9.1.11

रात-रात भर जाग-जागकर इन्तजार करते हैं...


 
                 ये मैं कोई गीत नहीं गा रहा हूँ बल्कि ठण्ड के उस  खतरनाक हालात को समझने का प्रयास कर रहा हूँ जिसमें किसी भी कारण से घर की सुविधा से वंचित रह गये वे सभी लोग जिनकी रात सडक पर या खुले प्रांगण में इस समय गुजर रही है उनकी पल-पल गुजरती घडी की टिकटिक कितनी लम्बी होती जा रही है ये महसूस करने की कोशिश कर रहा हूँ ।

              सर्दी का जानलेवा कहर दिन-ब-दिन प्रचण्ड होता चल रहा है । इन्दौर में जहाँ पारा लगातार 5.0 के नीचे चल रहा है वहीं 50 किलोमीटर की दूरी पर उज्जैन में यह 2.0 डिग्री तक पहुँच गया है । खेतों में खडी फसल पर इस जानलेवा सर्दी से जो नुकसान कृषकों को भुगतना पड रहे हैं उनकी भरपाई तो हमें थोडी और मंहगाई के मुख में ले जाकर शायद पूरी हो जावेगी किन्तु इस ठण्ड से आसपास के क्षेत्र से मृत्यु के आगोश में समा जाने के जो परिदृश्य लगातार सामने आ रहे हैं वे इसकी भयावहता का बखूबी चित्रण कर रहे हैं ।
 
             सबसे पहले वे भिखारी जिनके पास सिवाय सडक पर रात गुजारने के दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है, जो जैसे अलाव के रुप में कुछ मिल जावे उसे जलाकर बैठे रहते हैं, नींद यदि आवे तो वहीं पड लिये लेकिन कितनी देर तक ? आंच घंटे भर भी गर्म नहीं रख पा रही है और गहराती रात के साथ ठण्ड बढती जा रही है । जब भी जो भी उधर से गुजरे- उनका एक ही सवाल सामने आ रहा है-  ए भाई टाईम क्या हुआ है ? सुबह कब होगी ?

              अस्पतालों में उपचार के लिये आसपास के गांव-कस्बों से रोगियों के साथ आए ग्रामीणों पर भी ये ठण्ड कहर बनकर टूट रही है और बस व रेल्वे-स्टेशनों पर अपनी गाडियों की प्रतिक्षा जिन्हे रात में करना पड रही है उनके भी हाल-बेहाल कर रही है ये ठण्ड ।

              मात्र एक सप्ताह की इस शीतलहर में सिर्फ मध्यप्रदेश में ही लगभग 25 व्यक्तियों की जान ले चुकी ये ठण्ड शेष भारत में कहाँ क्या तांडव कर रही होगी और इसका प्रकोप कब तक थमेगा, राम जाने । फिलहाल तो सब तरफ यही सुनने में आ रहा है- कदी नी देखी रे दादा असी ठण्ड ।


18 टिप्पणियाँ:

ZEAL ने कहा…

इस बार ठण्ड जानलेवा हो रही है। समाचार की मानें तो शीतलहर से मरने वालों की संख्या १५० को पार कर चुकी है।
सरकार को जगह-जगह अलाव जलवाने चाहिए जिससे सड़क पर , इस बर्फीले मौसम में लोगों को कुछ राहत मिल सके।

अरूण साथी ने कहा…

BAHUT THANT HAI J

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

घर के बाहर स्थितियाँ बड़ी खराब हैं।

ajit gupta ने कहा…

इस मौसम में समाचार पत्रों में प्रकाशित शोक समाचारों में भी वृद्धि हो गयी है। कई वृद्धजन अंतिम विदाई कर गए। उदयपुर में मौसम कुछ ठीक हुआ है।

amit-nivedita ने कहा…

ईश्वर और प्रकॄति से प्रार्थना करें और हर संभव मदद जो गरीबों की कर सकते हैं करनी चाहिये।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

इस सीजन में गर्मी , बरसात और सर्दी -सभी ज्यादा पड़ी है । क्या यह संकेत है पृथ्वी पर बदलते मौसम का ?
शौअद आगे आगे ऐसा ही हो ।
मानव जाति को सचेत हो जाना चाहिए ।

mahendra verma ने कहा…

तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले मानव समुदाय के द्वारा पर्यावरण के प्रति की गई छेड़छाड़ का ख़ामियाजा आज ग़रीब वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

यह ठंड एक तरह की चेतावनी है कि मानव, अब तो तू सुधर जा।

'उदय' ने कहा…

... thand kahar varpaa rahi hai !!

Patali-The-Village ने कहा…

इस बार ठण्ड जानलेवा हो रही है। यह सब प्रकृति से छेड़ छाड़ का ही नतीजा दिखता लगता है|

deepak saini ने कहा…

ठण्ड तो है ही,
आपके जीवन दर्शन के कायल हो गये हम तो कहाँ-कहाँ तक नजर दोैडाई है आपने,
शुभकामनाये

मनोज कुमार ने कहा…

हम वातावरण के साथ छेड़छाड़ करते रहते हैं, यह उसी का नतीज़ा है।

सतीश सक्सेना ने कहा…

हम दूसरों की तकलीफ समझाने का प्रयत्न करते ही कहाँ हैं ...हकीकत है यह सब .... शुभकामनायें आपको

Rahul Singh ने कहा…

मौसम के तेवर, गरीबी में आटा गीला करता है.

Gopal Mishra ने कहा…

Mai to Chennai me hun par North India me to thand ne halat kharaab kar rakhi hai.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

vastav me jaada apna bhayankar roop dikhla raha hai.

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

हम prakrti के साथ छेड़छाड़ करते रहते हैं, यह उसी का नतीज़ा है।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

सुशिल जी ,सर्दी का यह आलम है की हमारे बाम्बे मे जहा कभी इसके दर्शन ही नही होते थे ,वहा हम सुबह -सुबह स्वेटर पहने नजर आते है-- और इंदौर से आने वाले मेहमानों की तादाद इसी महीने बहुत होती थी---इस बार उसमे कटोती हुई है --ही-- ही --ही ------:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post.

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