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7.4.20

ये समय बडा बलवान – उचित-अनुचित का रखें ध्यान...


इस समय एकांत में रहें
इस समय
          वर्तमान समय में Covid-19 रुपी जिस महामारी का यह असुर न सिर्फ हमारे घर, शहर व देश बल्कि पूरी दुनिया का अस्तित्व निगल जाने की ओर तेज गति से दौड रहा है । इससे हमारे स्वयं के व अपने परिवार के जीवन के साथ ही अपने मित्र-परिचित व समूचि मानवता को बचाने की दिशा में जो सजगता देश-दुनिया के सभी नागरिकों के लिये आवश्यक रुप से सामने दिख रही है वह है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और वे हजारों लाखों लोग जो किसी भी कारण से इस रोग की गिरफ्त में आ चुके हैं उनके जीवन को बचाने की दिशा में युद्ध स्तर पर प्रयासों को अनवरत बनाये रखना ।

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इस समय की आवश्यकता

      इस समय समूचि मानवता को निगल जाने को तैयार ये कोरोना रुपी दैत्य जितनी तेजी से जन सामान्य में अपनी पैठ बनाता जा रहा है उतना ही इसे परास्त कर पाना कठिन होता जा रहा है । फिर भी इस समय हमें अपने उन रक्षकों का निरन्तर आभार प्रकट करते रहना आवश्यक है जो अस्पतालों में डॉक्टर व नर्स के रुप में स्वयं को इस संक्रमण के जोखिम में रखने के बावजूद इसके मरीजों को मृत्यु के मुख से बचाने के प्रयास में अपना घर-परिवार व नींद-भोजन जैसी अनिवार्य आवश्यकताओं को भूलकर सतत अपने कर्तव्यों में जुटे हुए हैं ।

इस समय के भगवान
इस समय के भगवान
      फिर वे पुलिसकर्मी जो इन्हीं खतरनाक परिस्थितियों में स्वयं को संक्रमण की जोखम के बीच रखकर चौवीसों घंटे हमें हमारे घरों में सुरक्षित रखने की कवायद में भूखे-प्यासे व उनींदी अवस्था में रहकर भी जुटे हुए हैं और वे सफाईकर्मी भी जो इन तमाम संक्रमित क्षेत्रों में अपनी जान-जोखिम में डालकर क्षेत्र की साफ-सफाई में इस योजना के मुताबिक लगे हुए हैं कि किसी भी प्रकार की गंदगी के रहते इस महामारी का संकट और अधिक ना बढ पावे । इन सबके अलावा वे सभी लोग जो प्रशासनिक मशीनरी से जुडे रहकर हमारे लिये उपयोगी व आवश्यक नीतियां बनाने में अनथक रुप से लगे हुए हैं, हमें विर्विवाद रुप से इन सभी के प्रति कृतज्ञ बने रहने की आवश्यकता है ।

समय के दुश्मन

      किंतु कुछ विघ्न संतोषी लोग न जाने किस कारण से वर्तमान समय में मानवता के इन रक्षक वर्ग पर सामूहिक हमले करके इनके इस बचाव अभियान को पीछे धकेलने के घृणित कार्य में लगे हैं जिसकी सूचना हम अपने समाचार पत्रों में वॉट्सएप वीडीओ क्लिपिंग में और दूरदर्शन के माध्यम से अक्सर देख रहे हैं । अपने ऐसे कृत्यों के द्वारा ये लोग इस नाजुक समय में अपना कौनसा औचित्य साधने में लगे हैं यह बात समझ से परे है क्योंकि इन गल्तियों का सबसे बडा खामियाजा सबसे पहले तो इन्हें ही इनके परिजनों व क्षेत्रवासियों के साथ भुगतना पड रहा है ।

