11.1.11

ब्लाग-जगत की ये विकास-यात्रा...

              आपके स्नेह से जुडे इस ब्लाग 'नजरिया' पर आज 51 समर्थकों के पार  होने वाली यह संख्या जो मुझे इस परिवार के सदस्य समान लग रही है इसके पूर्ण होने पर होने वाली संतुष्टि इसलिये भी पर्याप्त लग रही है कि अभी दि. 27 नवम्बर 2010 को याने मात्र 45 दिन पहले ही इस ब्लाग को मैं आप सबके समक्ष लेकर उपस्थित हुआ था और  दि. 12 जनवरी  2011 को  50 फालोअर्स के पार होकर 52 समर्थकों की इस ब्लाग पर उपस्थिति के साथ मैं आपके सम्मुख मौजूद हूँ । इस ब्लाग पर इन 45 दिनों में इसके पूर्व के मेरे 17 आलेखों द्वारा सही या गलत जो भी लेखन इस अवधि में आपने मेरा देखा, आप यकीन कर सकते हैं कि इसके पूर्व जीवन में मेरे साथ इस प्रकार के भिन्न-भिन्न विषयों पर कुछ लिख सकने का कोई पूर्वानुभव साथ में नहीं रहा था, सब यहाँ देखते-देखते और जनरुचि को समझने की कोशिश करते-करते यहाँ तक की यात्रा आप सबके समक्ष पूर्ण  कर पाया हूँ और इसलिये अपनी यहाँ तक की इस यात्रा के लिये आप सभीसे यही कहना चाह रहा हूँ-

               शुक्रिया.....         धन्यवाद...         आभार....

                           मैं  खुशनसीब  हूँ,  मुझको  सभी से प्यार  मिला...


             मेरी अब तक की इस ब्लाग-यात्रा में ब्लागवुड के जिन सुपरिचित शख्सियतों के द्वारा जो जीवन्त सहयोग और मार्गदर्शन मुझे मिला उनमें सर्वश्री अविनाशजी वाचस्पति,  श्री ताऊ रामपुरियाजी,  श्री डा. टी. एस. दराल सर   जैसे स्नेहासिक्त शख्सियतों के साथ ही भातृवत स्नेह रखने वाले श्री सतीषजी सक्सेना के नाम मेरे जेहन में प्रमुखता से आते दिखते हैं जबकि मैं अच्छा लिख रहा हूँ या अच्छा नहीं लिख रहा हूँ जैसे मुद्दों पर इस समूचे ब्लाग जगत के गुरुदेव श्री समीरलालजी समीर,  श्री अनूपजी शुक्ला,  श्री खुशदीपजी सहगल,  श्री दिनेशरायजी द्विवेदीजी,  श्री राज भाटियाजी,   श्री देवेन्द्रजी पांडेय   और   डा. श्री अमर कुमारजी  जैसे अति व्यस्त और तोल-मोलके बोल जैसी विचारधारा के प्रतिक शख्सियतों से भी गाहे-बगाहे मिल सकने वाली टिप्पणीयां मुझे अपनी हौसलाआफजाई के पुरस्कारस्वरुप प्राप्त हुई प्रतीत होती रहीं हैं । यहाँ मौजूद वे चिर-परिचित नाम जो इस ब्लाग-वुड में अपनी अलग पहचान रखते हैं और जिनकी उपस्थिति ने  समर्थकों के रुप में मेरा उत्साह बढाया उनमें कुछ प्रमुख नाम मुझे सर्वश्री प्रमोदजी तांबट,  श्री महेन्द्रजी वर्मा,  श्री दीपकजी 'मशाल',  श्री ज्ञानचंदजी मर्मज्ञ,  सर्वत्र अमन का पैगाम फैलाने के पक्षधर रहे श्री एस. एम. मासूम,  खबरों की दुनिया जिनका परिचय रही श्री आशुतोषजी मिश्र  के साथ ही इस ब्लाग-जगत में हम सभी के आदरणीय रहे  डॉ. रूपचन्द्रजी शास्त्री "मयंक"  की मौजूदगी के और  श्री खुशदीपजी सहगल की नेटवर्क ब्लाग पर मेरे इस ब्लाग को समर्थन देने की सकारात्मक पहल ने मुझमें हमेशा अतिरिक्त उत्साह का सृजन किया ।
  
