19.7.16

खुशवंती सूत्र - परिपूर्ण जीवन यात्रा हेतु...


           इन  सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं... 
      
          1. अच्छा स्वास्थ्य - अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते । बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं। 

          2. ठीक ठाक बैंक बैलेंस - अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं । पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप जब चाहें बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं । उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है ।

            3. अपना मकान - मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए । अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है ।

              4. समझदार जीवन साथी - जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं । हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना ।

             5. दूसरों की उपलब्धियों से न जलना - कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं । दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं । 

               6. गप से बचना - लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए । जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली - निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा । 

                7.  अच्छी आदत - कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना । फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है । कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करते रह सकें ।

               8. ध्यान - रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए । ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए । इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें । इस तरह आप खुद को जान पाएंगे । 

               9. क्रोध से बचना - कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें । जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं ।

              10. अंतिम समय - जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दु:ख, शोक या अफसोस के उनके साथ निकल पड़ना चाहिए, अंतिम यात्रा पर खुशी-खुशी,  शोक,  मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है,  उसी का जीवन सफल होता है ।

              मुझे नहीं पता कि खुशवंत सिंह ने पीएचडी की थी या नहीं ।  पर इन्हें पढ़ने के बाद लगता है कि ज़िंदगी के डॉक्टर भी होते हैं । ऐसे डॉक्टर ज़िंदगी बेहतर बनाने का फॉर्मूला देते हैं । ये ज़िंदगी के डॉक्टर की ओर से ज़िंदगी जीने के लिए दिए गए महत्वपूर्ण नुस्खे हैं ।


13.7.16

नशीला गोपनीय वार्तालाप...!


            एक बार विभिन्न श्रेणी के तीन लोग बैठ कर बातें कर रहे थे और बड़ी ही जोर-जोर से  हंस रहे थे - उन में से एक किसी मीडिया चैनल का मालिक था, दूसरा एक विदेशी था और तीसरा कोई एक नेता  था ।

            सब से पहले विदेशी बोला - यहाँ के लोग तो मूर्ख हैं,  हमारा कूड़ा खाते हैं, हमारे कुत्तो के साबुन से नहाते हैं ।  हमारे बनाये कीटनाशकों को कोल्डड्रिंक के रुप में अमृत समझ के पीते  हैं । इनकी ही गौमाता को मारकर हम मैग्गी, लेज और इस जैसे सभी सामानों में मिलाते  हैं और ये मूर्ख ब्रांडेड समझ के मजे से खा  जाते हैं ।  नीम की दातुन को  छुङवा के लगा दिया कोलगेट घिसने पर,  जो बनती है जानवरों की हड्डी पिसने पर । 

            दीवाली जैसे त्यौहारों पर  भी अब ये हमारी चाकलेट कुरकुरे खाते हैं और अपनी ही गौमाता  के  दूध में मिलावट  बताते हैं ।  हम यहाँ बैठ कर इनको अपने इशारे पे नचवाते हैं,  राम सेतु आदि यहां  बैठ के तुडवाते  हैं ।  यह जो थे कभी दुनिया के मालिक, आज नौकर इनको बना दिया,  आसमान  से पटक कर मिट्टी में इनको मिला  दिया ।  पर  इन मूर्खो को अभी भी अक्ल  नहीं आई । आज भी ब्रांडेड से नहाते  हैं, ब्रांडेड खाते हैं, ब्रांडेड चलाते हैं, ब्रांडेड पहनते हैं । हा... हा... हा...  पूरे कमरे में गूंज रही  ठहाको की  फुलवारी थी ।

            अब - "विदेशी" के बाद " नेता" की बारी थी । दारु का गिलास  उठा के नेता बोला  अरे मेरे विदेशी भाई तुमने हमको कम तोला । ये लोग तुम्हारे गुलाम न होते हम अगर तुम्हारे साथ न होते । इस सोने की चिड़िया को हमने ही रुलाया है । यहाँ का साम्राज्य हमने ही तुम्हें दिलाया है । तुमने तो सिर्फ पैसा और सामान ही दिया है, असली पागल  तो इनको  हमने किया है । कभी -  जात के नाम पर,  कभी -   धर्म  के नाम पर,  हमने ही -  भाई को भाई से लड़ाया है । हम यहाँ सब-कुछ निचोड़ कर बिकवा  देंगे, तुम इत्मीनान रखना, बस पैसा कम न होने पाये, मेरे स्विस खाते  का ख्याल  रखना ।

