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3.10.19

+55 की उम्र में...



              यदि आपकी उम्र +55 हो चुकी है तो ये समझना आपके ही लिये सबसे अधिक आवश्यक है कि आपकी आगे की जिन्दगी शांत और आनंददायक तरीके से कैसे बीते-


          अपने वर्किंग जीवन में आपका पद या ओहदा चाहे कुछ भी क्यों न रहा हो, रिटायरमेंट के करीब या बाद के जीवन में बहू-बेटों की अनावश्यक बातों को नजरअन्दाज करना प्रारम्भ कर दें । जितना भी आप उनकी आपस की बातों में दखल देने का प्रयास करेंगे, उतना ही उनके द्वारा आपका अनादर हो सकने की सम्भावना बढती जावेगी जिससे अंततः आपको दुःख ही होगा । इसलिये छोटे-बडे, बेटे-बहू, बेटी-जंवाई, नाती-पोतों सभी को उनके हिसाब से ही जीने दें । विशेष रुप से तब जबकी उनके किसी भी खर्चे का आप पर कोई दारोमदार न आ रहा हो । 

          जब तक वे आपसे कुछ राय-मशवरा न करना चाहें उन्हें कभी भी कुछ भी सिखाने- समझाने की कोशिश न करें । यदि कभी वे आपके सामने भी किसी काम को गलत तरीके से कर रहे हैं तब भी अपने दिल पर पत्थर रखकर देखते रहें, समय भले ही अधिक लगेगा लेकिन गलती के परिणामों को देखने व भुगतने के बाद वे स्वयं ही किसी भी काम को सही करना भी अपने-आप सीख जावेंगे ।

         पोती-पोतों के साथ भी अपनी बहुओं के स्वभाव के मुताबिक ही प्यार-स्नेह के रिश्तों को निभाएं । उन्हे भी अपनी ओर से आगे बढकर ज्ञान या शिक्षा देने का प्रयास न करें । कई बार इस कोशिश में आपको अपना मन मारने का दुःख भी महसूस करना पड सकता है, किंतु फिर भी अपने उस दुःख को अभिव्यक्त करने की कोशिश ना करें, इससे आप मेले-झमेले जैसे माहौल में भी अपने मन की आत्मिक शांति को बरकरार रखते हुए अपना शेष जीवन जी सकते हैं । 

          बहुत ज्यादा न सही लेकिन एक-दो या अधिक आत्मीय मित्रों के साथ दिन में थोडा-बहुत समय अवश्य बिताएं, इससे भी आपका मन प्रसन्न व संतुष्ट रहेगा । इसके लिये आप अपने नजदीक के पार्क-बगीचे जैसे स्थान पर रोजाना सुबह के समय घूमने अथवा हल्के-फुल्के सामूहिक योग के कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं इससे न सिर्फ आपका स्वास्थ्य सुदृढ रहेगा बल्कि मित्रवर्ग में बढोतरी होने के साथ ही आपके समय का भी रचनात्मक उपयोग बना रहेगा । यदि आप स्वीमिंग में रुचि रखते हों और आपके पहुंच के दायरे जितनी दूरी पर स्वीमिंग-पूल हो तो आप उसे भी अवश्य जॉईन करें आपके आनन्द और स्वास्थ्य दोनों लक्ष्य आसानी से पूर्ण हो सकेंगे ।

          बेशक इस समय में आप अपने वर्किंग जीवन जैसे खुले हाथों खर्च कर सकने की सुविधाजनक स्थिति में नहीं होंगे, अतः अब अपनी प्रवत्ति थोडे खर्चे में अपने मन-मुताबिक जीवन जीने  की बना लेना ही आपके लिये सर्वाधिक उपयोगी व किसी सीमा तक आवश्यक ही रहेगा । अतः स्वयं को इस अनुसार तेजी से ढाल लेने का प्रयास करें

          अपने जीवन-साथी की कद्र करते हुए अपना अधिक समय उसके साथ व उसकी रुचियों के अनुरुप ही गुजारने की कोशिश करें क्योंकि यही एकमात्र वो रिश्ता है जिसके साथ आपकी अब तक की जिन्दगी का भी सबसे अधिक समय  गुजरा है और मृत्यु-पर्यंत भी जिसकी मौजूदगी और गैर मौजूदगी दोनें ही आपके अपने अस्तित्व के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण है । 

          इसके अलावा पठन-पाठन में अपनी रुचि बढाना भी आपके लिये एक उत्तम विकल्प है जिससे आपको नई-नई जानकारियां और समय के अनुसार नवीनतम ज्ञान भी मिलता रह सकेगा । यदि इन तरीकों से आप अपने को तटस्थ व संतुष्ट रख सकेंगे तभी आपके लिये आगामी बुढापे का समय वाह बुढापा ! करते बीत सकेगा, अन्यथा आह बुढापा ! जिसे हमारे अनेकों बुजुर्ग ढो रहे हैं वह तो है ही ।

          इसलिये कुल-मिलाकर अपने शेष जीवन का यही एकमात्र लक्ष्य रखें कि-
जिन्दगी जो शेष है, बस वही विशेष है...



