13.6.16

हमारा गौरवशाली इन्दौर...


             भारत के नक्शे पर कई शहर अपनी विशेष पहचान के कारण ही जाने जाते हैं, उन्हीं में यदि रानी अहिल्याबाई व सर सेठ हुकमचंद जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों से जुडे इन्दौर शहर की बात की जावे तो चाहे यह शहर बम्बई, दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास जैसे देश के महानगरों सा आकार नहीं रखता हो किंतु इसकी ऐतिहासिकता के साथ ही ऐसी अनेक विशेषतायें इस शहर के साथ शुरु से जुडी रही हैं जो इसे देश के नक्शे में एक विशिष्ट स्थान दिलवाते हुए इसकी पहचान को हमेशा से एक विशेष दर्जा सदैव दिलवाती रही हैं । 

            देश के सात राज्यों से सीधे जुडे मध्यप्रदेश के भी लगभग मध्य में राज्य की औद्योगिक व व्यापारिक राजधानी का दर्जा रखने के कारण अन्य प्रांतों से आकर बसने वाली आबादी का सर्वोच्च भार वहन करने वाले इस शहर की खासियतों का यदि जिक्र करना प्रारम्भ किया जावे तो वास्तव में लेख की लम्बाई तो बढती ही चली जाएगी किंतु यहाँ की विशेष पहचान के क्रम समाप्त होते नहीं दिखेंगे । फिर भी इस क्रम में यह जानने की कोशिश करते हैं कि वे कौन-कौनसी प्रमुख विशेषताएँ हैं जो इस शहर को इसकी खासियतों के आधार पर इसे अन्यों से कुछ अलग दिखला सकने का कारण बनती हैं-

            महान क्रिकेट खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने अपने वनडे करियर की एकमात्र सेंचुरी इंदौर के नेहरू स्टेडियम में लगाई ।

            इन्दौर स्थित सैन्य छावनी MHOW (Military Headquarters Of War) देश की मुख्य सैन्य छावनियों में शामिल है ।

            जानकारी के अनुसार इन्दौर का नामकरण इन्द्रेश्वर मंदिर के नाम पर हुआ था, शुरूआत में यह "इन्दूर" था,जो आगे चलकर "इन्दौर" कहलाया ।

            इन्दौर देश का एकमात्र शहर है जहाँ पर IIM एवं IIT दोनों है ।
 
           इन्दौर में एशिया की सबसे बड़ी रिहायशी कॉलोनी सुदामा नगर है ।

            देश के पहले निजी रेडियो चैनल "रेडियो मिर्ची" ने अपने प्रसारण की शुरुआत इन्दौर से की थी ।

            स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, फिल्म स्टार सलमान खान, क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ और परम पूज्यनीय योग गुरु श्री मनीष शर्मा की जन्मभूमि भी इन्दौर है ।

            पूर्व में इन्दौर को  "म.प्र.का डेट्रॉयट"  नाम से नवाजा जा चुका है ।

         इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां 100 कि.मी. की रेंज में दो ज्योतिर्लिंग हैं-  1. ओंकारेश्वर  और  2. महाकालेश्वर ।

            इन्दौर स्थित आर आर कैट देश की मुख्य प्रयोगशालाओं में एक है । यहां एक्सलरेटर, क्रायोजेनिक्स सहित कई महत्वपूर्ण शोध हो रहे हैं ।

            टेस्ट क्रिकेट में एक टेस्ट में   सर्वाधिक विकेट लेने का  कीर्तिमान इंदौर के नरेन्द्र हिरवानी और बाब मैसी (आस्ट्रेलिया) के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है । 
.
            किसी महिला प्रत्याशी द्वारा एक ही लोकसभा सीट से एक ही पार्टी के टिकट पर सर्वाधिक बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान इन्दौर की सांसद और वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन के नाम पर दर्ज ।

            विकास के शुरुआती वर्षों में इन्दौर "कपड़ा मिलों का शहर" के नाम से प्रसिद्ध था लेकिन अब ये सभी मिलें बंद हो चुकी है ।

            इन्दौर स्वाद के शौकीनों का शहर है । इसे "स्वाद की राजधानी" के रूप मे जाना जाता है ।

