28.1.11

एक दिन का बादशाह !


      कल भाई श्री जाकिर अली 'रजनीश' के ब्लाग 'मेरी दुनिया मेरे सपने' की एक पोस्ट "हिन्दी के सर्वाधिक चर्चित/पढे जाने वाले ब्लाग" पढी । निःसंदेह इस पोस्ट ने कई ब्लागर्स मित्रों को खुश होने का पूरा अवसर उपलब्ध करवाया । किन्तु सभी पाठकों से विनम्रतापूर्वक क्षमा चाहते हुए मैं ये बताने की कोशिश करना चाह रहा हूँ कि जिस 'बिज इन्फार्मेशन' साईट का उल्लेख और सर्वेक्षण का निष्कर्ष भाई श्री जाकिर अली जी ने दिया है वह आंकडों की भाषा में सही होते हुए भी वास्तविकता के धरातल पर गले उतर सकने जैसा इसलिये नहीं लगा कि व्यवहारिक अनुभवों में शायद सभी ब्लागर्स मित्रों ने किसी सीमा तक यह बात देखी होगी कि हिन्दी के ब्लाग्स की सारी रेलमपेल मोटे तौर पर पोस्ट प्रकाशित होने के इकलौते एक दिन ही चलते दिखती है और दूसरे दिन उस ब्लाग पर विजिटर्स की संख्या 25% तक भी बमुश्किल ही पहुँच पाती है और मेरी समझ में ऐसा इसलिये होता है कि उस एक दिन वो पोस्ट ब्लाग एग्रीगेटर्स पर दिखती रहती है इसलिये वे सभी पाठक जिनकी उस पोस्ट को पढने में रुचि होती है वे उसी दिन उसे पढ लेते हैं । उस ब्लाग के फालोअर्स भी लगभग उसी दिन उस पोस्ट को पढ चुके होते हैं और दूसरे दिन सीधे उस ब्लाग की पाठक संख्या 20% या 25% के दायरे में पहुंच जाती है जो पोस्ट के न बदल पाने की स्थिति में और भी घटते-घटते कई बार तो 0 तक भी आ जाती है, जबकि यहाँ बात प्रतिदिन के आधार पर चल रही है न कि उच्चतम संख्या की, जबकि कई ब्लाग्स पर तो सप्ताह भर में भी पोस्ट बदल नहीं पाती है ।

        अब यदि हम उच्चतम संख्या के आधार पर भी बात करें तो- यह समझने के लिये मैंने इस साईट पर अपने तीनों ब्लाग्स को चैक किया और सामान्य जानकारी के लिये सिर्फ इसी ब्लाग नजरिया के लिये प्राप्त निष्कर्ष के आंकडों का वह विवरण जो मुझे उस साईट से प्राप्त हुआ उस पर आप भी नजर डालिये...

       ब्लाग का नाम        वैश्विक रैंक        भारतीय रैंक        प्रतिदिन पृष्ठ        प्रतिदिन विजिट
         नजरिया             497,590.           34,566              750                  750

        मैं नहीं समझ पाया कि जब श्री जाकिर अली 'रजनीशजी' ने 500 विजिट्स प्रतिदिन के आधार पर सर्च किया तो इस ब्लाग के निष्कर्ष सामने क्यों नहीं आ पाये ?

        अब यदि मैं मेरे इस ब्लाग नजरिया के वास्तविक आंकडों की बात करुं तो इस ब्लाग पर 9-12-2010 से 8-1-2011 तक की अवधि में कुल वास्तविक विजिटर्स जो आए उनकी संख्या 369 से 2345 तक पहुंचकर कुल पाठक योग 1976 पाठकों का 30 दिन में रहा फिर 9-1-2011 से 27-1-2011 तक यह संख्या 2345 से 3715 तक याने कुल पाठक संख्या इस ब्लाग पर इन 18 दिनों में 1370 विजिटर्स की रही, और किसी भी एक दिन में सर्वाधिक पढी जाने वाली पाठक संख्या मेरे पास उपलब्ध प्रमाणिक आंकडों के मुताबिक अब तक 144 पाठकों की रही है ।

         मैंने अपने इस ब्लाग नजरिया पर इस सर्वेक्षण के लिये निर्धारित बिज इन्फार्मेशन का  विजेट लोगो लगा दिया है जिस पर क्लिक करके आप यहाँ उपलब्ध आंकडों की सत्यता परख सकते हैं और आवागमन के रुप में वह विजेट तो लगा ही हुआ है जो यह प्रमाणित करता है कि अभी तक कितने विजिटर्स इस ब्लाग पर आए हैं ।  हमारे डेशबोर्ड पर भी आंकडे कालम यह बखूबी प्रमाणित कर रहे होते हैं कि एक दिन में, एक सप्ताह में, एक महिने में कितने विजिटर्स इस ब्लाग पर आए और वे किस-किस देश से आए हैं ऐसे में यदि इस तुलनात्मक विवरण को समझने में मैं कहीं गल्ति कर रहा हूँ तो किसी भी पाठक से प्राप्त जानकारी के मुताबिक मैं स्वयं भी उस गल्ति को अवश्य ही समझना चाहूँगा ।

25 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

एकदम सही बात कही है...

