मेहनत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मेहनत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

24.10.19

अपनी नौकरी खुद करें...


           एक चिड़िया का घोंसला एक किसान के खेत में था । एक दिन शाम को जब चिड़िया घोंसले में आयी तो उसके बच्चों ने डरते हुए बताया कि आज किसान और उसका बेटा आपस में बात कर रहे थे कि वह अपने रिश्तेदारों की मदद से कल इस खेत को पूरा काटकर जमीन को समतल कर देंगे और हल चलाकर इसमें बीज भी बो देंगे, फिर वह डरते हुए अपनी मां से बोले कि हमें जल्द ही इस खेत से चला जाना चाहिए । 

          तब उनकी मां हंसते हुए बोली- चिंता की कोई बात नहीं, आराम से सो जाओ कल खेत नहीं कटेगा, अगले दिन हुआ भी ऐसा ही फिर उसी शाम जब चिड़िया वापस लौटी तो फिर उसे बच्चों ने बताया कि किसान अपने बेटे से बात कर रहा था कि कल पक्का अपने खेत की फसल अपने पड़ोसियों की मदद से काट लेंगे, फिर से यह बात सुनकर चिड़िया मुस्कुरायी और बोली- डरो मत, कल भी वे अपनी फसल नहीं काट पाएंगे और आराम से सो गई ।

          अगली सुबह फिर वह दाना लेने के लिए उड़ गई व शाम को आयी तो उस दिन उसके बच्चों ने बोला कि आज किसान अपने बेटे से कह रहा था कि हम खुद ही बिना किसी की मदद के कल सुबह खेत की फसल को काटेंगे और इसमें बीज बो लेंगे, यह सुनते ही चिड़िया गंभीर स्वर में बोली तब तो हमें आज रात ही इस खेत को छोड़कर दूसरे खेत में जाकर रहना होगा और उसी रात अपने बच्चों सहित उस खेत को छोड़कर पास वाले खेत में उसने अपना घोंसला बना लिया और वे सभी वहाँ रहने चले गये ।

          दूसरे दिन उन्होंने देखा कि किसान और उसके बेटे ने बिना किसी दूसरे की मदद के अपने खेत की फसलें काट ली और उसमें हल चलाने लगे ।  यह देखकर उन बच्चों ने आश्चर्य से अपनी मां से पूछा- मां तुम्हें कैसे पता चला कि ये लोग आज फसल काट ही लेंगे तब उस चिड़िया ने उन्हें समझाया कि बेटा जब कोई आदमी किसी दूसरे के भरोसे रह कर अपना काम करवाना चाहता है तो वह काम कभी समय पर नहीं हो पाता, लेकिन जब कोई किसी और पर निर्भर न रहे तो वह अपना कोई भी काम किसी भी समय कर सकता है । अपने काम के लिये दूसरे पर निर्भर रहने वाले का काम कभी भी समय पर नहीं हो पाता और वह हमेशा दुखी ही रहता हैलेकिन जब वह खुद अपने काम को करने की सोच ले तो कठिनाईयों के बाद भी वह अपना काम कर ही लेता है ।

           एक और उदाहरण पिता की मृत्यु के बाद बंटवारे में प्राप्त सम्पत्ति का दो भाईयों में बंटवारा होने के बाद देखने में आया, जब एक भाई अपना सारा खेतों का काम नौकरों पर छोडकर कहता था कि जाओ काम करो, और दूसरा भाई अपने नौकरों के साथ स्वयं खेत पर जाकर कहता था कि आओ काम करें । कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि नौकरों को साथ लेकर जो भाई स्वयं काम कर रहा था उसका काम और सम्पत्ति निरन्तर बढी, जबकि नौकरों पर काम छोडकर जो भाई कहता था कि जाओ काम करो उसका काम और सम्पत्ति दोनों उसके हाथ से निकलती ही चली गई ।