            यहाँ पर एशिया के सबसे बड़े गणपति विराजमान हैं (बड़ा गणपति)

            यहाँ पर संपूर्ण कांच से निर्मित मंदिर है । जहां पर छत, दिवार से लेकर फर्श भी कांच की है और ये सारे कांच  विदेशों से मंगाए गए थे ।

            यहीं पर ही वीरेंद्र सहवाग ने 200 रन बनाये थे ।

            यहीं के एक विधायक के नाम सबसे ज्यादा मतों से जितने का रिकार्ड है ।

            यहीं की एक बेटी पलक मुछाल ने गाने गाकर सबसे ज्यादा हार्ट सर्जरी करवाई और यह क्रम अभी तक भी सतत जारी है ।

            यहीं का एक ट्रैफिक पुलिस आज दुनिया का सबसे पसंदीदा ट्रैफिक पुलिस है । जिसे काम करते सभी देखना चाहते है । रणजीत सिंह ।

            यहाँ पर स्थित दवा बाजार एशिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है ।

            यहीं पर एक ऐसा पर्वत है जहां पर पितरों की याद में पोधे लगाये जाते है । पितृ पर्वत ।

            यही वो शहर है जहां मूक बधिरों की सेवा के लिए सबसे अच्छा स्कूल और ट्रेनिग कैंप है ।

            यही वो शहर है जहाँ के एक व्यापारी सर सेठ हुकुमचंदजी (कॉटन किंग) की तस्वीर आज भी लंदन कॉटन एक्सचेंज में मुख्य द्वार पर लगी है ।


            यहीं पर सर सेठ हुकुम चंद जी द्वारा स्वर्ण से निर्मित रथ है जो दुनिया में कही नहीं है और वो केवल महावीर जयंती पर ही निकलता है ।

            मोबाईल कंपनी एयर टेल ने अपनी मोबाइल सेवा की शुरुवात  सर्व प्रथम इंदौर से ही की थी ।
 

            अनंत चतुर्दशी पर रात भर चलने वाले विशाल चल समारोह और रंगपंचमी पर दिन भर रंगों से सरोबार हुडदंगीयों की विशाल सामूहिक गेर जिनके फिल्मांकन के लिये राजश्री प्रॉडक्शन जैसी नामी-गिरामी फिल्म प्रोड्यूसर संस्थाएँ विशेष आयोजन रखती हैं वह भी इसी इन्दौर शहर की विशिष्ट पहचान रही है ।


और अब इन्दौर का एक परिचय यह भी...!

  
इन्दौरियों को समर्पित - जन्म दिन विश करने का तरीका...
 
हिंदी में- जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाये भाई साब.


English में:- Happy Birthday Sir.


भोपाल में- जन्मदिन मुबारक हो,


मुम्बई में- भाई को Happy बड्डे, 


            और इंदौर  में -  हमारे भाई साब,  ऊर्जावान नेतृत्व के धनी, गो-माता के रक्षक, गरीबो के मसीहा, विकासपुरुष, बालाजी महाराज के परमभक्त, यारों के यार, युवा क्रन्तिकारी, दिलफेंक दिलदार, हरफनमोला हर परिस्थितियों में दोस्तों का साथ देने वाले, चाणक्य से भी तेज बुद्धि वाले, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सदैव जाग्रत रहने वाले, पुरे भारत में इंदौर का नाम रोशन करने वाले, निडर समाजसेवी, बाल्यकाल से ही ऊर्जावान, संघ के निडर सिपाही, युवा नेता, प्रखर वक्ता, महाँकाल के परमभक्त, सरल ह्रदय के स्वामी, याददास्त के धनी, युवा क्रांतिकारी, गरीबी से लड़ने वाले, एक बार प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने वाले, मुख्यमंत्री के साथ फ़ोटो खिंचाने वाले, विधायक के सीधे हाथ, मीठी चटनी में समोसा खाने वाले, एक हाथ से उज्जैन से इंदौर तक टू-व्हीलर चलाने वाले, गर्मी में छांव करने वाले, घनघोर बारिश में भी पानी बांध देने वाले, ऐसे हमारे बड़े या छोटे भाई साब को जन्मदिन की भोत-भोत शुभकामनाएं...