            इसी बीच "मीडिया वाला" चिल्लाया - तोड़ दारु की बोतल  जोर से बङबङाया - अरे ! तुम दोनों कुछ भी न होते,  अगर तुम्हारे साथ हम न होते ? तुम्हारी हर ओछी हरकत हम छुपाते  हैं, पकड़े हुए किसी बेकसूर को, ज़ालिम-ज़ालिम कहकर चिल्लाते हैं । ब्रांडेड आपके इसलिए बिकते  हैं  क्योंकि हर ब्रेक  में हमारे ये दिखते  हैं ।  विदेशी सामान का असली सच  हम दिखाते नहीं हैं,  इसलिए -  अच्छे स्वदेशी प्रॉडक्ट भी टिक पाते  नहीं  हैं, लोगों को मतिभ्रम में हम -  फंसा रहे हैं  । इसीलिए -  आप सबको मुर्ख बना रहे हैं । हर चैनल, हर एंकर यहाँ बिकता  है । इसीलिए -  सुबह 6 बजे से हर जगह विदेशी प्रॉडक्ट दिखता है । अगर सिर्फ 24 घंटे हम ईमांनदारी से खबरें चला दें तो तुम्हें एक ही दिन में जेल  भिजवा दें...

            उपरोक्त स्थिति में सब हों या न हों किंतु इन माध्यमों में अधिकांश तो ऐसे ही  हैं । आपका क्या ख्याल है  ?
 मूल रचना सोर्स : WhatsApp.
  

10.7.16

सामान्य मानव अधिकार से जुडी उपयोगी जानकारी...


            आप कोई भी हो – आप कुछ भी हो – ये 5 बातें जानना आपके लिए बहुत जरूरी है-

            बहोत सी ऐसी बातें- जिन्हें प्रायः हम ज़िंदगी में महत्व नहीं देते... “जाने दो, छोड़ो, बाद में देख लेंगे, हमें क्या करना है…” जैसे शब्दों का प्रयोग करके बातें भूल जाया करते है और ज़िंदगी में आगे बढ़ जाते है । लेकिन क्या आप जानते है– हमारे देश में सामान्य मानव अधिकार से जुडे इन मुद्दों की कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें हैं, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण  हम समय आने पर अपने सामान्य अधिकारों से वंचित रह जाते है ।

            जानिये  5 ऐसे सामान्य अधिकारों के बारे में, जो हममें से किसी के भी जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है-

1.  शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती-
            कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है ।

2. गेस सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है-
 
            पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते हैं. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है ।

            3. कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो… आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते हैं-

            इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तेमाल कर सकते हैं. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है ।

4. गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकला जा सकता-
            मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है ।

5. पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता-
            आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है ।

            इन रोचक फैक्ट्स को  आप तक WhatsApp के द्वारा मोबाईल to मोबाईल आगे बढाया जा रहा है ।  इन आवश्यक तथ्यों को आगे के लिये भी अपने ध्यान मैं रखना, हर किसी के लिये उपयोगी ही रहेगा क्योंकि हमारे सामान्य अधिकारों के रुप में ये किसी के भी जीवन में कभी भी किसी महत्वपूर्ण अवसर पर काम में आ सकते हैं ।

जानकारी सौजन्य :  WhatsApp

7.7.16

मेरे स्नेही मित्रो...


            सेवा के इस अनूठे आयोजन से खुद को जोडें । वर्तमान के मोसमी फल जैसे आम, जामुन, चिकू इत्यादी जिनका हममे से कोई भी उपयोग करने के बाद कृपया इनके बीज फेंके नही, बल्कि इन्हें पानी से धोकर एक प्लास्टीक की थैली में रखते चलें और जब भी आप शहर से बाहर जावें- तब जहां भी सूखी बंजर भूमि दिखे वहीं पर इन बीजों को फेंकें, अथवा सडक के ऐसे ही किसी किनारे पर फेंकें । यदि हमारे इस सुकृत्य से एक बीज भी पनप कर पेड बन जाता है तो समझें हमारा उद्देश्य सफल हो गया । यह किसी अकेले व्यक्ति का विचार नही हे बल्कि महाराष्ट्र और कर्नाटक मे बहुत से लोग इस अद्भुत मिशन से जुडे हैं । आज सुबह ही एक लेख पढने के पश्चात ऐसा लगा कि क्यों  न  हम सभी साथी इस मिशन से जुडें एवम् इसे अपनी एक आदत बनालें । इसके अलावा...

 जिस दिन भी हम मरेंगे...अपने साथ एक पेड़ भी लेकर जलेंगे
 इसलिये प्रकृति का जो कर्ज रहेगा हम पर  वो तो चुका दो यारों...
जीते जी दो पेड़ तो लगा दो यारों...!

