15.4.18

तब और अब में अंतर ...!


          
      डाकू मानसिंह कभी चम्बल के बीहड़ों के सरताज हुआ करते थे । उन्होंने 1939 से 1955 तक अपने क्षेत्र में एकछत्र राज्य किया । एक बार आगरा में डकैती करने गए, सेठ को पहले ही सूचना भेज दी गयी थी (उस समय डकैतों के द्वारा डकैती करने से पहले ही चिठ्ठी के द्वारा सूचना भेज दी जाती थी) । अंग्रेजों का कप्तान छुट्टी लेकर आगरा से भाग गया । तय समय पर डकैती शुरू हुई ।  

          मानसिंह सेठ के साथ उसकी बैठक में बैठ गए, सेठ ने तिजोरी की सभी चाभियां मानसिंह को दे दी और बोला - मेरी चार जवान बेटियां घर में हैं, बस उनकी इज्जत मत लूटना !

         
मानसिंह ने कहा - हम धन लूटते हैं, इज्जत नहीं । इसी बीच एक डकैत सेठ की एक बेटी से छेड़खानी कर बैठा,  लडकी चिल्लाने लगी..  लडकी की आवाज सुनकर सेठ घर के अंदर की ओर भागा, बेटी ने कहा एक डकैत ने मेरे साथ छेड़खानी की है, मानसिंह ने पुरे गिरोह को एक लाइन में खड़ा किया, लड़की को अपने पास बुलाया और बोले - बेटी पहचान इनमें से तेरे साथ छेडखानी करने वाला कौन था ? 

          जैसे ही लड़की ने डाकू को पहचाना, मानसिंह ने तत्क्षण ही उस डाकू को गोली मार दी और सेठ से माफ़ी मांगकर व सारा सामान उसके घर में ही छोड़ अपने साथी की लाश लेकर लौट गए !

         
ये था पूर्व भारत के डकैतों का चरित्र । 

         जबकि आज के सफ़ेद पोश राजनैतिक व प्रशासनिक डकैतों ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं । देश के विभिन्न हिस्सों से बेटियों की चीखे लगातार सुनने में निरन्तर आ रही हैं । उन्नाव व कठुआ जैसी वीभत्स घटनाएँ आज  भी वीराने में गूंज रही है और कोई उस चीख को सुनना नहीं चाहता, कोई उन हैवानों के खिलाफ बोलना नहीं चाहता । सब देख रहे हैं कि वास्तविक दोषी कौन हैं, किंतु फिर भी पूरी व्यवस्था उन्हीं अपराधियों को बचाने में अपनी पूरी ताकत लगा रही है । अराजकता सर चढ़ कर बोल रही है !

          एक ओर तो हम स्त्रियों की निरंतर घटती संख्या के आधार पर लेंगिक असमानता का रोना रो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जो लडकियां हैं उन्हें भी चैन से बढने, फलने-फूलने से रोक रहे हैं । क्या ये विनाश के लक्षण नहीं हैं ?  


30.3.18

खुश रहना आसान भी है, कोशिश करके तो देखें...

सफलता = खुशी
           अधिकतर लोग ऐसा ही समझते हैं, लेकिन वो ग़लत हैं । खुशी का विज्ञान हमें बताता है कि सही इसका उलटा है । यानि...

खुशी =  सफलता
          जबकि सफलता आपके हाथ में नहीं होती, पूरे प्रयास करने के बाद भी ये आपको मिल सकती है और नहीं भी मिल सकती । जबकि खुशी आपके हाथ में होती है । बस आस-पास थोड़ा ढ़ूंढने की कोशिश करनी होती है । छोटी छोटी बातों में आप खुशियां ढूंढने (या चुराने) का अभ्यस्त होना तो सीखिए, फिर देखिए आपका जीने का अंदाज़ ही बदल जाएगा ।

           ये करना कितना आसान है जानिए ‘हैप्पीनेस के प्रोफेसर’ डॉ ताल बेन शहर से...बेन शहर अमेरिका की प्रतिष्ठित हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं...उनका पॉजिटिव साइकोलॉजी का कोर्स छात्रों में कितना लोकप्रिय है, ये इसी से अंदाज़ लगा लीजिए कि हर सेमेस्टर में 1400 छात्र इसके लिए एनरोल करते हैं...हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के 20 फ़ीसदी ग्रेजुएट्स इसे इलेक्टिव कोर्स के तौर पर चुनते हैं...