इन्दौर गजब है - सब से अलग है ।
 

23.5.16

औचित्य ! धार्मिक स्नान का...



         शाही  स्नान का पर्व था । घाट पर भारी भीड़ लग रही थी ।

           शिव पार्वती आकाश से गुजरे । पार्वती ने इतनी भीड़ का कारण पूछा - आशुतोष ने कहा - सिंहस्थ कुम्भ पर्व पर शाही स्नान करने वाले स्वर्ग जाते है । उसी लाभ के लिए यह स्नानार्थियों की भीड़ जमा है ।

           पार्वती का कौतूहल तो शान्त हो गया पर नया संदेह उपज पड़ा, इतनी भीड़ के लायक स्वर्ग में स्थान कहाँ है ? फिर लाखों वर्षों से लाखों लाख लोग इस आधार पर स्वर्ग पहुँचते तो उनके लिए स्थान भी तो कहीं रहता ?

           छोटे से स्वर्ग में यह कैसे बनेगा भगवती ने अपना नया सन्देह प्रकट किया और समाधान चाहा । भगवान शिव बोले - शरीर को गीला करना अलग बात है, जबकि यहाँ मन की मलीनता धोने वाला स्नान जरूरी है । स्वर्ग तो मन को धोने वाले ही जाएगा ।

          
सन्देह घटा नहीं, बढ़ गया । पार्वती बोलीं - इतने विशाल जनसमूह में यह कैसे पता चलेगा कि किसने शरीर धोया किसने मन संजोया ।

          
यह कार्य से जाना जाता है । शिवजी ने इस उत्तर से भी समाधान न होते देखकर प्रत्यक्ष उदाहरण से लक्ष्य समझाने का प्रयत्न किया ।

          मार्ग में शिव कुरूप कोढ़ी बनकर पढ़ रहे ।  पार्वती को और भी सुन्दर सजा दियादोनों बैठे थे । स्नानार्थियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए रुकती ।  अनमेल स्थिति के बारे में पूछताछ करती ।

          
पार्वतीजी रटाया हुआ विवरण सुनाती रही । ये मेरे पति हैं, गंगा स्नान की कामना से आए हैं । गरीबी के कारण इन्हें कंधे पर रखकर लाई हूँ । बहुत थक जाने के कारण थोड़े विराम के लिए हम लोग यहाँ बैठे हैं ।

          
अधिकाँश दर्शकों की नीयत डिगती दिखती । वे सुन्दरी को प्रलोभन देते और पति को छोड़कर अपने साथ चलने की बात कहते । पार्वती लज्जा से गढ़ गई । भला ऐसे भी लोग  स्नान को आते हैं क्या ?  निराशा देखते ही बनती थी ।

          
संध्या हो चली । एक उदारचेता आए, विवरण सुना तो आँखों में आँसू भर गए । सहायता का प्रस्ताव किया और कोढ़ी को कंधे पर लादकर  तट तक पहुँचाया । जो सत्तू साथ में था उसमें से उन दोनों को भी खिलाया । साथ ही सुन्दरी को बार-बार नमन करते हुए कहा - आप जैसी देवियां ही इस धरती की स्तम्भ हैं । धन्य हैं आप जो इस प्रकार अपना धर्म निभा रही हैं ।  प्रयोजन पूरा हुआ - शिव पार्वती उठे और कैलाश की ओर चले गए । रास्ते में कहा - पार्वती इतनों में एक ही व्यक्ति ऐसा था, जिसने मन धोया और स्वर्ग का रास्ता बनाया ।  स्नान का महात्म्य तो सही है पर उसके साथ मन भी धोने की शर्त लगी है ।

           पार्वती समझ गई कि स्नान महात्म्य सही होते हुए भी... क्यों लोग उसके पुण्य फल से वंचित रहते हैं ?


21.5.16

कुछ रह तो नहीं गया ?

 
          
           जिंदगी के सफ़र में चलते चलते हर मुकाम पर यही सवाल परेशान करता रहता है.... कुछ रह तो नहीं गया  ?