            जहाँ तक महिला ब्लागर्स के सहयोग व स्नेह की सोच अपने दिमाग में लाता हूँ तो सुश्री अजीतजी गुप्ता,   सुश्री निर्मला कपिला
जी,   डा. दिव्याजी (ZEAL),   सुश्री संगीता स्वरुपजी (गीत),  सुश्री वन्दना गुप्ताजी  इन सभी के द्वारा मिलते रहे प्रोत्साहन को मैं अपने लिये अमूल्य सहयोग के रुप में ही देख पाता हूँ । जबकि नजरिया परिवार में शामिल होकर मुझे प्रोत्साहन दिलाने में इस ब्लाग जगत में सुपरिचित  सुश्री अलका सर्वत मिश्रा,  डा. (मिस) शरद सिंह,  बहन डोरथीजी,  संध्या शर्माजी,   कविता रावतजी,  वीना श्रीवास्तवजी,  सुश्मिता सेठीजी, अनुपमाजी  और इस क्षेत्र में नई हस्ताक्षर  सुश्री सर्जनाजी शर्मा  के द्वारा प्राप्त इस समर्थन को भी मैं इस विकास-यात्रा में पर्याप्त महत्वपूर्ण योगदान के रुप में ही देख पाता हूँ । 

            इस ब्लाग-यात्रा में इसके पूर्व आपके सम्मुख परिचित कराये गये मेरे दो अन्य ब्लाग भी आपकी नजरों में अवश्य आए होंगे जो निम्नानुसार रहे हैं-


    (1)        'स्वास्थ्य-सुख'
                30-10-2010 से प्रारम्भ     7 आलेख       व      12 समर्थक   अब तक.


    (2)        'जिन्दगी के रंग'
                16-11-2010 से प्रारम्भ    22 पोस्ट        व      21 समर्थक   अब तक.

            यदि इनके परिचय के बारे में मैं कुछ कहूँ तो जिन्दगी के रंग ब्लाग को मैं अपने बचपन से आज तक सुनी व दिमाग में संजोकर रखी गई सौद्देश्यपूर्ण कहानियां, हल्के-फुल्के जोक्स व अपने इर्द-गिर्द देखी जा रही कुछ सामान्य उपयोगी जानकारियों को आप तक बांटने के प्रयास में आपके सम्मुख लेकर उपस्थित हुआ था जबकि शरीर-स्वास्थ्य से जुडी वे जानकारियां जो आयुर्वेद व प्राकृतिक उपचार पद्दतियों के रुप में इससे सम्बन्धित साहित्य में रुचि रखने के कारण मेरी स्मृतियों में मौजूद रही हैं उन जानकारियों को आप तक पहुँचाने के प्रयासस्वरुप स्वास्थ्य-सुख ब्लाग को आपके समक्ष लेकर उपस्थित हुआ था । 
 
            अपने योग-अभ्यास से जुडे दौर में अक्सर एक कोटेशन मेरे पढने में आता रहा था कि 'स्वास्थ्य सस्ता है किन्तु हम लेते नहीं और बीमारियां मंहगी हैं जिन्हे हम पैसे खर्च करके भी खरीदते हैं'  यह उक्ति यहाँ भी इस रुप में सही लगी कि सर्वाधिक जानकारियां जुटाकर परिश्रमपूर्वक लिखे जाने वाले इन आलेखों पर ईमानदार प्रोत्साहन की कमी मुझे लगती रही । जिन्दगी के रंग की विकास-यात्रा भी सामान्य गति से ही सही आप सबके सहयोग से आगे की ओर चल ही रही है । किन्तु 'नजरिया' के ताजे विषयों पर लिखे गये मेरे आलेख में सर्वाधिक जनरुचि मेरे महसूस करने में आती रही तो मेरा भी अधिक रुझान फिर इधर ही स्थानांतरित होता गया ।