          इसलिये मुद्दे की बात ये है कि यदि आप ठान लें और अपनी पूरी मेहनत और लगन से कोई भी काम करें तो आप असंभव काम को भी पूरा कर सकते हैं, क्योंकि असंभव में ही संभव छुपा हुआ है लेकिन यदि आप दूसरों के भरोसे रहेंगे तो आपका कोई भी काम कभी भी समय पर तो पूरा हो ही नहीं पाएगा, जितने भी लोग इस दुनिया में सफल हुए हैं वह सभी किसी और के भरोसे नहीं बल्कि खुद के दम पर ही सफल हुए हैं, इसलिए हमें सदैव किसी आकस्मिक सुविधा या दूसरों के भरोसे रहने के बजाय अपना काम खुद ही करना चाहिए तब यदि आपकी कोई इच्छा है और उसे अपनी ही मेहनत के बल पर पूरा करने की सोच है तो अवश्य ही वह पूरी होकर रहेगी ।

          यही एकमात्र सिद्धांत जीवन भर किसी के लिये भी सफलता की एकमात्र कुंजी के रुप में काम करता है । 


26.6.16

सामर्थ्य - समय व धैर्य की...


            एक साधु था, वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, "जो चाहोगे सो पाओगे"  "जो चाहोगे सो पाओगे।"

            बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीँ देता था सब उसे पागल समझते थे ।

             एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसने उस साधु की आवाज सुनी-  "जो चाहोगे सो पाओगे"   "जो चाहोगे सो पाओगे।"

            वह आवाज सुनते ही उसके पास चला गया ।

            उसने साधु से पूछा - महाराज आप बोल रहे थे कि
"जो चाहोगे सो पाओगे" ।

            तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैं जो चाहता हूँ ?

            साधु उसकी बात को सुनकर बोला –  हाँ बेटा तुम जो कुछ भी चाहते हो  उसे मैं तुम्हें जरुर दुँगा, बस तुम्हे मेरी बात माननी होगी । लेकिन उसके पहले ये बताओ कि तुम्हे आखिर चाहिये क्या ?

            युवक बोला-
"मेरी एक ही ख्वाहिश है, मैँ हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ ।"

            साधू बोला-
"कोई बात नहीँ, मैं तुम्हे एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे मोती बनाना चाहोगे बना पाओगे ।"

            ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ आदमी की हथेली पर रखते हुए कहा- 
"पुत्र, मैं तुम्हे दुनिया का सबसे अनमोल हीरा दे रहा हूं, लोग इसे ‘समय’ कहते हैं, इसे तेजी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लो और इसे कभी मत गंवाना,  तुम इससे जितने चाहो उतने हीरे बना सकते हो ।"

            युवक अभी कुछ सोच ही रहा था कि साधु उसकी दूसरी हथेली पकड़ते हुए बोला -
"पुत्र, इसे भी पकड़ो, यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लोग इसे “धैर्य” कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम ना मिले, तो इस कीमती मोती को धारण कर लेना, याद रखना जिसके पास यह मोती है, वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है ।"

            युवक गम्भीरता से साधु की बातों पर विचार करते हुए निश्चय करता है कि आज से वह कभी अपना समय बर्बाद नहीं करेगा और हमेशा धैर्य से काम लेगा । 

             ऐसा सोचकर वह हीरों के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम सीखते हुए करना शुरू करता है और अपने मेहनत और ईमानदारी के बल पर एक दिन खुद भी हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बन जाता है ।

            मित्रो- ‘समय’ और ‘धैर्य’ वह दो हीरे-मोती हैं जिनके बल पर हम बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं । अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय को बर्वाद ना करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए हमेशा धैर्य से काम लें । हमारे बुजुर्गों ने भी अपने शब्दों में धीरज का महत्व हमें इस प्रकार समझाने का प्रयास किया है-


धीरे-धीरे  रे मना,  धीरे  सब  कुछ  होय,
माली सींचे सौ घडा, ऋुत आये फल होय ।



Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...