          शादी में दुल्हन को बिदा करते ही शादी का हॉल खाली करते हुए दुल्हन की बुआ ने पूछा- "भैया, कुछ रह तो नहीं गया ना ? चेक करो ठीक से । बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे ।  सब कुछ तो पीछे रह गया, 25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड से, वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था वो नाम भी पीछे रह गया अब ? "भैया, देखा ? कुछ पीछे तो नहीं रह गया ?" बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला, पर दिल में एक ही आवाज थी,  सब कुछ तो यही  रह गया ।

          3 महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जानेवाली माँ से दाई ने पूछा... कुछ रह तो नहीं  गया ? पर्स, चाबी सब ले लिया ना  ? अब वो कैसे हाँ कहे ? पैसे की अनिवार्यता के पीछे भागते भागते... सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है,  वह  तो यहीं रह गया है ।

          बडी तमन्नाओ के साथ बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और वह पढ़कर वही सैटल हो गया, पौत्र जन्म पर मुश्किल से 3 माह का वीजा मिला था, और चलते वक्त बेटे ने पूछ लिया, सब कुछ चैक कर लिया पापा कुछ रह तो नही गया ?  क्या जबाब देते कि अब छूटने को बचा ही क्या है  ?

          60 वर्ष पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की शाम पी. ए. ने याद दिलाया- चेक करलें सर, कहीं कुछ रह तो नही गया,  थोडा रूका और सोचा पूरी जिन्दगी तो यही आने-जाने मे बीता दी,  अब और क्या रह गया होगा ।

         "कुछ रह तो नहीं गया ?" श्मशान से लौटते वक्त किसी ने पूछा । नहीं कहते हुए वो आगे बढ़ा... पर नजर फेर ली, एक बार पीछे देखने के लिए.... पिता  की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया ।  भागते हुए गया, पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया । दोस्त ने पूछा... कुछ रह गया था क्या ?  भरी आँखों से फिर देखा बोला-  नहीं कुछ भी नहीं रहा अब... और जो कुछ  रह भी गया है  वह तो सदा मेरे साथ ही रहेगा ।

          एक बार फिर समय निकालकर सोचें कि कहाँ-कहाँ क्या-क्या पीछे रह गया ।  शायद पुराना समय याद आ जाए,  आंखें भर आएं और आज को फिर से जी भरकर जी लेने का मकसद मिल जाए...!

20.5.16

ईच्छा भगवान की...


          एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान- आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे, एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बन कर खड़ा हो जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आएँ l

          भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना कुछ बोलना नहीं । मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है ।  सेवक मान जाता है और परिवर्तनस्वरुप भगवान के स्थान पर खडा हो जाता है ।

          सबसे पहले मंदिर में बिजनेस मैन आता है और कहता है, भगवान मैंने एक नयी फैक्ट्री डाली है, उसे खूब सफल करना l वह माथा टेकता है, तो उसका पर्स नीचे गिर जाता है l वह बिना पर्स लिये ही चला जाता है ।

          सेवक बेचैन हो जाता है. वह सोचता है कि रोक कर उसे बताये कि पर्स गिर गया, लेकिन शर्त की वजह से वह नहीं कह पाता ।

          इसके बाद एक गरीब आदमी आता है और भगवान को कहता है कि घर में खाने को कुछ नहीं. भगवान मदद करो । तभी उसकी नजर पर्स पर पड़ती है. वह भगवान का शुक्रिया अदा करता है और पर्स लेकर चला जाता है ।

           अब तीसरा व्यक्ति आता है, वह नाविक होता है  । वह भगवान से कहता है कि मैं 15 दिनों के लिए जहाज लेकर समुद्र की यात्रा पर जा रहा हूं, यात्रा में कोई अड़चन न आये भगवान !