इस समय कोरोना दैत्य
कोरोना दैत्य

      यदि मैं बात अपने शहर इन्दौर की करुं तो पिछले चार वर्षों से हर वर्ष पूरे देश में सफाई के क्षेत्र में नंबर 1 पर काबिज इसी शहर में पिछले दिनों एक क्षेत्रिय बस्ती में डॉक्टरों के साथ मारपीट करके उन्हें भगाया गया जिसकी चर्चा उस दिन पूरे देश के राष्ट्रीय चैनलों तक पर दिन भर चलती रही । फिर कल भोपाल शहर में सडकों पर अनावश्यक रुप से घूमते लोगों को रोकने का प्रयास करते पुलिसकर्मियों पर प्राणघातक हमला किया गया ।
      ऐसे ही कहीं सफाई कर्मियों को अपनी ड्यूटी के दौरान काम न करने देने के लिये धौंस-दपट व मारपीट कर भगाया जा रहा है तो कहीं किसी विशेष जमात के लोगों द्वारा संक्रमित अवस्था में होने के वावजूद डॉक्टरों पर, चिकित्सा परिसरों में व सडकों पर जानबूझकर थूक कर संक्रमण बढाने का दुर्भावनापूर्ण कार्य किया जा रहा है, नर्सों पर भद्दे व अश्लील कमेंट कर उनका मनोबल तोडने का प्रयास किया जा रहा है ।

      आखिर इस नाजुक समय में जब अधिक से अधिक एकजुटता के साथ इस महामारी को सबके सहयोग से परास्त करना समूची मानव जाति के लिये आवश्यक दिख रहा है तब किसी भी वर्ग द्वारा ऐसी कोशिशें क्या उन्हें मानवता के दुश्मन के रुप में प्रदर्शित नहीं कर रही है ।

      जब देश के प्रधानमंत्री समाज के सभी वर्ग के धर्मगुरुओं से भी ये अपील कर रहे हैं कि वे सभी अपने-अपने दायरे में अपने अनुयायियों को संयमित रहकर इस महामारी का मुकाबला करने के लिये एकजुटता के साथ प्रेरित करें, तब ये कौनसा वर्ग है जो ऐसे मानवता विरोधी कार्यों में अपना हित तलाश रहा है ?

      बहुत संभव है कि पर्दे के पीछे इन्हें उकसाकर अपना मंतव्य साधने की कोई चाल इनके मार्गदर्शक अगुवाओं की रही हो किंतु मोहरा बने ये लोग तो चढजा बेटा सूली पे, भला करेंगे राम की तर्ज पर सूली पर ही चढ रहे हैं, सबसे पहले इनके साथ ही इनके परिवार के लिये कोरोना संक्रमण मौत के सौदागर के रुप में मुंहबाये खडा है फिर इनकी इस घिनौनी कारगुजारियों के लिये सरकार की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की गिरफ्त में बरसों-बरस जेल में गुजारने के रास्ते बन रहे हैं और अंत में शेष जीवन के लिये संभ्रांत समाज में इन्हें तिरस्कार भी झेलना ही है ।

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     संभव है कि इस संकटकालीन समय में आपके समक्ष परिवार के लालन-पालन में कई ज्ञात-अज्ञात अडचनें आती दिख रही हों किंतु फिर भी ऐसे संकट के इस समय में किसी भी कमी अथवा बेबसी के कारण ऐसे विघ्नसंतोषियों के भ्रामक बहकावे में न आवें और ऐसे किसी भी कार्य में अपना योगदान देने से बचें जो अंततः आपके लिये, आपके प्रिय परिजनों के लिये और आपके मित्रों-परिचितों को मौत के मुंह में धकेलने का माध्यम बने ।

अंत में महाभारत के समय के प्रसंगानुसार-

      महाभारत युद्ध के पहले भगवान श्रीकृष्ण के पास दुर्योधन और अर्जुन जाते हैं क्यूँकि एक दिन पहले उन्हें भगवान श्रीकृष्ण कह चुके होते हैं कि नींद से मेरी आँख खुलने पर जिस पर मेरी नज़र पहले जाएगी,  उसे जो चाहिए वो पहले उसे मिलेगा । सबसे पहले भगवान की नज़र पैरों के पास खडे अर्जुन पर जाती है और अर्जुन भगवान का साथ माँग लेते हैं जबकि दुर्योधन उनकी पूरी सेनाबल के साथ सभी लड़ाकू हथियार मांगता है और दोनों को उनकी वांछित वस्तु मिल जाती है । लेकिन अंत में क्या हुआ, श्रीकृष्ण का साथ जिनके साथ था उन्ही अर्जुन व पांडव की विजय हुई और इतने विशाल सैन्यबल के बावजूद कोरवों सहित दुर्योधन को हार का मुंह ही देखना पडा । 

इस समय बचाव के लिये
इस समय बचाव हेतु आवश्यक
      अर्थात अधिक भीड़ जुटाकर भी आततायी जीत नहीं सकते जबकि कोई अकेला व्यक्ति ही आपकी जीत का मुख्य सारथी बन सकता है और हम देख रहे हैं कि इस समय हमारे मुख्य सारथी प्रधानमंत्री के रुप में इस युद्ध में कदम-कदम पर हम सभी का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं । अतः हम इनके निर्देशन में स्वयं भी सुरक्षित रहें और अपने परिवार, नगर व देश को भी सुरक्षित रहने में अपना अमूल्य योगदान दें ।
धन्यवाद सहित... 