            आप सबसे निवेदन है, यह मैसेज सिर्फ तीन से पांच लोगों तक जरूर भेजें... और उन लोगों से भी कहें कि यह मैसेज आगे तीन से पांच लोगों को भेजें, हम सब बलिदान ना सही पर देश के लिए इतना छोटा सा काम तो कर ही सकते है,,,

1. कचरा सड़क पर ना फेंकें ।
2. सड़कों, दीवारों पे ना थूकें ।
3. नोटों, दीवारों पर ना लिखें ।
4. गाली देना छोड़ दें ।
5. पानी एवम् लाइट बचाएँ ।
6. एक पौधा लगाएँ ।
7. ट्रेफिक रूल्स ना तोडें ।
8. रोज़ माता पिता का आशीर्वाद लें ।
9. लड़कियों की इज्जत करें ।
10. एम्बुलेंस को रास्ता दें ।

देश को नहीं, पहले खुद को बदलें । 

            यदि हम चाहते हैं कि हमारी संतानों को आने वाले समय में रहने को साफ व सुरक्षित माहौल मिले तो हमें इन छोटे-छोटे नियमों को अनिवार्य रुप से अपनी आदत बना लेना चाहिये वर्ना कोई भी मोदी, गांधी अथवा केजरीवाल जैसे नेता भी अकेले कुछ सुधार नहीं कर पाएंगे जब तक कि इन छोट-छोटे सामान्य नियमों को हम सभी अपनी जीवनचर्या का आवश्यक अंग ना बना लें । धन्यवाद...

            A very humble request to all. Send this message at least to five persons and ask them to further send to Three to five persons and keep the chain going...

           1. Don't throw garbage on the roads/streets
           2. Don't spit on roads and walls
           3. Don't write on walls and currency notes
           4. Don't abuse and insult others
           5. Save water and electricity
           6. Plant a tree
           7. Follow traffic rules
       8. Take care of your parents n grand parents, take their blessings       &    always respect them
           9. Respect women
         10. Give way to ambulance

          We got to change ourselves and not the country. Once we change ourselves the country will automatically change,

           If we want our kids to live in a clean and safe environment then pledge to follow these in your everyday life.

           Whether it's Modi or Gandhi or Kejriwal no person or leader can change the country alone, it's you & me who can change our beloved nation by changing ourselves

          *   Kindly forward this important message to every single Friend or Group so that reaches to every citizen of India.
Thanks.  *
 



4.7.16

असफलता V/s, सफलता...!


            5 वर्ष की उम्र में उसके पिता का निधन हो गया । 16 वर्ष की उम्र में उसका स्कूल छूट गया । 17 वर्ष की उम्र तक वह असंतुष्ट अवस्था में 4 बार जॉब बदल चुका था । 18 वर्ष की उम्र में उसकी शादी हो गई । 18 से 22 वर्ष की उम्र में उसने रेल्वे में कंडक्टर की नौकरी में फैल रहने के बाद सेना में नौकरी करने की कोशिश की और वहाँ से भी उसे निकाल दिया गया । उसने वकालत पास करने की कोशिश की वहाँ भी वह रिजेक्ट हुआ । फिर उसने इंश्योरेंस एजेंसी में प्रयास किया और वहाँ भी असफल ही साबित हुआ । 

            पारिवारिक जीवन में 19 वर्ष की उम्र में वह एक कन्या का पिता बना किंतु 20 वर्ष की उम्र में उसकी पत्नी उस कन्या को उसके पास छोडकर किसी अन्य पुरुष के साथ चली गई । उसने एक छोटे रेस्टोरेंट में कप-प्लेट धोने से शुरु करके कुक का काम किया । उसकी पुत्री का अपहरण हो गया और उसे भी वह बचा नहीं पाया । किंतु फिर भी संयोगवश उसने अपनी पत्नी को अपने साथ रहने के लिये राजी कर लिया ।

            65 वर्ष की उम्र में वह रिटायर हो गया और उसके रिटायरमेंट पर संस्थान ने उसके पास सिर्फ 105 डॉलर का चैक इस नोट के साथ भेजा कि इससे आगे व अधिक उसकी कोई पात्रता नहीं बनती । 

            थक-हारकर उसने आत्महत्या कर लेने का निर्णय किया । लगभग सारा जीवन हर जगह असफल रहने के कारण उसका जीवन के प्रति समस्त मोह भंग हो चुका था । उसने एक पेड के नीचे अपनी वसीयतनुमा ईच्छा लिखकर जब फांसी लगाने का प्रयास किया तब अचानक उसके मन में यह विचार आया कि जीवन में बहुत कुछ ऐसा है जो उसने अभी तक नहीं किया है । 