            यहाँ तक की मेरी यह ब्लाग-यात्रा महज एक छोटा सा पडाव मात्र ही है । मंजिलें कहाँ हैं ये तो कोई भी नहीं जानता किन्तु चलते-चलना अपना आवश्यक कर्म है और मैं उम्मीद करता हूँ कि उम्र के जिस पडाव पर आकर इस माध्यम से मेरा जो जुडाव बन चुका है यह अब अपनी सामर्थ्य के अन्तिम छोर तक चलता तो यूं ही रह सकेगा ।

            'नजरिया' ब्लाग की यह विकास-यात्रा अधूरी कहलाएगी यदि मैं यहाँ मनोज ब्लाग के स्नेहमयी श्री मनोज कुमारजी के योगदान का उल्लेख ना करुं, इनकी  छबि इस ब्लाग-जगत में नये ब्लागर्स को प्रोत्साहन देने में सर्वाधिक अग्रणी मानी जाती है अपनी इसी छबि के मुताबिक श्री मनोजजी  मेरे इस ब्लाग के सबसे पहले फालोअर्स बने और आपके इस नेक सहयोग के बाद तो जैसे यह सिलसिला 'मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर, लोग साथ आते गये कारवां बनता गया' कि तर्ज पर फिर आगे की ओर बढता ही रहा, अतः अपने इस आलेख में मैं श्री मनोज कुमारजी को सार्वजनिक रुप से धन्यवाद देना चाहता हूँ । उम्मीद है कि इनके साथ ही उपरोक्त सभी चिर-परिचित मित्रों के सहयोग का ये क्रम मेरे साथ आगे भी बना रह सकेगा ।

            अन्त में यहाँ तक की मेरी यह विकास-यात्रा कभी सम्भव नहीं हो पाती यदि मुझे तकनीकी सहयोग के रुप में मेरे भतीजे राजेश के पुत्र श्री अर्पित बाकलीवाल  का साथ व सहयोग नहीं मिल पाता क्योंकि तकनीक-ज्ञान में मैं आज भी कोरा कागज मात्र ही हूँ और प्रिय अर्पित ने अपनी पढाई के समय में भी मेरी राहों में आ रही सभी बाधाओं का समयानुसार समाधान करवाकर इस दिशा के मेरे उत्साह को कभी मन्द नहीं होने दिया अतः उसके प्रति विशेष रुप से शुक्रगुजार होने के साथ ही मैं अपने उन सभी साथियों का ह्दय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिनके नामों का उल्लेख मैं यहाँ भले ही न कर पाया होऊं किन्तु जिन्होंने मेरे ब्लाग्स व आलेखों पर फालोअर्स के द्वारा, टिप्पणियों के द्वारा व अपने अमूल्य सुझावों के द्वारा अपना प्रत्यक्ष या परोक्ष सहयोग समय-समय पर मुझे दिया । मैं इन सभी मित्रों से ये निवेदन करना चाहूँगा कि आपके अमूल्य सहयोग की आपके नामों के साथ यहाँ चर्चा मेरे द्वारा  भले ही न हो पाई हो किन्तु आपके इस जीवन्त योगदान के बगैर मेरी यह यात्रा कभी सम्भव नहीं हो सकती थी । इसलिये आप सभी से सामूहिक रुप से यही कहूँगा-


                       एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों,  
                       ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों.

           शेष आप सभी मित्रों, पाठकों, सहयोगियों व अपने अमूल्य टिप्पणीकर्ताओं को मेरी ओर से अनेकानेक धऩ्यवाद सहित...



24 टिप्पणियाँ:

ajit gupta ने कहा…

सुशील जी, हम तो ब्‍लाग जगत में अच्‍छा पढ़ने के लिए आए थे और बस उसी की तलाश में रहते हैं। आपका ब्‍लाग देखा, विषय अच्‍छे लगे तो पढ़ने लगे। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं बस आप ऐसा ही लिखते रहें जिससे हम नियमित आपको पढ़ते रहें।

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

sushilji,

bahut bahut badhai, aap jald 100 aur 100 se 1000 par pahunche, aapka safar nirntar chalta rahe , shubh-kaamnaon sahit

sanjay kumar

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

आफ अपने ब्लागों को हलके से न लें। आप के सभी ब्लाग महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान को बाँटते चलें, यह बढ़ता ही जाएगा।