27.3.20

कोरोना वायरस – ज्योतिषिय नजरिया...

कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

       कुछ समय पूर्व मैंने अपने ब्लॉग स्वास्थ्य सुख में दि. 29 जनवरी 2020 को कोरोना वायरस से सम्बन्धित पोस्ट “Corona Virus कोरोना वायरस का कहर दिन-ब-दिन बढ रहा है...”  तब डाली थी जब इसका प्रसार शुरु हुआ था व सिर्फ चीन के वुहान शहर में उस वक्त इसने तबाही की शुरुआत की ही थी । तब 4500 लोग चीन के वुहान शहर में संक्रमित हुए थे और उसमें मात्र 106 लोगों ने ही अपनी जान गंवाई थी ।

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निरन्तर बढ रहा कोरोना वायरस का प्रकोप

       कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि तबसे अब तक इसके बढते प्रकोप ने समूचे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है और मात्र दो माह से भी कम समय में आज दि. 27 मार्च 2020 तक समूचे विश्व में इसके 5,10,646 संक्रमित केस दिख रहे हैं । अब तक 1,22,245 लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं और विश्व की एक तिहाई से भी अधिक आबादी लॉकडाऊन की गिरफ्त में फंसकर अपने काम-धंधे छोडकर घरों में बंद रहने को मजबूर हो चुकी है ।

भारत में कोरोना वायरस

       यदि बात हमारे देश भारत के संदर्भ में की जावे तो स्थिति फिलहाल थोडी कम खतरनाक दिख रही है क्योंकि दुनिया की तुलना में यहाँ आज इस समय तक 755 संक्रमित रोगी दिख रहे हैं । इनमें 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी की दूरदर्शिता के कारण स्थिति विस्फोटक होने के पूर्व ही इसके फैलाव से बचाव के लिये आवश्यक सोशल डिस्टेंस को मैनेज करने हेतु समूचा भारत इस समय 21 दिनों के लॉकडाऊन दौर से गुजर रहा है ।

       इसके बावजूद भी कब और कहाँ तक इसका फैलाव जाकर रुकेगा यह कोई नहीं जानता । लोगों में किस सीमा तक इसका खौफ भर गया है यह हम इसीसे समझ सकते हैं कि अपने परिजनों को भी सामने देखकर हर कोई यह सोचकर आशंकित दिख रहा है कि कहीं ये संक्रमित तो नहीं हो चुके हैं क्योंकि संक्रमित व्यक्ति में कोई भी लक्षण उभरे उसके पहले ही वो कईयों को संक्रमित करते फिर रहे हैं ।


ज्योतिष नजरिये से कोरोना वायरस

       ऐसी स्थिति में एक विकल्प ज्योतिष नजरिये का सामने आ रहा है जो यह बता रहा है कि जब-जब शनि 30 वर्ष बाद बली होकर अपने गृह मकर राशि में आते हैं तब-तब इस प्रकार की आपदाएँ पृथ्वी पर दिखने में आती रही हैं । अब इस धारणा को ऐतिहासिक तथ्यों में देखें-

        ईसवी सन 165 में जब शनि मकर में प्रविष्ट हुए थे  तब इतालवी प्रायद्वीप में चेचक के संक्रमण से पांच लाख लोगों की मृत्यु हुई थी ।

       सन 252 में जब शनि मकर में पहुंचे तो बताया जाता है कि ‘प्लेग ऑफ साइप्रियन’ के प्रकोप से रोम में महीनों तक हर रोज औसतन 5,000 लोगों की मृत्यु होती रही थी ।

       वर्ष 547 में जब शनि अपनी स्वराशि मकर में पहुंचे तब मिस्र से बूबोनिक प्लेग फैला जिसे ‘प्लेग ऑफ जस्टिनियन’ कहा गया जो वहाँ से फैलते हुए एक ऐतिहासिक शहर कुस्तुनतुनिया पहुंच गया जो रोमन बाइजेंटाइन और उस्मानी साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी । बाइजेंटीनी इतिहास लेखक प्रोसोपियस के अनुसार तब प्रतिदिन 10,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी ।