            अपने कुकिंग जॉब के दौरान वो यह महसूस करता था कि उसके बनाये हुए चिकन की रेसिपी को लोग पसन्द करते थे । तब उसने उस चेक को भुनवाकर 87 डॉलर इन्वेस्ट करते हुए कुछ चिकन के छोटे-छोटे पैकेट बनाकर केंचुकी फ्रॉयड चिकन के नाम से डोअर-टू-डोअर बेचने का काम फिर शुरु किया और इस बार उसे लोगों से धीरे-धीरे अच्छा प्रतिसाद मिलने लगा । 

            चलते-चलते जहाँ वह शख्स 65 वर्ष की उम्र में आत्महत्या करने को उद्धृत था वहीं 88 वर्ष की उम्र में कोलोनेल सेंडर्स का नाम फाउंडर ऑफ केंचुकी फ्रॉयड चिकन (KFC) के रुप में विश्व भर में बिलेनियर्स के रुप में स्थापित हो चुका था ।

            कथासार यही है कि जब तक जीवन है कोई भी व्यक्ति कभी भी कहीं भी नई शुरुआत कर सकता है । प्रयास कभी भी अंतिम नहीं होते । न ही यह बात मायने रखती है कि आपने उसके लिये कितनी कठोर मेहनत की । इंसान का काम है - चलते रहना, प्रयासरत रहना, वांछित परिणाम न मिलने पर तरीकों में बदलाव करते रहने के साथ पुनः-पुनः प्रयास करते रहना । लक्ष्य व स्वप्नपूर्ति के लिये कोई भी उम्र कभी भी अंतिम नहीं होती ।
 

1.7.16

आरक्षण का दंश...

           
            एक सज्जन से एक सवाल पूछा गया कि भारत में जनरल कैटेगरी वाला होने पर आपका क्या अनुभव है तो उन्होंने जो जबाब दिया, उसे पढ़िए........(हिंदी में अनुवाद)

           प्रवेश परीक्षा:
         मेरा स्कोर :192, उसका स्कोर :92, जी हाँ हम एक ही कॉलेज में पढ़े.....

           College Fees,
         मेरी हर सेमिस्टर की फी 30200, (मेरे परिवार की आय 5 lacs से कम है..) उसकी हर सेमिस्टर की फी 6600. (उसके माता और पिता दोनों अच्छा कमा रहे हैं......) जी हाँ हम दोनों एक ही होस्टल में रहते थे...

          Mess Fees,
         मैं 15000/- हर सेमिस्टर के देता था.... वो भी 15000 हर सेमिस्टर के देता था, लेकिन सेमिस्टर के अंत में वो उसे रिफंड होते थे..... जी हाँ हम एक ही मेस में खाते थे....

          Pocket Money,
         मेरा खर्चा 5000 था जो कि मैं ट्यूशन और थोड़ा बहुत अपने पिता से लेता था... वो 10000 खर्चा करता था जो कि उसे स्कॉलरशिप के मिलते थे... जी हाँ हम एक साथ पार्टी करते थे....

          CAT 2015,
        मेरा स्कोर : 99 percentile. (किसी IIM से एक मिसकॉल का इंतज़ार रहा.) उसका स्कोर : 63 percentile. ( IIM Ahemedabad के लिए सलेक्ट हुआ) जी हाँ ऐप्टीट्यूड और रीजनिंग उसे मैंने पढ़ाया था....

          OIL Campus recruitement,
          मैं : Rejected. (My OGPA 8.1) वो : selected. (His OGPA 6.9) जी हाँ हमने एक ही कोर्स पढ़ा था...

          GATE Score,
       मेरा स्कोर : 39.66 (डिसक्वालीफाईड सो INR 1,68,000 की स्कॉलरशिप भी हाथ से गई) उसका स्कोर : 26 (क्वालीफाईड और INR 1,68,000 के साथ-साथ अतिरिक्त स्कॉलरशिप भी) जी हाँ हमने एक जैसे नोट्स शेयर किये थे..

            कौन हूँ मैं ? मैं भारत में एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ...

            दिमाग में बस कुछ सवाल हैं.....

            क्या उसके पास चलने के लिए दो पैर नहीं हैं ? क्या उसके पास लिखने या काम करने के लिए दो हाथ नहीं हैं ? क्या उसके पास बोलने के लिए मुंह नहीं है ? क्या उसके पास सोचने के लिए दिमाग नहीं है ? अगर हैं तो फिर हम दोनों को एक जैसा ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता ? 

          ये बात राजनितिक पार्टीयो के बजाय देश के सम्माननीय न्यायालय के सभी महानुभावों तक पहुंचे तब तक forward करे ताकि देश आरक्षण की दीमक से बरबाद होने से बच जाये ।

सोर्स - WhatsApp.
 
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