सुज्ञ ने कहा…

शानदार प्रगति की है आपने, यह बहुत कम ब्लॉगर कर पाते है।
यह श्रेय आपके सार्थक लेखन को जाता है।

बंटी "द मास्टर स्ट्रोक" ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
बंटी "द मास्टर स्ट्रोक" ने कहा…

"आफ अपने ब्लागों को हलके से न लें। आप के सभी ब्लाग महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान को बाँटते चलें, यह बढ़ता ही जाएगा।"

शानदार प्रगति की है आपने, यह बहुत कम ब्लॉगर कर पाते है।

ऐसा ही कुछ हम भी कर रहे है , पर लोग इसे ज्यादा पसंद नहीं करते , करते भी है तो बेनामी बनकर

कुमार राधारमण ने कहा…

आप अच्छा काम कर रहे हैं। जारी रखिए। शुभचिंतकों की कमी नहीं रहेगी।

मनोज कुमार ने कहा…

आपने तो दिल छू लिया।
आप अच्छा लिख रहे हैं। अच्छा काम ज़ारी रहना चाहिए। यही उम्मीद है।

माधव( Madhav) ने कहा…

nice

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

शुभकामनायें, आपके शुभचिन्तकों की संख्या बढ़ती रहे।

deepak saini ने कहा…

Half Century ke liye Congratulations

Gopal Mishra ने कहा…

aapko isi tarah safalta milti rahe.

aapne mere blog ko follow karne ke baare me likha tha par shayad kisi technical glitch ki wajah se follow nahin ho paya..plz do it once again Thanks

Kailash C Sharma ने कहा…

आप इसी तरह सुन्दर लिखते रहें यही शुभकामना है..

"पलाश" ने कहा…

अकेले चलने का जिनमे हौसला होता है
कारवां उनके पीछे ही चलता है
सच की मशाल जो थामते है
रौशन जहाँ उनसे ही होता है

आपको बहुत बधाई ।

Patali-The-Village ने कहा…

आप ऐसा ही लिखते रहें जिससे हम नियमित आपको पढ़ते रहें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं| आपको बहुत बधाई ।

सतीश सक्सेना ने कहा…


ब्लॉग जगत में लिखने वालों की कोई कमी नहीं है ...हाँ कई बार अच्छे पाठकों की कमी जरूर खलती है ! अधिकतर लोग आपको सरसरी निगाह से देख मूल्यांकन कर जाते हैं ! मगर धीरे धीरे यदि आप अच्छा लिखते हैं तो अच्छे पाठक भी मिलते हैं एवं आप के लिखे पर कमेन्ट भी करते हैं !
हर ब्लागर की लेखनी उसका परिचय देने के लिए काफी है सो शीघ्र ही आप अपनी पहचान बना लेंगे ! आपसे मैं अच्छे लेखन की आशा करता हूँ ! हार्दिक शुभकामनायें !

ZEAL ने कहा…

शुभकामनायें !

'उदय' ने कहा…

... prabhaavashaalee post ... badhaai va shubhakaamanaayen !!

पंकज सिंह राजपूत ने कहा…

जो इश्वर मुझे यहाँ रोटी नहीं दे सकता, वो मुझे स्वर्ग में अनंत सुख कैसे दे सकेगा
भारत को ऊपर उठाया जाना हैं ! गरीबों की भूख

http://meradeshmeradharm.blogspot.com/

नीरज बसलियाल ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
नीरज बसलियाल ने कहा…

लिखना तो एक जिद है , बस बनाये रखिये इसे

Sunil Kumar ने कहा…

हमें तो अच्छा लगा, आप के साथ हो लिए ..........

डॉ टी एस दराल ने कहा…

सुशील जी आपके लेख सार्थक होते हैं । और आपकी लेखनी में परिपक्वता झलकती है ।
इसी का परिणाम है थोड़े से समय में ५० फोलोवर ।
बधाई ।
आशा है इसी तरह सार्थक लेखन से आप अपना योगदान देते रहेंगे हिंदी ब्लोगिंग में ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

लीजिए यहाँ आपने हमारा नाम याद रखा और हम ही गैरहाजिर हो गए .... पहला सिक्सर पर बधाई

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आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

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