           47 वर्षीय इस हैप्पीनेस गुरु के मुताबिक खुशी,  आत्मसम्मान और प्रेरणा पर केंद्रित क्लास छात्रों को जीवन अधिक आनंद के साथ जीने के लिए सक्षम करती है, बेन अपनी क्लास में छात्रों को 14 विशेष टिप्स पर फोकस करने के लिए कहते हैं । इससे ना सिर्फ उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है बल्कि वो आसपास के लोगों में भी सकारात्मकता का संचार कर पाते हैं ।

           आपको वो 14 टिप बताने से पहले खुशी सिखाने वाले इस प्रोफेसर के बारे में कुछ और बातें भी बता दूं-

           -इस्राइली मूल के अमेरिकी नागरिक बेन कई बेस्टसेलर्स पुस्तकों के लेखक हैं । उनकी दो पुस्तकों  Happier (2007)  और Being Happy (2010)  दुनिया की 25 से ज़्यादा भाषाओं में अनुवादित हो चुकी हैं ।

           -उन्होंने हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से ही मनोविज्ञान और दर्शनशास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद ‘ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर में पीएचडी कर रखी है ।

           -बेन को दुनिया भर में मोटिवेशनल लेक्चर के लिए आमंत्रित किया जाता है...वो लीडरशिप, शिक्षा, मूल्यों, खुशी, आत्म सम्मान, लक्ष्य निर्धारण, लचीलेपन, ऊर्जावान मस्तिष्क आदि विषयों पर समान अधिकार के साथ बोलते हैं ।

           -यू ट्यूब पर उनके मोटिवेशनल वीडियो भी दुनिया भर में देखे जाते हैं ।

          -2011 में बेन ने एंगस रिगवे के साथ ‘पोटेंशियालाइफ’ की स्थापना की....इसका मकसद दुनिया को खुशहाली के विज्ञान से समृद्ध करना है.

 चलिए अब लौटते हैं हैप्पीनेस गुरु की 14 टिप्स पर-

1.  ईश्वर का आभार
           आपके पास जो कुछ भी है उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त कीजिए...अपने जीवन की 10 उन चीज़ों को कागज़ पर लिखिए जो आपको खुशी देती हैं...सिर्फ अच्छी चीज़ों पर केंद्रित करें...

2.  30 मिनट का शारीरिक श्रम
           शारीरिक श्रम या व्यायाम का अभ्यास कीजिए...विशेषज्ञों का कहना है कि व्यायाम से मूड बेहतर होता है...30 मिनट का व्यायाम दु:ख और दबाव की सबसे अच्छी काट है...
 
3.  नाश्ता
           कुछ लोग समय की कमी या वजन बढ़ने की आशंका के चलते नाश्ता नहीं करते...अध्ययन से ये प्रमाणित हुआ है कि नाश्ता आपको ऊर्जा देता है जो आपके सोचने की शक्ति को बेहतर करता है और आपको सफलतापूर्वक अपनी गतिविधियों को संपन्न करने में सहायक होता है...

4.  मुखर होना
           आप जो चाहते हैं उसके लिए कहिए...आप जो सोचते हैं उसे कहिए...मुखर होना आपके आत्म-सम्मान को बेहतर करेगा...अलग थलग और ख़ामोश रहने से दुख और नाउम्मीदी बढ़ती है...

5.  अनुभवों पर निवेश
           अनुभवों पर धन खर्च करो...एक अध्ययन बताता है कि 75 फ़ीसदी लोग जब यात्रा, कोर्स या ट्रेनिंग पर अपने पैसे का निवेश करते हैं तो उन्हें खुशी महसूस होती है...बाक़ी सिर्फ 25 फ़ीसदी का मानना था कि जब वे चीज़ें खरीदते हैं तो उन्हें प्रसन्नता मिलती है.

6.  चुनौतियों का सामना करना सीखें
           अध्ययन बताते हैं कि जब आप किसी चीज़ को जितना आगे के लिए लटकाए रखते हैं उतना ही वो आपकी बेचैनी और तनाव को बढ़ाता है...हर हफ्ते कुछ कामों का लक्ष्य तय कर एक छोटी लिस्ट पर लिखिए और उन्हें यथाशक्ति पूरा करने की कोशिश कीजिए...

7.  खुशनुमा यादों को सहेजें
           अपने आसपास जीवन के सभी यादगार पलों को तस्वीरों,  संदेशों के माध्यम से सहेज कर रखिए...इन्हें कंप्यूटर, डेस्क, कमरे, फ्रिज आदि सभी जगह किया जा सकता है...खूबसूरत यादों से भरी ज़िंदगी...

