahul tha..magar ye agnivsh gaddari kar sakta hai..

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

देखे उनका अनशन क्या रंग लाता है --

Deepak Saini ने कहा…

अभी तो बिगुल बजा है युद्ध तो बाकी है

mahendra verma ने कहा…

हमारी कामना है कि अन्ना जी का स्वप्न साकार हो।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

कामा है, पूर्णविराम नहीं ...
आपने सही कहा...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.

बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें

आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

ZEAL ने कहा…

असली लड़ाई अभी बाकि है |

Kailash C Sharma ने कहा…

पहला कदम सफल रहा..आशा है कि अंतिम जीत जनता की ही होगी..

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मंजिल की तरफ बढ़ने वाला पहला कदम।

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत प्यारा लेख ! ....शुभकामनायें अन्ना को !

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

अन्ना की के नेतृत्व में उठा ये जन सैलाब इस बार तो जल्दी थम गया या कोई इसे जल्द चुप करने की साजिश नोटिफिकेसन जारी कर हुयी हो कुछ दिन टालने के लिए जो कुछ भी हो इतना तो स्पष्ट हो गया कि एक बड़ा समूह हमारा भ्रस्ताचार को फूटी आँखों भी नहीं देखना चाहता और अब भी भ्रष्टाचारी नही भांप पाए ये लहर और अपनी धुन वही जारी रखे तो उन्हें आगे भगवन भी नहीं बचाएगा लेकिन कमिटी में अभी से विरोधाभासी बातें हम से तो नहीं पचती १० लोग क्या कितना करेंगे??
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

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