17.6.16

दाम्पत्य जीवन में अनुकरणीय...

    
            वैवाहिक वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर पति-पत्नी साथ में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे । संसार की दृष्टि में वो एक आदर्श युगल थे, दोनों में प्रेम भी बहुत था, लेकिन कुछ समय से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संबंधों पर समय की धूल जम रही है । शिकायतें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं । 

           
बातें करते-करते अचानक पत्नी ने एक प्रस्ताव रखा कि मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना होता है लेकिन हमारे पास समय ही नहीं होता एक-दूसरे के लिए । इसलिए मैं दो डायरियाँ ले आती हूँ और हमारी जो भी शिकायत हो हम पूरा साल अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे व*अगले साल इसी दिन हम एक-दूसरे की डायरी पढ़ेंगे ताकि हमें पता चल सके कि हममें कौन-कौनसी कमियां हैं जिससे कि उसका पुनरावर्तन ना हो सके ।

            
पति भी सहमत हो गया कि विचार तो अच्छा है । डायरियाँ आ गईं और देखते ही देखते साल बीत गया । अगले साल फिर विवाह की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दोनों साथ बैठे । एक-दूसरे की डायरियाँ लीं । पहले आप, पहले आप की मनुहार हुई । आखिर में महिला प्रथम की परिपाटी के आधार पर पत्नी की लिखी डायरी पति ने पढ़नी शुरू की ।

            
पहला पन्ना, दूसरा पन्ना, तीसरा पन्ना,

          
आज शादी की वर्षगांठ पर मुझे ढंग का तोहफा भी नहीं दिया । आज होटल में खाना खिलाने का वादा करके भी नहीं ले गए । आज मेरे फेवरेट हीरो की पिक्चर दिखाने के लिए कहा तो जवाब मिला बहुत थक गया हूँ । आज मेरे मायके वाले आए तो उनसे ढंग से बात नहीं की । आज बरसों बाद मेरे लिए साड़ी लाए भी तो पुराने डिजाइन की । ऐसी अनेक रोज़ की छोटी-छोटी फरियादें लिखी हुई थीं ।

            
पढ़कर पति की आँखों में आँसू आ गए । पूरा पढ़कर पति ने कहा कि मुझे पता ही नहीं था मेरी गल्तियों का, किंतु फिर भी मैं ध्यान रखूँगा कि आगे से इनकी पुनरावृत्ति ना हो ।

           
अब पत्नी ने पति की डायरी खोली, पहला पन्ना… खाली,  दूसरा पन्ना…  खालीतीसरा पन्ना … . खालीअब दो-चार पन्ने साथ में पलटे तो वो भी खाली,  फिर 50-100 पन्ने साथ में पलटे तो वो भी खाली ।
    
            पत्नी ने कहा कि मुझे पता था कि तुम मेरी इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकोगे । मैंने पूरे साल इतनी मेहनत से तुम्हारी सारी कमियां लिखीं ताकि तुम उन्हें सुधार सको और तुमसे इतना भी नहीं हुआ ।

          
पति मुस्कुराया और कहा मैंने सब कुछ अंतिम पृष्ठ पर एक साथ लिख दिया है । 

            पत्नी ने उत्सुकता से अंतिम पृष्ठ खोला । उसमें लिखा था - मैं तुम्हारे मुँह पर तुम्हारी जितनी भी शिकायत कर लूँ लेकिन तुमने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए त्याग किए हैं और इतने वर्षों में जो असीमित प्रेम दिया है, उसके सामने मैं इस डायरी में लिख सकूँ ऐसी कोई भी कमी मुझे तुममें दिखाई ही नहीं दी । ऐसा नहीं है कि तुममें कोई कमी नहीं है - लेकिन तुम्हारा प्रेम, तुम्हारा समर्पण, तुम्हारा त्याग उन सब कमियों से ऊपर है । मेरी अनगिनत अक्षम्य भूलों के बाद भी तुमने जीवन के प्रत्येक चरण में छाया बनकर मेरा साथ निभाया है । अब अपनी ही छाया में कोई दोष कैसे दिखाई दे मुझे ।

              अब रोने की बारी पत्नी की थी । उसने पति के हाथ से अपनी डायरी लेकर दोनों डायरियाँ अग्नि में स्वाहा कर दीं और साथ में सारे गिले-शिकवे भी । फिर से उनका जीवन एक नवपरिणीत युगल की भाँति प्रेम से महक उठा । जब जवानी का सूर्य अस्ताचल की ओर प्रयाण शुरू कर दे तब हम एक-दूसरे की कमियां या गल्तियां ढूँढने की बजाए अगर ये याद करें हमारे साथी ने हमारे लिए कितना त्याग किया है, उसने हमें कितना प्रेम दिया है, कैसे पग-पग पर हमारा साथ दिया है तो निश्चित ही जीवन में प्रेम फिर से पल्लवित हो जाएगा । 
For all of us.


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