8.  मुस्कान ही काफ़ी
           दूसरों का अभिवादन कीजिए...यथा संभव सभी से अच्छा बना रहने की कोशिश कीजिए...सिर्फ़ एक प्यारी सी मुस्कान से किसी का मूड बदला जा सकता है

9.  जूतों से मूड का नाता
           आरामदायक जूते पहनिए...अगर आपका पैर आपको तकलीफ़ देता है तो आप मूडी हो जाते हैं...ये कहना है अमेरिकी ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ केंथ वापनर का...

10.  उठने-बैठने. चलने-फिरने का अंदाज़
           सीधा चलिए और अपने कंधों को थोड़ा पीछे की तरफ रखिए...ये आत्मविश्वास की पहचान है...शरीर को ढीला छोड़ कर रखने से आपको गंभीरता से लिए जाने की संभावना कम होती है...

11.  संगीत से आनंद
           ये साबित हुआ है कि संगीत सुनने से आप गाने के लिए प्रेरित होते हैं...ये आपको आनंदित करता है...

12.  खान-पान का असर
           अपने भोजन का नागा मत कीजिए...हर 3-4 घंटे बाद कुछ हल्का खाइए...अपने ग्लूकोज़ लेवल को स्थिर रखिए, ज़्यादा मैदा और चीनी से बचिए, जो भी चीज़ स्वास्थ्यवर्धक हैं उन्हें बदल बदल कर खाइए ।

13.  अपनी फ़िक़्र कीजिए और स्मार्ट दिखिए
           70  फ़ीसदी लोगों का मानना है कि वे जब समझते हैं कि आकर्षक दिख रहे हैं तो आनंदित अनुभव करते हैं....

14.  उत्साह के साथ आस्था
           भगवान में अगर आपका विश्वास है तो उसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, अगर आप नास्तिक हैं तो अनास्था में भी एक तरह का आपका विश्वास ही होता है ।

अंत में सौ बातों की एक बात...
           खुशी एक रिमोट कंट्रोल की तरह है, जिसे हम अक्सर गुमा देते हैं, कई बार इसे ढूंढते-ढूंढते हम दीवानगी की हद तक पहुंच जाते हैं, बिना ये जानें कि हम उसी के ऊपर बैठे हुए हैं ।

It is very simple to be happy but it is very difficult to be simple...

        

11.2.17

आपके हाथ की उंगलियां और आप.


          जैसा कि तस्वीर मे दिखाया गया है उस से आपको हाथ की उंगलियों के नाम पता चल गये होंगे ।

सबसे पहले तर्जनी की बात...
           अगर यह उंगली सीधी है, कहीं से भी टेडापन नहीं है और ना ही इस उंगली का झुकाव मध्यमा की तरफ या अंगूठे की तरफ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति इरादे का पक्का, बुलंदी को छुने का इरादा रखने वाला और दूसरों पर राज़ करने वाला होना चाहिये ।

फिर मध्यमा की बात...
           अगर यह उंगली सीधी है, कहीं से भी टेडापन नहीं है और ना ही इस उंगली का झुकाव अनामिका की तरफ या तर्जनी की तरफ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति सन्यास / उदासी को पसंद करने वाला - अलग थलग रहने का आदि और भीड़ में/घर परिवार मे घुलमिल कर न रहने वाला होना चाहिये ।

 अब अनामिका की बात...
          
अगर यह उंगली सीधी है, कहीं से भी टेढापन नहीं है और ना ही इस उंगली का झुकाव मध्यमा या कनिष्का की तरफ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति अपने हाथ की / से कमाई करने वाला, उसके पास कोई ना कोई हुनर होगा जिस से वो कमाई कर रहा होगा । खुद भी हाथ से काम करके खुश होगा / हाथ से काम करना पसंद करेगा ।

अब कनिष्का / कनिष्ठ की बात...
          