      तभी पीछे से बिजनेसमैन पुलिस के साथ आता है और कहता है कि मेरे बाद ये नाविक आया है इसी ने मेरा पर्स चुरा लिया हैपुलिस नाविक को ले जा रही होती है तभी सेवक बोल पड़ता है । अब पुलिस सेवक के कहने पर उस गरीब आदमी को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है । रात को भगवान आते हैं,  तो सेवक खुशी-खुशी पूरा किस्सा बताता है ।
           

          भगवान कहते हैं, तुमने किसी का काम बनाया नहीं, बल्कि बिगाड़ा है । वह व्यापारी गलत धंधे करता है,  अगर उसका पर्स गिर भी गया, तो उसे फर्क नहीं पड़ने वाला था बल्कि इससे उसके पाप ही कम होते, क्योंकि वह पर्स गरीब इंसान को मिला था. पर्स मिलने पर उसके बच्चे भूखों नहीं मरते ।

          रही बात नाविक की, तो वह जिस यात्रा पर जा रहा था, वहां तूफान आनेवाला था, अगर वह जेल में रहता, तो जान बच जाती. उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती. तुमने सब गड़बड़ कर दी ।

          कई बार हमारी लाइफ में भी ऐसी प्रॉब्लम आती है, जब हमें लगता है कि ये मेरे साथ ही क्यों हुआ ।  लेकिन इसके पीछे उपर वाले की प्लानिंग होती है । जब भी कोई समस्या हो आये. उदास मत होना  और सोचना कि जो भी होता हैअच्छे के लिए ही होता है ।

मैंने प्रभु से मांगी शक्ति 
उन्होंने मुझे दी कठिनाईयांहिम्मत बढाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी बुद्धि
उन्होंने मुझे दी उलझनेंसुलझाने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी समृद्धि
उन्होंने मुझे दी समझकाम करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगा प्यार
उन्होंने मुझे दिए दुःखी लोगमदद करने के लिये.


मैंने प्रभु से मांगी हिम्मत
उन्होंने मुझे दी परेशानियांउबर पाने के लिये.

मैंने प्रभु से मांगा वरदान
उन्होंने मुझे दिये अवसर उन्हें पाने के लिये.


वो मुझे नहीं मिला जो मैंने मांगा था. किन्तु
मुझे वो मिल गया जो मेरे लिये ठीक था ।

19.5.16

फलसफा जिंदगी का...


          एक उद्योगपति आवश्यक मीटिंग के लिये कहीं जा रहा था । अचानक रास्ते में उसकी कार बंद हो गई । रुकने का समय नहीं था अतः उसने कार की रिपेरिंग व घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ड्रायवर पर छोडते हुए कुछ दूर खडे एक ऑटो-रिक्शा को आगे चलने के लिये प्लान किया । जब वह उस ऑटो तक पहुँचा तो उसने देखा कि उसका चालक पूरी रिलेक्स मुद्रा में अपना कोट उतारकर पैसेन्जर सीट पर पसरी हुई अवस्था में आराम करते हुए कोई फिल्मी गीत गुनगुना रहा था । उद्योगपति ने जब उसे चलने के लिये कहा तो वह 20/- रु. किराया बताते हुए उनके बैठने की जगह साफ करते हुए उठ खडा हुआ । उद्योगपति यह सोचते हुए उसकी रिक्शा में सवार हो गया कि सिर्फ 20/- रु. किराया लेकर भी उसी रिलेक्स मुद्रा में वैसे ही गीत गुनगुनाते हुए वह इतना निश्चिंत जीवन कैसे जी पा रहा है ठिकाने पर पहुँचकर उन्होंने उसे पैसे देते हुए फिर पूछा कि 15-20 मिनीट इन्तजार करके मुझे मेरे इस ठिकाने तक छोड सकोगे । चालक ने फिर 30/- रु. किराया बताया और व्यवसायी का ईशारा पाकर वहीं रुक गया । 

           वापसी में भी उस व्यवसायी ने उसे उसी निश्चिंत मुद्रा में चलते देखा । कुछ सोचकर उसने उस चालक को अपने घर भोजन करने के लिये निमंत्रित किया जिसे उस चालक ने सहर्ष स्वीकार कर लिया । घर पहुँचने पर अपने प्रमुख सेवक को उसने अपने साथ उस ऑटो चालक के लिये शाही डिनर का इंतजाम करने का ईशारे में निर्देश दिया । भोजन का समय चल ही रहा था - कुछ ही देर में डाईनिंग टेबल पर सूप, डेजर्ट, स्वीट्स व हर तरह के लजीज भोजन से डाईनिंग टेबल सज गया ।

