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26.10.19

सबसे शक्तिशाली...

            
            एक पिता ने अपने पुत्र की बहुत अच्छी परवरिश की । उसे अच्छी तरह से पढ़ाया, लिखाया, तथा उसकी सभी सुकामनाओ की पूर्ति की ।

           
कालान्तर में वह पुत्र एक सफल इंसान बना और एक मल्टीनेशनल कंपनी में सी.ई.ओ. बन गया ।
  
           
उच्च पद,  अच्छा वेतन,  सभी सुख सुविधांए उसे कंपनी की और से प्रदान की गई । समय गुजरता गया उसका विवाह एक सुलक्षणा कन्या से हो गया,  और उसके परिवार में एक सुन्दर कन्या भी पुत्री स्वरुप आ गई । पिता अब बूढा हो चला था । एक दिन पिता को पुत्र से मिलने की इच्छा हुई और वो पुत्र से मिलने उसके ऑफिस में गया ।

            वहां उसने देखा कि उसका पुत्र एक शानदार ऑफिस का अधिकारी बना हुआ है, उसके ऑफिस में सैंकड़ो कर्मचारी उसके अधीन कार्य कर रहे है ! ये सब देख कर पिता का सीना गर्व से फूल गया ।
    
              वो चुपके से उसके चेंबर में पीछे से जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया  और उसने प्यार से अपने पुत्र से पूछा - "यहाँ सबसे शक्तिशाली इंसान कौन है" ?  पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से हंसते हुए कहा "मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी " ।

            पिता को इस जवाब की  आशा नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा - पिताजी यहाँ सब से शक्तिशाली इंसान आप हैं, जिन्होंने मुझे इस योग्य बनाया ।

            उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे । न जाने क्या सोचकर उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा- एक बार फिर बताओ यहाँ सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ?
   
             पुत्र ने  इस बार कहा- "पिताजी आप हैं, यहाँ सब से शक्तिशाली इंसान" । पिता सुनकर आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने कहा "अभी तो तुम अपने आप को यहाँ सब से शक्तिशाली इंसान बता रहे थे अब तुम मुझे बता रहे हो" ?
   
              पुत्र ने हंसते हुए ससम्मान उन्हें अपने सामने बिठाते हुए कहा - "पिताजी उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था, जिस पुत्र के कंधे पर या सिर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र तो सबसे शक्तिशाली इंसान ही होगा ना, बोलिए पिताजी"  ।
 
           
पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस कर के अपने गले लग लिया । सच ही है जिस के कंधे पर या सिर पर पिता का हाथ होता है,  वो ही इस दुनिया में सब से शक्तिशाली इंसान होता है ।

            सदैव अपने बुजुर्गों का सम्मान करें । क्योंकि न सिर्फ हमारी सफलता के पीछे वे ही होते हैं बल्कि वे होते हैं तो हम होते हैं ।

20.5.16

ईच्छा भगवान की...


          एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान- आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे, एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बन कर खड़ा हो जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आएँ l

          भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना कुछ बोलना नहीं । मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है ।  सेवक मान जाता है और परिवर्तनस्वरुप भगवान के स्थान पर खडा हो जाता है ।

          सबसे पहले मंदिर में बिजनेस मैन आता है और कहता है, भगवान मैंने एक नयी फैक्ट्री डाली है, उसे खूब सफल करना l वह माथा टेकता है, तो उसका पर्स नीचे गिर जाता है l वह बिना पर्स लिये ही चला जाता है ।

          सेवक बेचैन हो जाता है. वह सोचता है कि रोक कर उसे बताये कि पर्स गिर गया, लेकिन शर्त की वजह से वह नहीं कह पाता ।

          इसके बाद एक गरीब आदमी आता है और भगवान को कहता है कि घर में खाने को कुछ नहीं. भगवान मदद करो । तभी उसकी नजर पर्स पर पड़ती है. वह भगवान का शुक्रिया अदा करता है और पर्स लेकर चला जाता है ।

           अब तीसरा व्यक्ति आता है, वह नाविक होता है  । वह भगवान से कहता है कि मैं 15 दिनों के लिए जहाज लेकर समुद्र की यात्रा पर जा रहा हूं, यात्रा में कोई अड़चन न आये भगवान !

      तभी पीछे से बिजनेसमैन पुलिस के साथ आता है और कहता है कि मेरे बाद ये नाविक आया है l इसी ने मेरा पर्स चुरा लिया है, पुलिस नाविक को ले जा रही होती है तभी सेवक बोल पड़ता है । अब पुलिस सेवक के कहने पर उस गरीब आदमी को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है । रात को भगवान आते हैं,  तो सेवक खुशी-खुशी पूरा किस्सा बताता है ।
           

          भगवान कहते हैं, तुमने किसी का काम बनाया नहीं, बल्कि बिगाड़ा है । वह व्यापारी गलत धंधे करता है,  अगर उसका पर्स गिर भी गया, तो उसे फर्क नहीं पड़ने वाला था बल्कि इससे उसके पाप ही कम होते, क्योंकि वह पर्स गरीब इंसान को मिला था. पर्स मिलने पर उसके बच्चे भूखों नहीं मरते ।

          रही बात नाविक की, तो वह जिस यात्रा पर जा रहा था, वहां तूफान आनेवाला था, अगर वह जेल में रहता, तो जान बच जाती. उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती. तुमने सब गड़बड़ कर दी ।

          कई बार हमारी लाइफ में भी ऐसी प्रॉब्लम आती है, जब हमें लगता है कि ये मेरे साथ ही क्यों हुआ ।  लेकिन इसके पीछे उपर वाले की प्लानिंग होती है । जब भी कोई समस्या हो आये. उदास मत होना  और सोचना कि जो भी होता है,  अच्छे के लिए ही होता है ।

मैंने प्रभु से मांगी शक्ति 
उन्होंने मुझे दी कठिनाईयां, हिम्मत बढाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी बुद्धि
उन्होंने मुझे दी उलझनें, सुलझाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी समृद्धि
उन्होंने मुझे दी समझ, काम करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगा प्यार
उन्होंने मुझे दिए दुःखी लोग, मदद करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी हिम्मत
उन्होंने मुझे दी परेशानियां, उबर पाने के लिये.

मैंने प्रभु से मांगा वरदान
उन्होंने मुझे दिये अवसर उन्हें पाने के लिये.


वो मुझे नहीं मिला जो मैंने मांगा था. किन्तु
मुझे वो मिल गया जो मेरे लिये ठीक था ।

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