अगर यह उंगली सीधी है, कहीं से भी टेढापन नहीं है और ना ही इस उंगली का झुकाव अनामिका की तरफ हो रहा हो तो ऐसा व्यक्ति बोलने मे माहिर ( तर्क शक्ति का होना ) और दिमागी तौर पर बलवान होना चाहिये ।

          
सीधी उंगलियों के बारे जानने के बाद अब झुकाव किस तरफ है उंगली का और उसका क्या असर होगा यह समझते हैं ।

         
अगर सभी उंगलियों का झुकाव तर्जनी की तरफ हो रहा है तो ऐसा व्यक्ति पक्के इरादे वाला, आज़ाद तबियत का मालिक और कभी भी हौसला ना हारने वाला होगा ।
  
          अगर तर्जनी का झुकाव मध्यमा की तरफ हो जाये तो जो उपर लिखा है उसके उल्ट प्रभाव वाला होना चाहिये ।

         
अगर सभी उंगलियों का झुकाव मध्यमा कि तरफ हो जाये तो उदासी और अकेलेपन का आदि होगा ।

         
अगर मध्यमा का झुकाव तर्जनी की तरफ हो तो दुनिया को छोड़ देने का ख्याल और बेकार के ख्यालों में खोये रहने वाली उदासी का मालिक होगा ।

         
अगर मध्यमा का झुकाव अनामिका की तरफ हो तो एक क्षण में खुश और दूसरे ही क्षण उदास टाईप की अजीबो गरीब तबियत का मालिक होगा ।

         
अगर अनामिका का झुकाव मध्यमा की तरफ हो जाये तो शोहरत चाहने वाला होगा जो कि थोड़ी बहुत मिल भी सकती है ।

         
अगर अनामिका का झुकाव कनिष्का / कनिष्ठ की तरफ हो तो हाथ से काम करने वाला, व्यापारी और पैसे का पीर होगा, हो सकता है कि ऐसे व्यक्ति को पैसे से ज़्यादा किसी से प्यार न हो ।

         
अगर कनिष्का/कनिष्ठ उंगली का झुकाव अनामिका की तरफ हो तो दिमागी ताकत का मालिक और हाथ के काम से लाभ उठाना जानता होगा ।
 
 

8.2.17

अगली शताब्दी में जीवन...


           सन् 2095 यानि आज से लगभग 79 साल बाद...

         
रितेश अपने कमरे में चुपचाप गुमसुम सा बैठा है, तभी मम्मी की तरंगे कैच होने लगती है (उस समय तक शायद मोबाईल म्यूज़ियम में पहुंच जावेंगे और ऐसे छोटे-छोटे ऊँगलियों में फिट होने वाले गेजेट्स आ जायेंगे जिनका बटन ऑन करने के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सोचेंगे उस से मानसिक तरंगो से बात होना शुरू हो जाएगी जैसे अभी मोबाईल से होती है ।
 
          
रितेश हलो मम्मी ...कैसी है आप ?

         
मम्मी--ठीक हूँ बेटा... तू बता अभी अमेरिका में धूप निकली की नही  ?

         
रितेश--नही मम्मी अभी कहाँ... करीब दो महीने तो हो गए... अभी तो अन्धेरा ही है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी हुई है की अभी एक महीने और सूरज निकलने के आसार नही है ।

         
मम्मी--हूँsss यहाँ भी स्थिति ठीक नही है...  पिछले एक महीने से सूरज ढल ही नही रहा...  85 डिग्री सेल्सियस तापमान बना हुआ है... भयंकर पराबैंगनी किरणे फैली हुई है... कल ही पडौस वाले जोशीजी का मांस पिघल कर गिरने लगा था... वो अभी भी I.C.U  में भर्ती है ।

         
रितेश--ओह्ह...  तो क्या उन्होंने घर पे ओजोन कवर नही लगा रखा है ?

         
मम्मी--घर पर तो लगवा रखा है पर उनकी कार का ओजोन कवर थोडा पुराना हो गया था इसलिए... उसमें छेद हो गया और पराबैंगनी किरणें उनकी बॉडी से टच हो गई थी ।

       
रितेश--अच्छा मम्मी आपने सुना इधर एक बड़ी घटना हो गई... परसों अमेरिका के किसी कस्बे में एक पौधा पाया गया... पूरी दुनिया में अफरातफरी मच गई । दुनिया भर के वैज्ञानिक वहाँ इकठ्ठा हो गए, काफी रिसर्च चल रही है, आखिर दुनिया में एक वनस्पति दिखाई देना बहुत बड़ी बात है ।

         
मम्मी--अच्छा बेटा तू टाईम से अपने भोजन के केप्सूल तो लेता है ना ? और हाँ- वो पानी वाले केप्सूल लेना मत भूलना, वरना तेरी तबियत खराब हो जाएगी और टाईम से ऑक्सीजन लेते रहना बेटा, तेरे पापा ने एक बार ऑक्सीजन लेने में लापरवाही कर दी थी तो पूरे फेफड़े ही बदलवाने पड़ गए... तू तो जानता ही है की अच्छे वाले फेफड़े कितने महंगे हो गए है...।