          व्यवसायी ने उसे डाईनिंग टेबल पर निमंत्रित कर भोजन शुरु किया तो वह ये देखकर फिर हैरान हो गया कि वह ऑटो चालक बगैर किसी विशेष भाव अथवा प्रतिक्रिया के ऐसे खाना खाते दिख रहा था जैसे अपना सामान्य भोजन कर रहा हो । तब एक कदम आगे बढते हुए व्यवसायी ने उसे अपने यहाँ ही भोजन पश्चात् आराम करने का निमंत्रण दिया और उस ऑटो चालक ने वह भी मान लिया ।

         
उद्योगपति के इशारे पर उस ऑटो चालक को भोजन के बाद फाईव स्टार होटल के समकक्ष रुम में विश्राम के लिये ठहरा दिया और वहाँ भी वह व्यवसायी कुछ छुपकर उसकी प्रतिक्रिया को नोट करने लगा । घोर आश्चर्य के साथ वहाँ भी उसने देखा कि उसके चेहरे पर कहीं कोई विशेष प्रसन्नता अथवा विस्मय के भाव नहीं आये और वो वैसे ही निश्चिंत मुद्रा में आराम करते दिखा ।

          तब उस उद्योगपति ने सोचा कि अब यदि इसे अचानक इसके ऑटो पर छोड दिया जावे तो निश्चय ही इसे यहाँ के चकाचौंध भरे ये सुख-सुविधा पूर्ण साधनों की कमी महसूस होते दिखेगी । उस मुताबिक उसने अपने प्रमुख सेवक को इशारा किया और उस सेवक ने उस चालक के पास जाकर पूछा कि आप यहाँ आराम व मजे में हैं हाँ बिल्कुल, उस ऑटो चालक ने जवाब दिया, तब वह सेवक बोला कि नहीं हमारे साहब को लग रहा है कि आप यहाँ अपनी निजी जिंदगी को मिस कर रहे हैं - इसलिये आपको आपके ठिकाने पर छोड दिया जावे । कोई बात नहीं ! कहते हुए तत्काल वह ऑटो चालक उठकर चल पडने की मुद्रा में तैयार हो गया ।  

          उस ऑटो चालक को तत्काल गाडी में बैठाकर वहाँ ले जाया गया जहाँ उसका ऑटो खडा हुआ था । वह उद्योगपति भी उसकी बदली हुई प्रतिक्रिया देखने दूसरी गाडी में स्वयं को छुपाते हुए वहाँ तक पहुँचा और फिर यह देखकर चमत्कृत रह गया कि बिल्कुल सामान्य भाव से उस चालक ने अपनी सीट झटकारी और फिर से अधलेटी मुद्रा में अपना वही गीत गुनगुनाने लगा । अब तो उस उद्योगपति से रहा नहीं गया और वह उसके पास जाकर बोला - यार तुम गजब आदमी हो, मैंने तुम्हें इतने उंचे-नीचे परिवर्तन पिछले कुछ घंटों में महसूस करवाये किंतु कहीं भी तुम्हारी विस्मयकारी अथवा दुःखी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली । ऐसा कैसे ?

          तब उस ऑटो चालक का जवाब स्मरण रखने योग्य था - साहब, जिंदगी तो हर किसी की हर समय परिवर्तनों से भरी ही रहती है यदि मैं सुख में पगलाने लगूँ और फिर दुःख में विचलित रहने लगूँ तो मेरे लिये तो अनावश्यक रुप से मेरी उर्जा के अपव्यय का रोज कोई ना कोई कारण तो बना ही रहेगा और मैं कभी खुशी व कभी दुःखों के अतिरेक में अपनी स्वाभाविक जिंदगी कभी जी ही नहीं पाऊंगा ।

         
जबकि हममें से अधिकांश लोग खुशी में बौराये हुए और दुःखों में घबराये हुए ही अपनी जिंदगी गुजार रहे होते हैं और अपनी सामान्य शारीरिक उर्जा को अनावश्यक रुप से खर्चते हुए कभी भी वास्तविक रुप से सुखी नहीं रह पाते ।

         
इसलिये हमें भी जीवन का मुख्य सिद्धांत यही रखना चाहिये कि-

कर्णण्येवादिकारस्ते माफलेषु कदाचन...

व्यस्त रहो,  मस्त रहो और बदले में स्वस्थ रहो.

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है,
मरो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ भी नहीं ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...