सतीश सक्सेना ने कहा…

एक अच्छा लेख !
ब्लॉग की कीमत , दिल के बहलाने के लिए तो अच्छी ही है ....शुभकामनायें !

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय सुशील बाकलीवाल जी
नमस्कार !

बहुत बढ़िया पोस्ट!
गणतन्त्र दिवस की 62वीं वर्षगाँठ पर
आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Shah Nawaz ने कहा…

इस साईट की जमा-भाग में कुछ गड़बड़ लग तो रही है... या यह भी हो सकता है की यह सर्च इंजिन बोट के हिट्स को भी गिनता हो जो की स्टेट काउंटर नहीं गिनता है.

Shah Nawaz ने कहा…

जहां तक साईट की कीमत का सवाल है, तो ब्लागस्पाट के ब्लॉग की कीमत का मालिक तो ब्लागस्पाट ओनर अर्थात गूगल ही है... इसलिए कीमत कुछ भी हो क्या फर्क पड़ता है?

निर्मला कपिला ने कहा…

हम तो सभी प्रतिस्पर्धाओं से दूर केवल अपनी सुविधा अनुसार लिखे पढे जा रहे हैं। सुशील भाई हमे भी उस साईट का पता बता दें जहाँ से ये आँकडे देखे हैं। शुभकामनायें।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

निर्मला कपिलाजी,
उस साईट का पता जानने के लिये आपको परेशान होने की आवश्यकता ही नहीं है । मेरे इसी लेख में नीले रंग से लिखे बिज इन्फार्मेशन पर अपने माउस कर्सर से क्लिक करके (चटका लगाके) आप सीधे वहाँ पहुँच जावेंगी । वहाँ दिख रहे बाक्स में अपनी साईट वीर बहूटी का URL Link पेस्ट करके सर्च को क्लिक करते ही आपको अपने ब्लाग पर दुनिया भर में पढे जा रहे अ वास्तविक फिगर प्रतिदिन के हिसाब से दिखने लगेगें ।
कोई भी पाठक इस तरीके से अपने ब्लाग पर इस साईट के मुताबिक आने वाले पाठकों की संख्या देखकर खुश हो सकते हैं ।

वन्दना ने कहा…

ये साइट देखी तो थी मगर हम तो इस चक्कर मे पड्ते ही नही इसलिये इस बारे मे सोचते भी नही।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

bilkul sahi!

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सच कहा है..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सुशील जी, सबसे पहले एक दिन की बादशाहत मुबारक हो!
मैंने अपने ब्लॉग में सर्वाधिक पढे जाने वाले ब्लॉग के रूप में जिनका जिक्र किया है, उन्हें मैंने अपनी याददाश्त से उनकी लोकप्रियता के आधार पर चेक करके पाया है, न किसी सर्च के द्वारा! इसीलिए मैंने पोस्ट में नीचे लिखा भी है कि यदि किसी अन्य का नाम इसमें आने से छूट रहा हो, तो कृपया बताने का कष्ट करे!

दूसरी बात यह कि आपने लिखा हे कि अधिकतर विजिटिर पोस्ट लगाने के दिन आते हैं! अगले दिन 20 प्रतिशत विजिटर ही रह जाते हैं और कोई कोई दिन संख्या 0 रह जाती है! मैं कहूंगा कि यह उन ब्लॉगों की दशा है, ​जहां पर विजिटर सर्च इंजन से नहीं आते हैं! उदाहरण के रूप में आप 'तस्लीम' को ले सकते हैं और इसके आंकडों को आप यहां पर देख सकते हैं!