       1312 में जब शनि ने अपने घर मकर में पांव रखा तब  यूरोप से प्लेग ने वापसी की और इसके कहर से दुनिया भर में 7.5 करोड़ लोगों के मरने का अनुमान लगाया गया, जिसे ब्लैक डेथ कहा गया ।

       फिर प्लेग से 1344 से 1348 के बीच भूमध्य सागर और पश्चिमी यूरोप तक दो-तीन करोड़ यूरोपियों के मरने का अनुमान था, जो उनकी कुल जनसंख्या का एक तिहाई हिस्सा था तब भी शनिदेव स्वराशि मकर में ही थे ।

       1666 का ग्रेट प्लेग ऑफ लंदन तब एक लाख लोगों की मौत का कारण बना था जो तब लंदन की 20 प्रतिशत आबादी थी, शनि तब भी अपनी राशि मकर में ही थे ।

       19वीं सदी के मध्य में चीन से तीसरी वैश्विक महामारी ने सिर उठाया, जिससे केवल भारत में एक करोड़ लोगों की मौत हो गयी थी ।

       1902 में अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को से शुरू होकर वहां पहली बार प्लेग का कहर बरपा । तब भी शनि अपनी ही गृहराशि मकर में थे ।

       यहां तक कि गुजरात के सूरत में जब 1994 में प्लेग की आफत आयी, तब भी शनि अपनी ही राशि में थे ।

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       इस समय भी शनि स्वयं की राशि मकर में चक्रमण कर रहे हैं । जो अब इस मारक महामारी का मुख्य कारक बन गया है, जिसे कोरोना वाइरस Covid-19 कहा जा रहा है । लेकिन 22 मार्च 2020 को जब मंगल शनि की राशि मकर में चरण रखेगा तब मानव सभ्यता को और अधिक बेचैन करेगा और तब वो शनि के संग युति करके इस महामारी के साथ कोई और अप्रिय खबर लाएगा । यह योग किसी दुर्घटना के साथ प्राकृतिक आपदा से जान-माल की हानि का संकेत दे रहा है । लेकिन 29 मार्च 2020 की शाम 7 बजकर 8 मिनट पर वृहस्पति (गुरु) का मकर राशि में प्रवेश शनि-मंगल के इस उबाल पर पानी डाल इसे ठंडा कर देगा ।

       शनि-गुरु की यह युति आज के डरावने परिदृश्य में ठंडी हवा की झोंके की तरह आएगी और इस महामारी की मारक तासीर में मरहम का रुप लेकर कमी कर पाएगी । फिर 4 मई 2020 की शाम 7 बजकर 59 मिनट पर जब मंगल शनि से मुक्त होकर कुंभ राशि में जाएगा तब विश्व की इस नकारात्मकता में सहसा कमी आएगी और शुभ फलों में इज़ाफ़ा होगा । मई के मध्य तक परिस्थितियाँ बदल जायेंगी । सितारों का संकेत है कि तब इस महामारी का अंत भी हो जाएगा । लेकिन तब तक तो सावधानी ही लोगों के कष्टों में कमी का माध्यम बन पाएगी ।

जैन संत आचार्य ऋषभ विजय जी का ज्योतिष नजरिया 
जो उपरोक्त जानकारी को लगभग पुष्ट करता दिख रहा है-


       यह ज्योतिषिय नजरिया है जो इस ज्ञान के अभाव में यकीनन मेरा नहीं है लेकिन वर्तमान डरावने परिदृष्यों में फिलहाल तो राहत का संकेत देता दिखाई दे रहा है । अब यह कितनी सत्यता साबित कर पाएगा यह तो हमें आने वाला वक्त ही बता पाएगा । 
कोरोना वायरस से बचाव
कोरोना वायरस से बचाव हेतु
       लेकिन तब तक तो हमें हमारी सरकारें व चिकित्सा जगत से जुडे लोग जिन सावधानियों को अपने दैनंदिनी जीवन में रखने का संदेश दे रहे है उनके बताये तरीकों से ही अपने व अपने परिवार के जीवन को सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहना आवश्यक है ।


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