         
रितेश:---मम्मी अभी  बजाज के फेफड़े लांच होने वाले हैं जो किमत में काफी कम है और सर्विस होंडा के फेफड़ो जैसी ही रहेगी । और हां मम्मी आप भी याद रखना घर में तीन चार लिवर एक्स्ट्रा रखा करो..... यूं भी दादाजी को हर तीन महीने में नया लिवर लगता ही है, एकाध एक्स्ट्रा भी रहना चाहिए कब रात-बिरात जरूरत पड़ जाए ।

         
अभी हमें यह मजाक लग सकता है, पर अपनी आने वाली पीढ़ी को यदि इन परिस्थितियों से बचाना है तो हमें  इसके लिये ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने ही होंगे और अपने दोस्तों/रिश्तेदारों/कलिग्स को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा ।

4.2.17

तब से अब तक...!



            एक राजा को मलाई रबड़ी खाने का शौक था । उसे रात में सोने से पहले मलाई रबड़ी खाए बिना नींद नहीं आती थी ।  इसके लिए राजा ने एक नौकर को रोजाना चार आने की मलाई लाने की ड्यूटी दे दी । यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा ।

           
कुछ समय बाद खजांची को शक हुआ कि कहीं  नौकर चार आने की मलाई में गड़बड़ तो नहीं कर रहा । उसने चुपचाप नौकर पर नजर रखनी शुरू की तो देखा कि नौकर केवल तीन आने की मलाई लाता है और एक आना बचा लेता है । अपनी चोरी पकड़ी जाने पर नौकर ने खजांची को एक आने की रिश्वत देना शुरू कर दिया अब राजा को दो आने की मलाई रबड़ी मिलती जिसे वह चार आने की समझ कर खाता ।

           
कुछ दिन बाद राजा को शक हुआ कि मलाई की मात्रा में कमी हो रही है । राजा ने अपने खास मंत्री को अपनी शंका बतलाई और असलियत पता करने को कहा- मंत्री ने पूछताछ शुरू की तो खजांची ने एक आने का प्रस्ताव मंत्री को भी दे दिया ।

           
अब हालात ये हुए कि नौकर को केवल दो आने मिलते जिसमें से एक आना नौकर रख लेता और एक आने की मलाई रबड़ी राजा के लिए ले जाता । कुछ दिन गुजरने पर हलवाई जिसकी दुकान से रोजाना मलाई रबड़ी जाती थी उसे संदेह हुआ कि पहले तीन आने की मलाई जाती थी अब घटते घटते एक आने की रह गई ।

           
हलवाई ने नौकर को पूछना शुरू किया और राजा को बतलाने की धमकी दी । नौकर ने पूरी बात खजांची को बतलाई और खजांची ने मंत्री को । अंत में यह तय हुआ कि एक आना हलवाई को भी दे दिया जाये । अब समस्या यह हुई कि मलाई कहां से आएगी और राजा को क्या बताया जाएगा, इसकी जिम्मेदारी मंत्री ने ले ली ।

           
इस घटना के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि राजा को मलाई की प्रतीक्षा करते-करते नींद आ गयी । उसी समय मंत्री ने राजा की मूछों पर सफेद चाक (खड़िया) का घोल लगा दिया । अगले दिन राजा ने उठते ही नौकर को बुलाया तो मंत्री और खजांची भी दौड़े आए । राजा ने पूछा -कल मलाई क्यों नही लाये ?
             
     नौकर ने खजांची और मंत्री की ओर देखा.... तभी मंत्री बोला - हुजर यह लाया था,  आप सो गए थे  इसलिए मैने आपको सोते में ही खिला दी थी ।  देखिए अभी तक भी आपकी मूछों में लगी है । यह कहकर उसने राजा को आईना दिखाया । मूछों पर लगी सफेदी को देखकर राजा को विश्वास हो गया कि उसने मलाई खाई थी । 

           
अब यह रोज का क्रम हो गया, खजाने से पैसे निकलते और बंट जाते, राजा के मुंह पर सफेदी लग जाती ।

           
यह कहानी आज के समय में  भी एक दम फिट है । आप कल्पना करें कि- आम जनता राजा है,  मंत्री हमारे नेता हैं और अधिकारी व ठेकेदार ये खजांची और हलवाई हैं । पैसा भले कामों के लिए निकलता है और आम आदमी को चूना दिखाकर बहला दिया जाता है ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...