जहां तक बिज इन्फार्मेशन की बात है, उसका अपना आकलन है! यदि वह आपको वास्तविकता के आधार पर कम हजम होने वाला लगता है, तो इसके लिए मैं क्या कर सकता हू? वैसे भी इस दुनिया में खुश रहने के लिए कितने कम अवसर मिलते हैं! यदि बिज इन्फार्मेशन हमें यह मौका उपलब्ध करा रहा है, जिसकी उसने कोई फीस भी नहीं ली, तो कम से कम मुझे तो उससे कोई दिक्कत नहीं है!

sandhya ने कहा…

SAHI KAHA AAPNE...

Udan Tashtari ने कहा…

प्रसन्न रहिये और सार्थक लेखन करते रहें.

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

भाई श्री जाकिर अली रजनीशजी,
सर्वप्रथम तो मैं 'हजम नहीं होने' वाले शब्द के लिये क्षमा चाहूंगा क्योंकि लिखते समय 'गले नहीं उतरने' जैसा शब्द दिमाग में आ नहीं पाया जिसे मैंने वैसे ही प्रयोग में ले लिया । तसलीम ब्लाग की विशिष्ट लोकप्रियता का अपना एक अलग प्रकार का महत्व है जिसका उल्लेख हम अक्सर इधर-उधर की चर्चाओं में भी देखते रहते हैं और उसके लिये आपके दूसरे सर्वेक्षण के आंकडे सत्यता के अधिक करीब लग रहे हैं लेकिन बिज इन्फार्मेशन जो निष्कर्ष अन्य ब्लाग्स के लिये दे रहा है उनकी सत्यता मेरे ब्लाग के निष्कर्ष के आधार पर कैसे स्वीकारी जा सकती है ? मैं आपको जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा हूँ और आपसे यह उम्मीद भी करुंगा कि आप इसे किसी भी प्रकार से स्वयं के प्रति व्यक्तिगत आक्षेप के रुप में बिल्कुल ना लें । आशा है आप मेरे मनोभावों को समझ सकेंगे । धन्यवाद सहित...

Learn By Watch ने कहा…

@सुशील जी: ये जो आंकड़े आप देख रहे हैं वह असल में सिर्फ आपके ब्लॉग पर आने वाले लोगों के ही नहीं हैं, बल्कि उन लिंक के भी हैं जो कि आपके ब्लॉग से किसी डाटा को दिखाते हैं, जैसे कि आपकी यह ब्लॉग पोस्ट किसी एग्रीगेटर में होगी, तो यदि वह पेज किसी भी विजतार के द्वारा देखा जाये जिसमे इस लेख का लिंक हो तो भले ही, उस लिंक पर क्लिक करके आपके ब्लॉग पर ना आये, आपके ब्लॉग पर एक विजिट बढ़ा दी जायेगी|

उपरोक्त आंकड़े इसी प्रकार निकाले गए हैं, पर गूगल एनालिटिक यह नहीं करता इसलिए गूगल एनालिटिक पर आपको विजिटर कम दिख रहे हैं और बिज इन्फो पर ज्यादा :)

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

@ Learn By Watch,
हार्दिक धन्यवाद आपको मेरी जानकारी बढवाने के लिये, दिल से...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

अच्छा लिखेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी ।
आंकड़ों की तरफ ध्यान न ही दिया जाए तो अच्छा है ।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

रोचक लगा ... बस लगे रहे सर यही बहुत है ... आभार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चलते रहना है, आँकड़ों में बिना उलझे।

: केवल राम : ने कहा…

आपका कहना सही है सर ...शुक्रिया

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सच कहा है..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आंकड़ों से ज्यादा आत्मसंतुष्टि होनी चाहिए :)

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार 29.01.2011 को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
आपका नया चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सुशील जी, कभी कभी एक शब्‍द सारी बात को खराब कर देता है, और यही इस पोस्‍ट के साथ भी हुआ। चलिए कोई बात नहीं, बडे-बडे शहरों में छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं।

मैंने 'नज़रिया' को भी 'हिन्‍दी के सर्वाधिक चर्चित ब्‍लॉग' की लिस्‍ट में शामिल कर लिया है।

'लर्न बाई वॉच' का जानकारी के लिए आभार।

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जीवन के लिए युद्ध जरूरी?
आखिर क्‍यों बंद हुईं तस्‍लीम पर चित्र पहेलियाँ ?

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

सुशील जी । आपकी इस पोस्ट के बारे में पहले पता
नहीं था । कृपया मेरा अनुरोध है कि एक बार इस एड्रेस
को चैक करे ।
rajeevkumarkulshrestha.blog.co.in
ये रिजल्ट तो मेरे ही लिये हैं । पर मुझे विश्वास नहीं
कि ये सच है । आप भी चौंक गये होंगे । रिजल्ट देखकर ??

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