8.2.17

आने वाला कल...


           सन् 2095 यानि आज से लगभग 79 साल बाद...

          रितेश अपने कमरे में चुपचाप गुमसुम सा बैठा है, तभी मम्मी की तरंगे कैच होने लगती है (उस समय तक शायद मोबाईल म्यूज़ियम में पहुंच जावेंगे और ऐसे छोटे-छोटे ऊँगलियों में फिट होने वाले गेजेट्स आ जायेंगे जिनका बटन ऑन करने के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सोचेंगे उस से मानसिक तरंगो से बात होना शुरू हो जाएगी जैसे अभी मोबाईल से होती है ।

 
           रितेश हलो मम्मी ...कैसी है आप ?


          मम्मी--ठीक हूँ बेटा... तू बता अभी अमेरिका में धूप निकली की नही  ?


          रितेश--नही मम्मी अभी कहाँ... करीब दो महीने तो हो गए... अभी तो अन्धेरा ही है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी हुई है की अभी एक महीने और सूरज निकलने के आसार नही है ।


          मम्मी--हूँsss यहाँ भी स्थिति ठीक नही है...  पिछले एक महीने से सूरज ढल ही नही रहा...  85 डिग्री सेल्सियस तापमान बना हुआ है... भयंकर पराबैंगनी किरणे फैली हुई है... कल ही पडौस वाले जोशीजी का मांस पिघल कर गिरने लगा था... वो अभी भी I.C.U  में भर्ती है ।


          रितेश--ओह्ह...  तो क्या उन्होंने घर पे ओजोन कवर नही लगा रखा है ?


          मम्मी--घर पर
तो लगवा रखा है पर उनकी कार का ओजोन कवर थोडा पुराना हो गया था इसलिए... उसमें छेद हो गया और पराबैंगनी किरणें उनकी बॉडी से टच हो गई थी ।

        रितेश--अच्छा मम्मी आपने सुना इधर एक बड़ी घटना हो गई... परसों अमेरिका के किसी कस्बे में एक पौधा पाया गया... पूरी दुनिया में अफरातफरी मच गई । दुनिया भर के वैज्ञानिक वहाँ इकठ्ठा हो गए, काफी रिसर्च चल रही है, आखिर दुनिया में एक वनस्पति दिखाई देना बहुत बड़ी बात है ।


          मम्मी--अच्छा बेटा तू टाईम से अपने भोजन के केप्सूल तो लेता है ना ? और हाँ- वो पानी वाले केप्सूल लेना मत भूलना, वरना तेरी तबियत खराब हो जाएगी और टाईम से ऑक्सीजन लेते रहना बेटा, तेरे पापा ने एक बार ऑक्सीजन लेने में लापरवाही कर दी थी तो पूरे फेफड़े ही बदलवाने पड़ गए... तू तो जानता ही है की अच्छे वाले फेफड़े कितने महंगे हो गए है...।


          रितेश:---मम्मी अभी  बजाज के फेफड़े लांच होने वाले हैं जो किमत में काफी कम है और सर्विस होंडा के फेफड़ो जैसी ही रहेगी । और हां मम्मी आप भी याद रखना घर में तीन चार लिवर एक्स्ट्रा रखा करो..... यूं भी दादाजी को हर तीन महीने में नया लिवर लगता ही है, एकाध एक्स्ट्रा भी रहना चाहिए कब रात-बिरात जरूरत पड़ जाए ।


          अभी हमें यह मजाक लग सकता है, पर अपनी आने वाली पीढ़ी को यदि इन परिस्थितियों से बचाना है तो हमें  इसके लिये ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने ही होंगे और अपने दोस्तों/रिश्तेदारों/कलिग्स को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा ।



4 टिप्पणियाँ:

kuldeep thakur ने कहा…

दिनांक 09/02/2017 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
आप भी इस प्रस्तुति में....
सादर आमंत्रित हैं...

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - जगजीत सिंह जी की 76वीं जयंती में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया।

savan kumar ने कहा…

आने वाले कल का अच्छा चित्र खिचा हैं आपने
http://savanxxx.blogspot.in

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